विजय सिंह दमाली

गीतकार , लेखक
व्याख्याता , शा. उ. मा. वि. तुरना , लखनपुर , सरगुजा , छत्तीसगढ़

                                                             

करम देवता की पूजा-अर्चना और प्रसाद ग्रहण के बाद रात भर करम देवता के चारों ओर घूम-घूम कर करमा नृत्य किया जाता है। महिलाएँ गोल घेरे में श्रृँखला बनाकर नृत्य करती हैं और उनके मध्य में पुरूष गायक, वादक एवं नर्तक होते हैं। करमा नृत्य राएस करमा (भाद्रपद एकादशी) के अलावा आठे पर्व (श्री कृष्ण जन्माष्टमी), तीजा पर्व (हरितालिका तीज), जींवतिया पर्व (पुत्रजीवित्का), दशईं पर्व (दशहरा) और देवठन पर्व (कार्तिक एकादशी) में भी किया जाता है। वाद्ययंत्रों के रूप में माँदर, झाँझ, मोहरी (शहनाई) आदि का प्रयोग किया जाता है। करमा पर्व में रात भर गीत-नृत्य के माध्यम से करम देवता की सेवा करने के पश्चात् सूर्योदय के पूर्व उनका विसर्जन कर देते हैं।

 

करमा गीतों के प्रकार

 

करमा के गीत रात्रि के पहर के अनुसार भिन्न-भिन्न होते हैं तथा उनके नाम भी अलग होते हैं। जैसे- आधी रात के समय गाए जाने वाले गीत, ‘अधरतिया करमा गीत’ तथा भोर के समय गाए जाने वाले गीत, ‘भिनसरिहा करमा गीत’ कहलाते हैं। इनके राग भी एक दूसरे से भिन्न होते हैं। गीत के अनुसार माँदर के ताल में भी परिवर्तन होता है। कुछ करमा गीत व उनके भावार्थ इस प्रकार हैं-

 

करम देवता की स्तुति

अतेक दिना करम राजा डांड़े टिकुरे हो

आएज करम अखरा में ठाड़।

अतेक दिना करम राजा लिंगोटी सिंगोटी हो

आएज करम घूँठी ले धोती।

अतेक दिना करम राजा पानी के अहार हो

आएज करम दूध के अहार।

 

अनुवाद-

करम राजा तू तो अन्य दिनों में तो जंगल में रहता है

तथा आज तो आँगन में खड़ा है।

करम राजा तू बाक़ी दिनों में तो लंगोटी में रहता है

आज तो धोती बाँध ली है

हे करम राजा तू तो प्रति दिन पानी का आहार करता है

किन्तु आज दूध का आहार कर रहा है।

 

1- करम देवता की स्तुति/ सुमिरन

ओह रे .........

हाय करम राजा रे आएज काहे अँगना में ठाड़

ओतेक दिना करम राजा बने बने रहे रे आएज काहे अँगना में ठाड़

हाय करम राजा रे आएज काहे अँगना में ठाड़

छोटे छोटे लरिका मन जाई जगाथें

हाय करम राजा रे सेही निते अँगना में ठाड़

जाईं जगाई के कहनी सूने आथें

ए करम राजा रे हिले हिले करम ला जोहार

करम ला जोहारी के भइले तियारे

ए करम राजा रे गुड़ घीव होम तो जलायें

होम तो जलाई के भइले तियारे

ए करम राजा रे सबो झन अपन-अपन घरे चलि जायें

घरे तो जाई के करे फरहारे

ए करम राजा रे चारों पहर सेवा करे आयें

 

अनुवाद-

हे करम देवता आज आप क्यों आँगन में खड़े हैं?

आज से पहले आप जंगल में वास करते थे

हे करम देवता आज आप क्यों आँगन में खड़े हैं?

