Folk Dance

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डॉ सतपाल सिंह (Dr Satpal Singh)
डाॅ. सतपाल सिंह: राजस्थान के सामाजिक परिदृश्य में लोक देवी-देवता संस्कृति के प्रादुर्भाव और उसके लोकप्रिय होने के क्या कारण रहे हैं ? डाॅ. भरत ओला: देखिए, राजस्थान के जितने भी लोकदेवी-देवता हुए हैं, वो उस वक्त में हुए हैं जब पूरा सामन्ती काल था और पूरा समाज जाति व्यवस्था में बंटा हुआ था। जो कमेरा…
in Interview
डॉ सतपाल सिंह (Dr Satpal Singh)
  लोकगाथाओं के अध्ययन की दृष्टि से भारतीय लोकसाहित्य बेहद महत्त्वपूर्ण है। यहाँ की भाषाओं-संस्कृत, प्राकृत, पाली, अपभ्रंश तथा मध्यकालीन क्षेत्रीय भाषाओं में विपुल परिमाण में लोक ने गाथाओं का सृजन किया जो विविध रूपों में गाई और कही जाती हैं। वेद, उपनिषद, पुराण, बौद्ध, जैन एवं अन्य दार्शनिक ग्रंथों…
in Overview
डॉ सतपाल सिंह (Dr Satpal Singh)
  लोकसाहित्य आदिकाल से ही लोकमानस के लिए से अभिव्यक्ति का माध्यम रहा है। यह श्रव्य परंपरा का वह माध्यम है जिसमें ग्राम्य जीवन अपने आपको प्रकट कर सका है। भारतवर्ष लोकसाहित्य की दृष्टि से समृद्ध राष्ट्र रहा है और इसमें लिखित साहित्य के अलावा मौखिक साहित्य की भी विशिष्ट परंपरा रही है। इसके विविध…
in Article
डॉ सतपाल सिंह (Dr Satpal Singh)
गोगाजी लोकदेवता के रूप में राजस्थान ही नहीं अपितु समीपवर्ती हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तरप्रदेश, दिल्ली और मध्यप्रदेश तक पूजे जाते हैं। इनसे जुड़ी हुई लोकगाथा भी इन क्षेत्रों में प्रचलित भाषाओं और बोलियों में गाई जाती हैं जिसे गोगा गाथा, गोगाजी रौ झेड़ौ /झड़ौ, गोगाजी रौ झोड़, बागड़ की लड़ाई आदि…
in Article
डॉ सतपाल सिंह (Dr Satpal Singh)
राजस्थान के पाँच पीरों में से एक गोगाजी पश्चिमी राजस्थान के चुरू जिले में स्थित ददरेवा (राजगढ़) नामक ठिकाने के शासक जेवर चैहान के पुत्र थे। इनकी माता का नाम बाछल था। गोगाजी का जन्म प्रसिद्ध नाथयोगी गोरखनाथ के आशीर्वाद से माना जाता है। गोगाजी के समय के बारे में इतिहासकारों में अनेक मतभेद हैं। कर्नल…
in Module
संजीव तिवारी
छत्‍तीसगढ़ी परम्‍पराओं में लोकगीतों का प्रमुख स्थान है। इन लोकगीतों में छत्‍तीसगढ़ी संस्‍कृति की स्‍पष्‍ट झलक मिलती है। यहाँ के लोकगीतों की समृद्ध परम्‍परा में भोजली, गौरा, सुआ व जस गीत जैसे त्‍यौहारों में गाये जाने वाले लोकगीतों के साथ ही करमा, ददरिया, बाँस, पंडवानी जैसे सदाबहार लोकगीत शामिल हैं। इन…
in Article
Sua Geet refers to songs sung and performed by women in Chhattisgarh celebrating the time of harvest. Women sing songs in a circle, at the center of which is usually placed a basket carrying harvested grain and a wooden figure of a parrot. The songs are sung to the beat of the clapping of hands,…
in Video
Sua Geet refers to songs sung and performed by women in Chhattisgarh celebrating the time of harvest.  Women sing songs  using the metaphor of the parrot (Sua)  to symbolise their inner worlds. This was a tradition largely performed by Gond adivasis earlier,  but is now popular across communities…
in Module
Sua Geet refers to songs sung and performed by women in Chhattisgarh celebrating the time of harvest. Women sing songs in a circle, at the center of which is usually placed a basket carrying harvested grain and a wooden figure of a parrot. The songs are sung to the beat of the clapping of hands,…
in Library Artifacts
Sua Geet refers to songs sung and performed by women in Chhattisgarh celebrating the time of harvest. Women sing songs in a circle, at the center of which is usually placed a basket carrying harvested grain and a wooden figure of a parrot. The songs are sung to the beat of the clapping of hands,…
in Library Artifacts