22 Sep 2018 - 10:00 to 12:00
Itanagar , Arunachal Pradesh
Of the many shared histories and cultures of India’s
22 Sep 2018 - 16:30 to 18:00
Varanasi , Uttar Pradesh
Varanasi has many spiritual connotations, and each of these
23 Sep 2018 - 07:00 to 09:00
Gwalior , Madhya Pradesh
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छत्तीसगढ़, रायपुर के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी

 

उपलब्ध विवरण के आधार पर छत्तीसगढ रायपुर के स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी एवं सूची यहाँ  प्रस्तुत की जा रही है।  

 

नारायण सिंह

वर्ष 1856 में छत्तीसगढ़ में भीषण अकाल पड़ा था। जमींदार नारायण सिंह की प्रजा के समक्ष भूखों मरने की स्थिति थी। उन्होंने अपने गोदाम से अनाज लोगों को बांट दिया, लेकिन वह मदद पर्याप्त नहीं थी। अतः जमींदार नारायण सिंह ने शिवरीनारायण के माखन नामक व्यापारी से अनाज की मांग की। उसने नारायण सिंह का आग्रह ठुकरा दिया। नारायण सिंह कुछ किसानों के साथ माखन के गोदाम पहुंचे और उस पर कब्जा कर लिया। इस बात की सूचना जब अंग्रेजों को मिली तो नारायण सिंह को गिरफ्तार करने का आदेश जारी कर दिया गया। उन्हें 24 अक्टूबर 1856 को गिरफ्तार कर रायपुर जेल में डाल दिया गया। संबलपुर के क्रांतिकारी सुरेंद्र साय के नारायण सिंह से अच्छे संबंध थे। सिपाहियों की मदद से वह जेल से निकल भागने में कामयाब रहे। सोनाखान पहुंच कर नारायण सिंह ने 500 लोगों की सेना बना ली। 20 नवंबर 1857 को रायपुर के असिस्टेंट कमिश्नर लेफ्टिनेंट स्मिथ ने 4 जमादारों व 53 दफादारों के साथ सोनाखान के लिए कूच किया। उसकी सेना ने खरौद में पड़ाव डाला और अतिरिक्त मदद के लिए बिलासपुर को संदेश भेजा। सोनाखान के करीब स्मिथ की फौज पर पहाड़ की ओर से नारायण सिंह ने हमला कर दिया। इसमें स्मिथ को भारी नुकसान पहुंचा। उसे पीछे हटना पड़ा। इस बीच, स्मिथ तक कटंगी  से अतिरिक्त सैन्य मदद पहुंच गई। बढ़ी ताकत के साथ उसने उस पहाड़ी को घेरना शुरू कर दिया, जिस पर नारायण सिंह मोर्चा बांधे डटे थे। दोनों ओर से दिन भर गोलीबारी होती रही। नारायण सिंह की गोलियां खत्म होने लगी। नारायण सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्हें रायपुर जेल में डाल दिया गया। मुकदमे की कार्यवाही चली और 10 दिसंबर 1857 को उन्हें फांसी दे दी गई।  

 

हनुमान सिंह

नारायण सिंह के बलिदान ने रायपुर के सैनिकों में अंग्रेजी शासन के प्रति घृणा और आक्रोश को तीव्र कर दिया। रायपुर ने भी बैरकपुर की तरह की सैन्यक्रान्ति देखी है। इसके जनक तीसरी रेजिमेन्ट के सैनिक हनुमान सिंह थे। उनकी योजना थी कि रायपुर के अंग्रेज अधिकारियों की हत्या कर छत्तीसगढ़ में अंग्रेज शासन को पंगु बना दिया जाए। हनुमान सिंह ने 18 जनवरी 1858 को सार्जेन्ट मेजर सिडवेल की हत्या  की थी। एवं अपने साथियों के साथ तोपखाने पर कब्जा कर लिया। सिडवेल की हत्या तथा छावनी में सैन्य विद्रोह की सूचना अंग्रेज अधिकारियों को मिल गई। लेफ्टिनेंट रॉट और लेफ्टिनेंट सी. एच. लूसी स्मिथ ने अन्य सैनिकों के सहयोग से विद्रोह पर काबू पा लिया। हनुमान सिंह के साथ मात्र 17 सैनिक ही थे, लेकिन वह लगातार छः घंटों तक लड़ते रहे। अधिक देर टिकना असंभव था, इसलिए वह वहां से फरार हो गए। इसके बाद वह कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं लगे। उनके साथी गिरफ्तार कर लिए गए। 22 जनवरी 1858 को इन क्रांतिकारियों को फांसी दे दी गई,जिनके नाम हैं: गाजी खान, अब्दुल हयात, मल्लू, शिवनारायण, पन्नालाल, मतादीन, ठाकुर सिंह, बली दुबे, लल्लासिंह, बुध्दू सिंह,  परमानन्द, शोभाराम,  दुर्गा प्रसाद,  नजर मोहम्मद, देवीदान,  जय गोविन्द।