छोटी-छोटी बच्चियाँ मेरे लिए जाईं उगाती हैं

इसीलिए आज मैं आँगन में खड़ा हूँ।

जाईं को लेकर मेरी कथा सुनने आते हैं

मुझे आदरपूर्वक प्रणाम करते हैं

इसीलिए आज मैं आँगन में खड़ा हूँ।

प्रणाम करके मुझे गुड़-घी का होम देते हैं

मेरी पूजा करके सब अपने घर जाते हैं

इसीलिए आज मैं आँगन में खड़ा हूँ।

घर जाकर सब फलाहार करते हैं

फिर रात भर नाच गाकर मेरी सेवा करते हैं

इसीलिए आज मैं आँगन में खड़ा हूँ।

 

2- रामचर्चा

ओह रे ...............................

रामपुरे उठे रामगढ़े रे तीरथा लगिन हें बड़जोरे

कोने चढ़ावे बेल पतर चोवा चंदन

कोने चढ़ावे गंगा जले रे तीरथा लगिन हें बड़जोरे

राजा चढ़ावे बेल पतर चोवा चंदन

रानी चढ़ावे गंगा जले रे तीरथा लगिन हें बड़जोरे

कोने हर माँगे अन धन लक्ष्मी

कोने हर माँगे पुतर फले रे तीरथा लगिन हें बड़जोरे

राजा हर माँगे अन धन लक्ष्मी

रानी हर माँगे पुतर फले रे तीरथा लगिन हें बड़जोरे

 

अनुवाद-

रामपुर के रामगढ़ तीर्थ में बहुत भीड़ लगी है

कौन बेलपत्र, चोवा, चंदन चढ़ा रहा है?

और कौन गंगा जल चढ़ा रहा है?

रामपुर के रामगढ़ तीर्थ में बहुत भीड़ लगी है

राजा बेलपत्र, चोवा, चंदन चढ़ा रहा है

और रानी गंगा जल चढ़ा रही है।

रामपुर के रामगढ़ तीर्थ में बहुत भीड़ लगी है

कौन अन्न-धन, लक्ष्मी माँग रहा है

और कौन पुत्र फल माँग रहा है?

रामपुर के रामगढ़ तीर्थ में बहुत भीड़ लगी है

राजा अन्न-धन, लक्ष्मी माँग रहा है

और रानी पुत्र फल माँग रही है।

रामपुर के रामगढ़ तीर्थ में बहुत भीड़ लगी है।

 

3- किशुनखेल

ओह रे....................................

नन्दी चुलेन के किनारे

अच्छा गाँव बसिस अहे लखनपुर सहरे

नन्दी चुलेन के किनारे

कोन ठने हाथी बाँधे कोन ठने घोड़ा बाँधे

कोन ठने ऊँट बाँधे सरग ल निहारे

नन्दी चुलेन के किनारे

अच्छा गाँव बसिस अहे लखनपुर सहरे

हाथी सारे हाथी बाँधे घोडा सारे घोड़ा बाँधे

ऊॅंट सारे ऊँट बाँधे सरग ल निहारे

नन्दी चुलेन के किनारे

अच्छा गाँव बसिस अहे लखनपुर सहरे

 

अनुवाद-

चुलेन नदी के किनारे

एक बहुत सुंदर नगर लखनपुर बसा है

कहाँ पर हाथी और कहाँ पर घोड़ा बँधा है

कहाँ पर ऊँट बँधा है जो स्वर्ग को निहार रहा है

चुलेन नदी के किनारे

एक बहुत सुंदर नगर लखनपुर बसा है

हाथीसार में हाथी और घुड़सार घोड़ा बँधा है

ऊँटसार में ऊँट बंधा है जो स्वर्ग को निहार रहा है

चुलेन नदी के किनारे

एक बहुत सुंदर नगर लखनपुर बसा है।

 

4- बड़खा साजेन

ओह रे....................

