राउत दोहे

 

पी सी लाल यादव इस लेख में छत्तीसगढ़ में राउत समुदाय के दोहे के बारे में बात करते हैं। वह 'बच्चों की देवारी' पर जोर देते हैं - बचपन और बच्चों पर आधारित दोहे।

P. C. Lal Yadav in this article talks about the dohas' (couplets) of the Raut community in Chhattisgarh. He emphasises couplets that describe childhood.  

This content has been created as part of a project commissioned by the Directorate of Culture and Archaeology, Government of Chhattisgarh, to document the cultural and natural heritage of the state of Chhattisgarh.

छत्तीसगढ़ का राउत नाच

 

इस निबंध में महावीर अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के राउत नाच पर विस्तार से चर्चा की है।

In this essay Mahavir Agrawal discusses the Raut Naach from Chhattisgarh in detail.

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बिलासपुर का राउत नृत्य

 

Every year the city of Bilaspur, Chhattisgarh, curates the Raut Naach festival. The Raut Naach festival is organised around Diwali and goes on for 15 days. This essay by Rajesh Ganodwale talks about the celebration of Raut Naach festival as celebrated in Bilaspur, Chhattisgarh.

 

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दैनिक जीवन में धान | Paddy culture in everyday life

 

धान एक ऐसा अन्न है, जिसका उपयोग इसके आविर्भाव के साथ ही विभिन्न तरीक़ों से  भिन्न-भिन्न अवसरों पर होता आ रहा है। मोटे तौर पर हम इसके उपयोग को निम्न रूपों में बाँट कर देख सकते हैं :

Chauk: Making Ritual Spaces

 

चौक एक अनुष्ठानिक स्थान है जहां  अलौकिक शक्तियों से संबंधित अनुष्ठान सम्पर्ण किये जाते है। अधिकांश चौक चावल के आटे से बनाएं जाते हैं क्योंकि अन्न प्रकृति से प्राप्त सबसे पवित्र रूप है। धान को  भी लक्ष्मी  माना जाता है, इसलिए चौक बनाने के लिए यह सबसे पवित्र सामग्री मानी जाती है। लक्ष्मी जगार के वक्त, गुरुमांय जहां धनकुल लगाती हैं, वहां पहले चौक बनाती हैं।