 

बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव

बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव दृढ़ता और संकल्प के प्रतीक थे। छत्तीसगढ़ के इतिहास की प्रमुख घटना कंडेल नहर सत्याग्रह के वह सूत्रधार थे। छोटेलाल श्रीवास्तव का जन्म 28 फरवरी 1889 को कंडेल के एक संपन्न परिवार में हुआ था। पं. सुंदरलाल शर्मा और पं. नारायणराव मेघावाले के संपर्क में आकर उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलनों में भाग लेना शुरू कर दिया। वर्ष 1915 में उन्होंने श्रीवास्तव पुस्तकालय की स्थापना की। यहां राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत देश की सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाएं मंगवाई जाती थी। आगे चल कर धमतरी का उनका घर स्वतंत्रता संग्राम का एक प्रमुख केंद्र बन गया। वह वर्ष 1918 में धमतरी तहसील राजनीतिक परिषद के प्रमुख आयोजकों में से थे। छोटेलाल श्रीवास्तव को सर्वाधिक ख्याति कंडेल नहर सत्याग्रह से मिली। अंग्रेजी सरकार के अत्याचार के खिलाफ उन्होंने किसानों को संगठित किया। अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ संगठित जनशक्ति का यह पहला अभूतपूर्व प्रदर्शन था। वर्ष 1921 में स्वदेशी प्रचार के लिए उन्होंने खादी उत्पादन केंद्र की स्थापना की। वर्ष 1922 में श्यामलाल सोम के नेतृत्व में सिहावा में जंगल सत्याग्रह हुआ। बाबू साहब ने उस सत्याग्रह में भरपूर सहयोग दिया। जब वर्ष 1930 में रुद्री के नजदीक नवागांव में जंगल सत्याग्रह का निर्णय लिया गया, तब बाबू साहब की उसमें सक्रिय भूमिका रही। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जेल में उन्हें कड़ी यातना दी गई। वर्ष 1933 में गांधीजी ने पुनः छत्तीसगढ़ का दौरा किया। वह धमतरी गए। वहां उन्होंने छोटेलाल बाबू के नेतृत्व की प्रशंसा की। वर्ष 1937 में श्रीवास्तवजी धमतरी नगर पालिका निगम के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भी बाबू साहब की सक्रिय भूमिका थी। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। स्वतंत्रता संग्राम के महान तीर्थ कंडेल में 18 जुलाई 1976 को उनका देहावसान हो गया।  

 

पंडित माधवराव सप्रे

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में पंडित माधवराव सप्रे का नाम स्वर्णाक्षर में दर्ज है। उनका जन्म 19 जून 1871 को दमोह जिले के पथरिया ग्राम में हुआ था। वर्ष 1900 में उन्होंने पं. वामनराव लाखे तथा रामराव चिंचोलकर के सहयोग से रायपुर से छत्तीसगढ़ मित्र नामक मासिक पत्र का प्रकाशन प्रारंभ किया। सप्रेजी की कहानी टोकरी भर मिट्टी छत्तीसगढ़ की प्रथम  कहानी मानी जाती है। यह कहानी छत्तीसगढ़ मित्र में प्रकाशित हुई थी। यह पत्रिका अर्थाभाव के कारण 3 साल बाद बंद हो गई। वर्ष 1900 में ही पं. माधवराव सप्रे की प्रेरणा से रायपुर में कंकालीपारा रोड पर स्थित आनंदसमाज पुस्तकालय की नींव पड़ी। वर्ष 1905 में सप्रेजी ने नागपुर में हिन्दी ग्रंथ प्रकाशक मंडली की स्थापना की। इस ग्रंथमाला के अंतर्गत कुछ महत्वपूर्ण ग्रंथों का प्रकाशन किया गया। सप्रेजी द्वारा लिखित पुस्तक स्वदेशी आंदोलन और बायकाट नामक पुस्तक इसी ग्रंथमाला में प्रकाशित हुई। अंग्रेजी शासन ने इस पुस्तक को जब्त कर लिया। वर्ष 1907 में सप्रेजी ने बालगंगाधर तिलक की प्रेरणा से हिन्दी केसरी का संपादन शुरू किया। हिन्दी केसरी में काला पानी तथा बम गोले का रहस्य जैसे विस्फोटक लेख सप्रेजी ने लिखे। इसके फलस्वरूप 22 अगस्त 1908 को सप्रेजी को गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 1915 में सप्रेजी ने लोकमान्य तिलक के महान और वृहद ग्रंथ गीता रहस्य का हिन्दी में प्रामाणिक अनुवाद प्रस्तुत किया। सप्रेजी की प्रेरणा से जबलपुर में शारदा भवन पुस्तकालय, वर्ष 1918 में रायपुर में प्रांतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन की नींव रखी गई। वर्ष 1920 में सप्रेजी के अथक प्रयासों से जबलपुर में कर्मवीर साप्ताहिक का प्रकाशन आरंभ हुआ। पं. माखनलाल चतुर्वेदी इस पत्र के संपादक थे। निरन्तर यात्रा, कठोर परिश्रम के कारण सप्रेजी का शरीर टूट गया था। अंततः 23 अप्रैल 1926 को रायपुर में सप्रेजी का देहावसान हो गया।  