काकर बेटा रे दलेल साय सजनी रे काकर बेटा रघुनाथ

छोटकी कर बेटा रे दलेल साय सजनी रे बड़की कर बेटा रघुनाथ

कोन घोड़ा चढ़े रे दलेल साय सजनी रे कोन घोड़ा चढ़े रघुनाथ

ललका में चढ़े रे दलेल साय सजनी रे धुसरा में चढ़े रघुनाथ

कोन घाटे छेंकथे दलेल साय सजनी रे कोन घाटे छेंके रघुनाथ

खाल घाटे छेंकथे दलेल साय सजनी ऊपर घाटे छेंके रघुनाथ

कए मुड़ा फांके रे दलेल साय सजनी रे कए मुड़ा फांके रघुनाथ

दस मुड़ा फांके रे दलेल साय सजनी रे बीस मुड़ा फांके रघुनाथ

मुड़ा ला काटि काटि खरही गंजाए सजनी रे झरिया रकत बहि जाए

अधरे मेंडरे जी राई गिधनियाँ सजनी रे काकर रकत बहाए

अधरे मेंडरे जी राई गिधनियाँ सजनी रे बैरी कर रकत बहाए

 

अनुवाद-

सजनी किसका बेटा है दलेल साय और किसका बेटा रघुनाथ

सजनी छोटकी का बेटा है दलेल साय और बड़की का बेटा रघुनाथ

सजनी किस घोड़े पर चढ़ा दलेल साय और किस घोड़े पर रघुनाथ

सजनी लाल घोड़े पर चढ़ा दलेल साय और धूसर घोड़े पर रघुनाथ

सजनी किस घाट पर रोका दलेल साय और किस घाट पर रघुनाथ

सजनी नीचे घाट पर रोका दलेल साय और ऊपर घाट पर रघुनाथ

सजनी कितने सिर काटे दलेल साय और कितने सिर काटे रघुनाथ

सजनी दस सिर काटे दलेल साय और बीस सिर काटे रघुनाथ

सजनी सिर काट-काट कर एकत्र किये झरने के समान रक्त बहने लगा

सजनी आकाश में गिद्ध मँडराने लगे किसका रक्त बहने लगा

सजनी आकाह में गिद्ध मँडराने लगे दुश्मनों का रक्त बहने लगा।

 

5- छोटे साजेन

ओह रे.............................................

छोटे छोटे, चलि जाबो छोटे के बरात छोटे छोटे

कए दिना तेल मड़वा कए दिना हरदी

कए दिन में चलले बरात छोटे छोटे

एक दिना तेल मड़वा दुई दिना हरदी

पाँच दिन में चलले बरात छोटे छोटे

कइसन सफरे हथिया रे घोड़वा

कइसन सफरे बरात छोटे छोटे

लाल पीयर सफरे हथिया रे घोड़वा

बोकली बरन तो बरात छोटे छोटे

कहाँ रेंगावे हथिया रे घोड़वा

कहाँ रेंगावले बरात छोटे छोटे

सड़के रेंगावे हथिया रे घोड़वा

सुर्री रेंगावले बरात छोटे छोटे

कहाँ उतारे हथिया रे घोड़वा

कहाँ उतारले बरात छोटे छोटे

बहरी उतारे हथिया रे घोड़वा

मड़वा उतारले बरात छोटे छोटे

कतेक राती बभना लगिन धरावे

कतेक राती होवले बिहाव छोटे छोटे

आधा राती बभना लगिन धरावे

भिनसरहा होवले बिहाव छोटे छोटे

 

