Jharkhand

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वंदना टेटे (Vandna Tete)
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वंदना टेटे (Vandna Tete)
दुनिया में लोहा सबसे जादुई धातु है। मानव समाज में इस धातु का आगमन पत्थर और कांसे के बाद माना जाता है। पत्थर और लोहे की तरह कांसा (Bronze) कोई एक तत्व नहीं है बल्कि यह दो धातुओं तांबा (Copper) और रांगा (Tin) को मिलाकर बनाया जाता है। जैसे कि पीतल (Brass),जस्ता (Zinc) और तांबा को मिलाने से बनता है। इन…
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वंदना टेटे (Vandna Tete)
हम एक ऐसे आदिवासी समूह से परिचित हो रहे हैं जिसने अपने जीवन का हरएक पल एक जीवित किंवदंती के साथ इस प्राचीन कला के लिए जिया है।-  सरत चंद्र राय  मानव सभ्यता के इतिहास में लोहे का स्थान असंदिग्ध है। लोहे की खोज और लौहकला का विकास दुनिया के अलग.अलग क्षेत्रों में 1200 ईसा पूर्व से लेकर 600 ईसा पूर्व के…
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वंदना टेटे (Vandna Tete)
हमारी दुनिया आज विकास के जिस सोपान पर है वहाँ तक पहुंच पाने का श्रेय उस धातु को है जिसे लोहा कहते हैं। इस चमत्कारी धातु के आदिम अविष्कारक और निर्माता.कलाकार के रूप में जिस भारत के जिस मानव समूह को चिन्हित किया जाता हैए वे हैं भारत के असुरए बिरजिया और अगरिया आदिवासी समुदाय। हालांकि अब इनकी नई पीढ़ी…
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अश्विनी कुमार पंकज (Ashwini Kumar Pankaj)
‘बानाम’ दुनिया के सबसे पुराने वाद्ययंत्रों में से एक है जिसका प्रचलन पारंपरिक रूप से संताल[1] आदिवासी समाज आज भी करता है। आदिमकला के स्वरूप वाला यह वाद्ययंत्र आकार-प्रकार में ‘रावणहत्था’, ‘इकतारा’, ‘सारिंदा’ (सारंगी) या ‘वायलिन’ जैसा दिखता है। पर ग़ौर करनेकरने वाली बात है कि आकार-प्रकार में इन …
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अश्विनी कुमार पंकज (Ashwini Kumar Pankaj)
भारत के आदिवासी समुदाय अपनी तमाम सांस्कृतिक विशिष्टताओं के साथ अपनी सांगीतिक परम्पराओं व अनूठे वाद्ययंत्रों के लिए भी जाने जाते हैं। जिस तरह से ‘नगाड़ा’ मुंडाओं की और ‘माँदर’ खड़िया व उराँवों की सांगीतिक विरासत की पहचान है, उसी प्रकार ‘बानाम’ संतालों[1] का एक मुख्य वाद्ययंत्र है। संताल लोग इस…
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अश्विनी कुमार पंकज (Ashwini Kumar Pankaj)
दुनिया में वाद्ययंत्रों का इतिहास बहुत पुराना है, उतना ही पुराना जितना कि मानव और उसकी सभ्यता है। लेकिन यह कहना बहुत मुश्किल है कि मनुष्य ने सबसे पहले कौन सा वाद्ययंत्र बनाया और उसका प्रयोग किसके लिए किया। सृष्टिकर्ता के प्रति आभार ज्ञापन के लिए, अपनी भावनाओं के संप्रेषण के लिए या फिर व्यक्तिगत और…
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अश्विनी कुमार पंकज (Ashwini Kumar Pankaj)
संताल आदिवासियों का ष्बानामष् दुनिया का एक ऐसा वाद्ययंत्र है जिसके हज़ारों रूप हैं और जो अपनी कहानी के अलावा और भी हज़ारों कहानियां सुनाता है।  यानी यह एक ऐसा लोककथात्मक आदिवासी वाद्य है जिसकी कोई दूसरी कॉपी नहीं होती। इसलिए कि प्रत्येक बानाम अपनी बनावट और रूप.रंग में एक.दूसरे से बिल्कुल भिन्न होता…
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Pinki Biswas Sanyal
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सरोज केरकेट्टा (Saroj Kerketta)
झारखंड सांस्कृतिक विविधताओं का प्रदेश है। साल वनों के इस मनोरम प्रदेश में 32 आदिवासी समुदाय रहते हैं। इसके अलावा यहाँ एक अच्छी-खासी सँख्या मूलवासी गैर-आदिवासियों की भी है जिन्हें यहाँ ‘सदान’ कहा जाता है। ये दोनों समूह मिलकर झारखंड की संस्कृति, कला परंपरा और कारीगरी की बहुरँगी दुनिया का निर्माण करते…
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