 

 

पंडित वामनराव लाखे

पंडित वामनराव लाखे ने स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका जन्म 17 सितंबर 1872 को रायपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम बलीराम गोविंद लाखे था। वर्ष 1904 में लाखेजी ने कानून की परीक्षा पास कर रायपुर में वकालत शुरू की। वर्ष 1913 में लाखेजी के प्रयासों से रायपुर में रायपुर को-आपरेटिव सेन्ट्रल बैंक की स्थापना हुई। कृषकों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कर उन्हें आर्थिक सहायता पहुंचाने का रायपुर जिले में यह प्रथम प्रयास था। वर्ष 1915 में लाखेजी ने रायपुर में होम रूल लीग की स्थापना की। वर्ष 1920 में नागपुर में महात्मा गांधी ने असहयोग का प्रस्ताव रखा। नागपुर अधिवेशन में लाखेजी भी गए थे। वहां से लौटने के पश्चात् वे स्वदेशी प्रचार तथा असहयोग आंदोलन में सक्रिय हो गए। गांधी चौक की सभा में उन्होंने अंग्रेजों द्वारा दिए गए रायसाहब की पदवी त्याग करने की घोषणा की। जनता ने उन्हें लोकप्रिय की उपाधि से विभूषित किया। उसी वर्ष पं. माधवराव सप्रे ने रायपुर में राष्ट्रीय विद्यालय की स्थापना की। लाखेजी इस विद्यालय के मंत्री नियुक्त किए गए। वर्ष 1930 में महात्मा गांधी ने पुनः आंदोलन का आह्वान किया। इस आंदोलन का नेतृत्व रायपुर में पं. वामनराव लाखे, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, महंत लक्ष्मीनारायण दास, शिवदास डागा तथा मौलाना रऊफ खां कर रहे थे। रायपुर के स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में ये पांच पांडव के नाम विख्यात हैं। युधिष्ठिर का स्थान लाखेजी को प्राप्त था। स्वाधीनता आंदोलन में इसी से उनकी महत्वपूर्ण भूमिका स्पष्ट हो जाती है। 21 अगस्त 1948 को उनका देहावसान हुआ।

 