अनुवाद-

छोटे भाई की बारात में चले जाएँगे

कितने दिन का मण्डप, कितने दिन का हरिद्रालेपन

कितने दिन में बारात चले जाएँगे

एक दिन का मण्डप, दो दिन का हरिद्रालेपन

पाँच दिन में बारात चले जाएँगे

हाथी घोड़े कैसे सजाएँगे

और बारात को कैसे सजाएँगे

लाल पीले रंगों से हाथी घोड़े सजाएँगे

और बारात को वक के पँक्तियों सा सजाएँगे

हाथी और घोड़ों को कहाँ से ले जाएँगे

और बारात को कहाँ से ले जाएँगे

हाथी और घोड़ों को सड़क से ले जाएँगे

और बारात को पँक्तिवार ले जाएँगे

हाथी और घोड़ों को कहाँ ठहराएँगे

और बारात को कहाँ ठहराएँगे

हाथी और घोड़ों को बरगद के नीचे ठहराएँगे

और बारात को मण्डप में ठहराएँगे

कितनी रात में पण्डित लग्न कराएगा

और कितनी रात में शादी होगी

आधी रात को पण्डित लग्न कराएगा

और भोर के समय शादी होगी

छोटे भाई की बारात ले जाएँगे।

 

6- अधरतिया

ओह रे...................

मैना राँय झाँय करे बर रे पीपरी पाका पाके

कोने पाका सीठ लागे कोने पाका मीठ मैना राँय झाँय करे

कोने पाका मधुरी सवादे मैना राँय झाँय करे

कंचा हर सीठ लागे पाका हर मीठ मैना राँय झाँय करे

गादर पाका मधुरी सवादे मैना राँय झाँय करे

चढ़ि के अधरे रसिया टोरि टोरि खाये मैना राँय झाँय करे

भुईयां में संवरो बिनी खाये मैना राँय झाँय करे

डारा चटकी गेल पाँवा तो बिछले रे मैना राँय झाँय करे                                                                                                                                                                                                                

रसिया गिरले अनचेत मैना राँय झाँय करे

संवरो ला लागि गए सोग मैना राँय झाँय करे

छोएर लुगा अँचरा ओढ़ाए मैना राँय झाँय करे

 

अनुवाद-

मैना चहचहा रही है बरगद और पीपल के फल पके हुए हैं

कौन सा फल नीरस है कौन सा मीठा

कौन सा फल मधुर और स्वादिष्ठ है

कच्चा फल नीरस है और पका हुआ मीठा

अधपका फल मधुर और स्वादिष्ठ है

ऊपर चढ़कर नायक फल तोड़-तोड़ कर खाता है

नायिका ज़मीन पर गिरे फलों को बीन कर खाती है

पेड़ की डाली टूट गई पैर फिसल गये

नायक नीचे गिरकर अचेत हो गया

नायिका उसके शोक में डूब गई

वह उसे अपनी साड़ी का आँचल ओढ़ाती है।

 

7- बड़खा ठड़िहा

ओह रे...............................................

राजा दशरथ रे काके ला देहे वनवास-वनवास

काके ला राएज देहे काके ला परवाना रे

राजा दशरथ रे काके ला देहे वनवास-वनवास

भरत जी ला राएज देहे शत्रुघन परवाना रे

राजा दशरथ रे राम लखन देहे वनवास-वनवास

चउदा बछर ले बन बन भटके

राजा दशरथ रे राम लखन देहे वनवास-वनवास

अरन बन ले सीता के हरन होए

राजा दशरथ रे बने बने घुमले बिचारा-बिचारा

 

अनुवाद-

हे राजा दशरथ आपने किसे वनवास दिया

किसे राज्य दिया और किसे रखवाली का कार्य दिया

भरत जी को राज्य दिया और शत्रुघ्न को रखवाली का कार्य दिया

हे राजा दशरथ आपने राम लक्ष्मन को वनवास दिया

चैदह वर्ष तक वे वन-वन भटके

हे राजा दशरथ आपने राम लक्ष्मन को वनवास दिया

अरण्य वन में सीता का हरण हो गया

वे दोनों भाई वन-वन घूमने के लिए विवश हो गए।

 

8- छोटे ठड़िहा

ओह रे...............................................