पंडित रविशंकर शुक्ल

पंडित रविशंकर शुक्ल न केवल स्वाधीनता आंदोलन के सेनानी थे, बल्कि उन्हें नए मध्यप्रदेश के निर्माता के रूप में भी जाना जाता है। उनका जन्म सागर में 2 अगस्त 1877 को हुआ था। उनके पिता का नाम पं. जगन्नाथ शुक्ल था। शुक्लजी की प्रारंभिक शिक्षा सागर में तथा माध्यमिक शिक्षा रायपुर में हुई। नागपुर में उच्चशिक्षा प्राप्त करने के दौरान वे कांग्रेस की गतिविधियों में रुचि लेने लगे। शुक्लजी बालगंगाधर तिलक से बेहद प्रभावित थे। वर्ष 1907 में शुक्लजी ने राजनांदगांव में वकालत शुरू की। हालांकि, कुछ ही महीनों बाद वे रायपुर आकर वकालत करने लगे। उसी वर्ष रायपुर में राजनीतिक सम्मेलन आयोजित हुआ। जिसके स्वागताध्यक्ष डॉ. हरि सिंह गौर थे। सम्मेलन गरम और नरम दल में विभाजित हो गया। शुक्लजी ने मध्यस्थता की, लेकिन वे सफल नहीं हुए। वर्ष 1916 में रायपुर में भी होम रूल लीग की स्थापना हुई तब शुक्लजी इस आंदोलन से जुड़ गए। वे लीग के प्रमुख संगठनकर्ताओं में से थे। वर्ष 1924 में पहली बार शुक्लजी प्रांतीय विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। यह विधानसभा अधिक दिनों तक नहीं चली। वर्ष 1926 में कांग्रेस से अलग होकर शुक्लजी ने स्वतंत्र कांग्रेस दल के टिकट पर चुनाव लड़ा। हालांकि, इस बार वे सफल नहीं हो सके। गांधीजी से प्रभावित शुक्लजी ने 8 अप्रैल 1930 को रायपुर में नमक बनाकर सत्याग्रह आंरभ किया। उन्हें गिरफ्तार कर सिवनी जेल भेज दिया गया। 4 मार्च 1931 को गांधी-इरविन समझौता के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। हालांकि, गोलमेज कान्फ्रेंस की असफलता के कारण गांधीजी ने लंदन से लौटते ही पुनः सत्याग्रह अभियान छेड़ दिया। शुक्लजी सत्याग्रह का नेतृत्व करते हुए गिरफ्तार हुए। नवम्बर 1933 में महात्मा गांधी अछूतोद्धार अभियान पर निकले। उन्होंने अपना दौरा छत्तीसगढ़ से आरंभ किया। यहां उनकी यात्रा की व्यवस्था का दायित्व शुक्लजी पर था। वर्ष 1935 में शुक्लजी ने नागपुर में महाकोशल हिन्दी साप्ताहिक का प्रकाशन आंरभ किया। बाद में यह दैनिक के रूप में प्रकाशित होने लगा। यह छत्तीसगढ़ का प्रथम दैनिक पत्र है, जो आज भी प्रकाशित हो रहा है। शुक्लजी लगातार आंदोलनों में रत रहे। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कल लिया। उनकी रिहायी वर्ष 1945 में हो सकी। देश की आजादी के बाद जब भाषा के आधार प्रान्तों का पुनर्गठन हुआ, तब शुक्लजी के नेतृत्व में नए मध्यप्रदश का जन्म हुआ। हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिलाने में शुक्लजी की भूमिका महत्वपूर्ण थी।

 

पंडित सुन्दरलाल शर्मा

पंडित सुन्दरलाल शर्मा ने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन में ही अग्रदूत का कार्य किया, बल्कि साहित्य के क्षेत्र में भी उनका ऐतिहासिक योगदान है। उन्होंने लगभग 20 ग्रंथ लिखे, जिनमें 4 नाटक, 2 उपन्यास, शेष काव्य रचनाएं हैं। उनका जन्म 21 दिसंबर 1881 को राजिम के पास चन्द्रसूर नामक ग्राम में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई। उन्होंने अपने घर पर अंग्रेजी, मराठी, बंगला तथा उडिय़ा भाषाओं का अध्ययन किया। महज 16 वर्ष की आयु में वह काव्य-लेखन में पारंगत हो गए थे। वर्ष 1898 से उनकी कविताएं रसिक मित्र में प्रकाशित होने लगी थीं। शर्माजी कुशल चित्रकार व मूर्तिकार भी थे। नाट्य लेखन तथा रंगमंच में भी उन्हें गहरी रुचि थी। शर्माजी वर्ष 1903 में कांग्रेस के सदस्य बन गए। सूरत कांग्रेस से लौटते ही पं. शर्मा ने पं. मेघावाले तथा अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तथा स्वदेशी-वस्तुओं के प्रचार का आन्दोलन शुरू किया। उन्होंने राजिम, धमतरी तथा रायपुर में स्वदेशी वस्तुओं की दुकानें खोली। वर्ष 1906 में उन्होंने सन्मित्र मंडल की स्थापना की। पंडित सुन्दरलाल शर्मा को ने अछूतोद्धार का बड़ा कार्यक्रम चलाया। वर्ष 1918 में उन्होंने सतनामियों को जनेऊ पहनाकर उन्हें समाज में सवर्णों के बराबरी का दर्जा प्रदान किया। उन्होंने राजिम के भगवान राजीवलोचन के मंदिर में कहारों के प्रवेश का अभियान चलाया। कहारों को अछूत मान कर मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता था। पंडित सुन्दरलाल शर्मा ने गो-वध बंद कराने का आंदोलन भी चलाया। धमतरी के कंडेल जल सत्याग्रह में पंडित सुन्दरलाल शर्मा प्रमुख नेता थे। वर्ष 1922 में सत्याग्रह का संचालन करते हुए मई महीने में शर्माजी गिरफ्तार कर लिए गए। वर्ष 1930 में गांधीजी ने पुनः आन्दोलन का आह्वान किया। इसी साल धमतरी में जंगल सत्याग्रह आरंभ करने का निर्णय लिया गया। पंडित सुन्दरलाल शर्मा फिर गिरफ्तार कर लिए गए।

नत्थूजी जगताप

नत्थूजी जगताप छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रिम पंक्ति के नेता थे। उनका जन्म 15 अप्रैल 1881 को धमतरी के अत्यंत सम्पन्न और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके पिता एणुजी जगताप 22 गांवों के स्वामी थे। पं. सुन्दरलाल शर्मा तथा पं. नारायण राव मेघावाले के सम्पर्क में आने पर उनमें राष्ट्रीय गतिविधियों के प्रति रुचि उत्पन्न हुई। वर्ष 1914 में तहसील कृषि सहकारी बैंक धमतरी की उन्होंने स्थापना की थी। 21 दिसम्बर 1920 को गांधीजी जब कंडेल नहर सत्याग्रह के सिलसिले में धमतरी पधारे, तब उनके ठहरने की व्यवस्था नत्थूजी जगताप के निवास स्थान पर ही हुई। नत्थूजी जगताप धमतरी तहसील कांग्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष निर्वाचित हुए। आजादी के आंदोलन में वह लगातार सक्रिय रहे। वर्ष 1930 में धमतरी तहसील के नवागढ़ जंगल में सत्याग्रह करने का निर्णय लिया गया। सत्याग्रहियों को प्रशिक्षित करने के लिए नत्थूजी जगताप के यहां सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की गई। सत्याग्रह आश्रम का खर्च नत्थूजी जगताप ही वहन करते थे। वर्ष 1930 के जंगल सत्याग्रह के दौरान उन्हें जेल भेज दिया गया। वर्ष 1935 में धमतरी में हिन्दू अनाथालय की स्थापना हुई। उसकी स्थापना में जगताप जी की प्रमुख भूमिका थी। वस्तुतः यह अनाथालय कांग्रेस के रचनात्मक कार्यों तथा राष्ट्रीय गतिविधियों का केन्द्र था। 27 मई 1937 को इस महान स्वतंत्रता सेनानी का निधन हो गया।

 

पंडित नारायणराव मेघावाले

छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलनकारियों में पंडित नारायणराव मेघावाले का नाम प्रमुख है। पं. नारायणराव प्रखर व कर्मठ नेता थे। उन्होंने पंडित सुन्दरलाल शर्मा के साथ मिलकर वर्ष 1907 में छत्तीसगढ़ में विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी आंदोलन को गति दी। राजिम, धमतरी और रायपुर में स्वदेशी वस्तुओं की दुकानें खोली गईं। ये दुकानें लगातार घाटे में चलीं, इसके बावजूद वर्ष 2011 तक इनका संचालन चलता रहा। स्वतंत्रता संग्राम के अप्रतिम सेनानी पंडित मेघावाले का जन्म 25 अक्टूबर 1883 को धमतरी में विट्ठलराव व रुक्माबाई के घर हुआ था। वह बालगंगाधर तिलक के विचारों से बेहद प्रभावित थे। वर्ष 1907 में सूरत कांग्रेस अधिवेशन से लौटने के बाद मेघावालेजी स्वदेशी प्रचार में संलग्न हो गए। वर्ष 1915 में बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव ने धमतरी में वाचनालय की स्थापना की। मेघावालेजी उसके अध्यक्ष थे। वर्ष 1920 के कंडेल नहर सत्याग्रह के दौरान पं. नारायणराव मेघावाले ने पं. सुंदरलाल शर्मा तमाम गांवों का दौरा किया और आंदोलन के लिए जमीन तैयार की। अंततः अंग्रेजी सरकार झुक गई। गांधीजी ने नागपुर में ऐतिहासिक असहयोग आंदोलन का शंखनाद किया। इस अधिवेशन से लौटकर मेघावाले जी असहयोग आंदोलन के कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में जुट गए। उन्होंने कांग्रेस के लिए व्यापक सदस्यता अभियान शुरू किया। हजारों की संख्या में सदस्य बनाए गए। वर्ष 1922 के जंगल सत्याग्रह में भी पं. मेघावालेजी का अप्रतिम योगदान रहा। उन्हें मई 1922 में पं. शर्मा के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। जनवरी 1923 में जेल से रिहा होने के बाद वह लगातार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे। वर्ष1930 के सिहावा जंगल सत्याग्रह में भी उनकी प्रमुख भूमिका रही। वर्ष 1933 में जब गांधीजी अछूतोद्धार अभियान चला रहे थे, तब मेघावालेजी ने इसमें सक्रिय भूमिका का निर्वाह किया। 24 अक्टूबर 1934 को रायपुर में अचानक उनका निधन हो गया।