छोटे ददा छोटका तोर भईया कहाँ गे-गे

छोटका तोर भईया झुमरी खेले गेल छोटे ददा

माँदरी बंसरी लेइयो गेल छोटे ददा-ददा

कोने पाराक मँदरी कवने पारा बाजे छोटे ददा

कोने पारा करमा खेलाये छोटे ददा-ददा

खाल पाराक मंदरी ऊपरे पारा बाजे छोटे ददा

माँझा पारा करमा खेलाये छोटे ददा-ददा

मँदरी के सबद में नींदो नहीं आये छोटे ददा

सुतल सँवरो चलि आये छोटे ददा-ददा

घरे सुते ससुरा बहिरे सुते भसुरा ये छोटे ददा

कइसे रे करमा खेले जाब छोटे ददा-ददा

ससुरा भसुरा कर नाता टोरि लेबो छोटे ददा

जोरि लेबो देवर कर नात ये छोटे ददा-ददा

घर ले निकले एक झन एक झन ये छोटे ददा

बहिरे बहिरे झन चार ये छोटे ददा-ददा

एक कोस रेंगे दूसर कोस रेंगे ये छोटे ददा

पहुँचल अखरा के डाँड़ ये छोटे ददा-ददा

 

अनुवाद-

तुम्हारा छोटा भाई कहाँ चला गया

छोटा भाई झूमर खेलने चला गया

साथ में माँदर और बाँसुरी भी ले गया

किस मुहल्ले का माँदर किस मुहल्ले में बज रहा है

किस मुहल्ले में करमा हो रहा है

नीचे के मुहल्ले का माँदर ऊपर के मुहल्ले में बज रहा है

और बीच मुहल्ले में करमा हो रहा है

माँदर के स्वर सुन कर नींद नहीं आ रही

सोई हुई नायिका करमा में जाने का विचार करती है

घर में ससुर और बाहर जेठ सोये हुए हैं

आखिर कैसे करमा नाचने जाये

ससुर-जेठ का रिश्ता भुलाकर

उन्हें अपना देवर मान लेती है

और घर से अकेले ही निकल पड़ती है

बाहर उसे चार सहेलियाँ मिल जाती हैं

एक कोस दो कोस चलने के बाद

वह करमा नृत्य स्थल पर पहुँच जाती है।

 

9- भिनसरिहा

ओह रे.............................

कुंजा बने हो सखि कुंजा बने रावण चोर

गोंईठा ला लेसि लेसि भभूत बनावे रे कुंजा बने हो

अंग में तिलक लगाये कुंजा बने हो

छेंकी बईठे घर के दुवार कुंजा बने हो

माई माई करे गोहराए कुंजा बने हो

दे दे रे चेरिया जोगी ला भिच्छा कुंजा बने हो

चले जाही अपन घर सखि कुंजा बने हो

चेरिया के हाथे जी भिच्छा नहीं लेबो कुंजा बने हो

जुगे जुगे डेरा ला टिकाब कुंजा बने हो

सीता हर पहिरे अगिनझारा कपड़ा कुंजा बने हो

सोना के सुपली धरि जाये कुंजा बने हो

सोने के सुपली में हीरा मोती दच्छिना कुंजा बने हो

जोगी ला भिच्छा देहे जाये कुंजा बने हो

 

अनुवाद-

सखि कुंज वन में रावण चोर

कंडे जलाकर भभूत बनाकर

और अंगों में तिलक लगाकर

घर के दरवाज़े पर बैठकर

माई-माई कहते हुए आवाज दे रहा है

जाओ दासी जोगी को भिक्षा दे दो

वह अपने घर चला जाये

दासी के हाथ से भिक्षा नहीं लूँगा

भले ही युगों तक यहीं बैठना पड़े

सीता अग्निशमक वस्त्र धारण कर

सोने के सूप में हीरा मोती की दक्षिणा

जोगी को देने के लिए जाती हैं।।

 

 

 

This content has been created as part of a project commissioned by the Directorate of Culture and Archaeology, Government of Chhattisgarh, to document the cultural and natural heritage of the state of Chhattisgarh.