 

 ठाकुर प्यारेलाल सिंह

ठाकुर प्यारेलाल सिंह छत्तीसगढ़ में प्रथम श्रेणी के आंदोलनकारी थे। वे छत्तीसगढ़ में सहकारी आंदोलन के पुरोधा थे। उनका जन्म राजनांदगांव जिले के सेमरा दैहान नामक गांव में 21 दिसम्बर 1891 को हुआ था। उनके पिता का नाम ठाकुर दीनदयाल सिंह तथा माता का नाम नर्मदा देवी था। उन्होंने उच्चशिक्षा नागपुर, जबलपुर और इलाहाबाद में पूरी की। वर्ष 1915 में वकालत पास करने के बाद वह स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए। उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं के बहिष्कार आंदोलन में भाग लिया। उसी वर्ष उन्होंने राजनांदगांव के छात्रों के आंदोलन का भी नेतृत्व किया। वर्ष 1907 में बंग-भंग आंदोलन के दौरान वह क्रांतिकारियों के संपर्क में आए। वर्ष 1908 में जब बालगंगाधर तिलक गिरफ्तार कर मांडले जेल भेज दिए गए तब इस सजा का विरोध करते हुए ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने छात्र आंदोलनकारियों का नेतृत्व किया। वर्ष 1909 में उन्होंने राजनांदगांव में सरस्वती पुस्तकालय की स्थापना की, जो आंदोलनकारियों का प्रमुख केन्द्र बन गया। वर्ष 1916 में उन्होंने राजनांदगांव के मिल मजदूरों को संगठित किया। वे मजदूर संगठन के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। अप्रैल 1920 में ठाकुर साहब के नेतृत्व में राजनांदगांव मिल के मजदूरों ने हड़ताल कर दी। यह हड़ताल 37 दिनों तक चली। यह देश की सबसे पहली लम्बी मजदूर हड़ताल थी। ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने गांधीजी के असहयोग आंदोलन में भी भाग लिया। उन्हें दुर्ग जिले में असहयोग आंदोलन के संचालन का दायित्व सौंपा गया था। वर्ष 1924 में वे रायपुर आकर स्थायी रूप से बस गए। उसी साल वह राजनांदगांव नगरपालिका के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। मगर शासन ने उसे मान्यता नहीं दी, परिणाम स्वरूप सभी निर्वाचित पार्षदों ने त्याग पत्र दे दिया। नमक सत्याग्रह के लिए जब गांधीजी ने दांडी यात्रा शुरू की तब इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ में ठाकुर प्यारेलाल सिंह ने पं. वामनराव लाखे, महंत लक्ष्मीनारायण दास, मौलाना अब्दुल रऊफ तथा शिवदास डागा के साथ मिलकर नेतृत्व प्रदान किया। वह 25 जून 1930 को गिरफ्तार कर लिए गए। जेल से छूट कर आने पर उन्हें तमोरा तथा तानवट-नवापारा जंगल सत्याग्रह की रिपोर्ट तैयार करने के लिए गांव-गांव का दौरा किया। इसके बाद वह क्रमशः गांधीजी द्वारा चलाए गए अछूतोद्धार अभियान का हिस्सा बने तथा मजदूर आंदोलनों का नेतृत्व किया। 20 अक्टूबर 1954 को जबलपुर के निकट पिसनहारी की मढिय़ा में उनका देहावसान हो गया।

 

मौलाना अब्दुल रऊफ खां

मौलाना अब्दुल रऊफ खां त्याग, निर्भीकता, सांप्रदायिक सौहार्द्र और देशभक्ति के प्रतीक थे। उनका जन्म 27 मार्च 1894 को रायपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम गुलमीर खां था। उन्होंने स्वाध्याय से उर्दू तथा फारसी का अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया। वे अच्छे शायर थे। भाषा पर उनका असाधारण अधिकार था। वे ओजस्वी वक्ता थे। दिसंबर 1920 के अंतिम सप्ताह में ही नागपुर में विजय राधवाचार्य की अध्यक्षता में गांधीजी के असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव पारित हुआ। मौलाना रऊफ उस अधिवेशन में रायपुर से गए थे। वहां से लौटने के पश्चात् वे रायपुर में असहयोग आंदोलन के लिए जनमानस तैयार करने में जुट गए। वर्ष 1921 में मौलाना साहब रायपुर जिला खिलाफत कमेटी के मंत्री निर्वाचित हुए। वर्ष 1922 में उन्हें गिरफ्तार कर 2 माह के लिए जेल में डाल दिया गया। वर्ष 1923 में जेल से बाहर आने पर नगर में उनका भव्य स्वागत हुआ। वर्ष 1930 में रायपुर नगर में जो तीव्र राष्ट्रीय आंदोलन छिड़ा, उसका नेतृत्व पांच नेता कर रहे थे-वामनराव लाखे, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, महंत लक्ष्मीनारायण दास, शिवदास डागा तथा मौलाना रऊफ। ये पांचों नेता पांडव के रूप में प्रख्यात थे। मौलाना रऊफ को अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। वर्ष 1930 का आंदोलन समाप्त ही हुआ था कि 4 जनवरी को गांधीजी पुनः गिरफ्तार कर लिए गए। सारे देश में आंदोलन की स्वस्फूर्त लहर दौड़ गई। 15 फरवरी को मौलाना रऊफ को गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में उन्हें 4 बार  गिरफ्तार किया गया था। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान मौलाना रऊफ को ढाई साल की सजा हुई। जेल में उन्हें अनेक तरह से यातनाएं दी गई। रिहा होने के बाद वे बीमार रहने लगे। 27 मार्च 1945 को उनका देहांत हो गया।

 

 यति यतन लाल

यति यतन लाल का जन्म वर्ष 1894 में राजस्थान के बीकानेर शहर में हुआ था। छोटी आयु में ही वे गणित और भाषा के अच्छे विद्वान बन गए। वर्ष 1919 में यतिजी तत्कालीन राष्ट्रीय गतिविधियों से जुड़ गए। मई 1919 में धमतरी तहसील कांग्रेस के राजनीतिक परिषद् का आयोजन किया गया था। यतिजी उसमें सम्मिलित हुए। वर्ष 1921 में यतीजी विधिवत कांग्रेस के सदस्य बने। वर्ष 1922 में वे रायपुर जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए। वर्ष 1924-25 में वे रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वर्ष 1930 के स्वतंत्रता आंदोलन में यतिजी ने प्रमुख भूमिका अदा की थी। वर्ष 1930 में जब गांधीजी दांडी यात्रा पर निकले तब यतिजी अन्य आंदोलनकारियों के साथ रायपुर में इस आंदोलन को एक नई दिशा दे रहे थे। बाद में 25 अगस्त 1930 को यतिजी ग्राम तमोरा में जंगल सत्याग्रह का संचालन करते हुए गिरफ्तार कर लिए गए। उन्हें अगले साल रिहा कर दिया गया। बाद में 1932 के आंदोलन के दौरान उन्हें महासमुन्द में गिरफ्तार कर लिया गया। जेल से छूटने के बाद यतिजी वर्ष 1933 में गांधीजी द्वारा चलाए गए अछूतोद्धार कार्यक्रम से जुड़ गए। वर्ष 1934 में रायपुर जिले में हैजे का प्रकोप हुआ। सैकड़ों लोग काल के गाल में समा गए। यतिजी ने इस संकट की घड़ी में गांव-गांव घूमकर लोगों की सहायता की और उन्हें संबल प्रदान किया। वर्ष 1940 में जिले में अकाल पड़ा। यतिजी ने महासमुंद तहसील के 50 गांवों का दौरा करके जिला कांग्रेस कमेटी को रिपोर्ट दी। 15 दिसंबर 1940 को व्यक्तिगत सत्याग्रह करते हुए यतिजी गिरफ्तार कर लिए गए। 9 अप्रैल 1941 को उन्हें रिहा किया गया। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भी उन्हें गिरफ्तार कर जेल में रखा गया। जेल से छूटने के बाद वर्ष 1946 से वर्ष 1949 तक वे रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। महान स्वतंत्रता सेनानी यतिजी का 19 जुलाई 1976 को बंबई के एक अस्पताल में देहावसान हो गया।

 

 महंत लक्ष्मीनारायण दास

स्वाधीनता संग्राम के सेनानी महंत लक्ष्मीनारायण दास का जन्म 29 मई 1900 को उत्तरप्रदेश के बांदा जिले के राजपुर के निकट ग्राम गड़ीचैरा में हुआ था। परिस्थितिवश उन्हें माताजी के साथ रायपुर आना पड़ा। वे वर्ष 1906 में जैतूसाव मठ के महंत बनाए गए। स्वाधीनता संग्राम के दौरान जैतूसाव मठ आंदोलनकारियों छिपने का प्रमुख स्थान था। यह महंतजी के सौजन्य से ही संभव हो सका। वर्ष 1920 में असहयोग आंदोलन के रंग में देश रंग गया था। इसी वर्ष महंतजी ने कांग्रेस सदस्यता ग्रहण की। गांधीजी जब रायपुर आए तो महंतजी उनसे प्रभावित हुए। नागपुर अधिवेशन के बाद रायपुर में कांग्रेस कमेटी का विधिवत गठन किया गया। युद्ध स्तर पर सदस्यता अभियान चलाया गया। इसमें महंत लक्ष्मीनारायण दास संलग्न हो गए और लगातार स्वतंत्रता आंदोलन को तेज किया। वर्ष 1930 में जब गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन का शंखनाद किया तब इसके प्रचार प्रसार के लिए छत्तीसगढ़ में युद्ध समिति का गठन किया गया। इस समिति में पं. शुक्ल, महंतजी और बीएन बनर्जी सदस्य नियुक्त हुए। रजबंधा मैदान में पं. शुक्ल, भगवती प्रसाद मिश्र और महंतजी ने नमक कानून तोड़ा। इसी क्रम में वह गिरफ्तार कर लिए गए। उन्हें रिहा हुए कुछ ही दिन हुए थे कि वर्ष 1932 में पुनः आंदोलन छिड़ गया। उन्हें एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद वह लगातार अछूतोद्धार व स्वच्छता अभियान सरीखे रचनात्मक कार्यों में लगे रहे। वर्ष 1940-41 के व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान भी महंतजी को जेल जाना पड़ा था। वर्ष 1942 के आंदोलन के दौरान भी वह जेल गए। महंतजी का 14 मार्च 1989 को देहांत हो गया।

 

विप्लवी क्रांतिकुमार

क्रांतिकुमार भारतीय का असली नाम शायद ही किसी को भी मालूम होगा। वह उच्चकोटि के कवि भी थे। रायपुर जिला गजेटियर में उनके पिता का नाम देवकीनंदन लिखा है। माना जाता है कि क्रांतिकुमार का जन्म 4 मार्च 1894 को कलकत्ता में हुआ था। उनका राजनीतिक जीवन वर्ष 1919 में दिल्ली में शुरू हुआ। रोलेक्ट एक्ट के खिलाफ हड़ताल थी। दिल्ली स्टेशन के पास जनता को आतंकित करने के लिए तोप रखी गई थी। उसी तोप पर चढ़ कर क्रांतिकुमार वंदेमातरम् का जयघोष कर रहे थे। 7 अप्रैल 1919 को महात्मा गांधी को दिल्ली आते समय पलवल स्टेशन पर रोक लिया गया। विरोधस्वरूप दिल्ली में हड़ताल रखी गई। धारा 144 लागू कर दी गई थी। ऐसी स्थिति में क्रांतिकुमार चांदनी चौक में लाठी लेकर घूमने निकले। उन्हें गिरफ्तार कर तुरंत 30 बेंतों की सजा दी गई। 15 बेंतों की सजा के बाद वे बेहोश हो गए। अचेतावस्था में उन्हें जेल से बाहर फेंक दिया गया। क्रांतिकुमार भारतीय का संबंध काकोरी केस के क्रांतिकारियों से भी था। बाद में क्रांतिकुमार विलासपुर आ गए। 1932 के आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में बड़ी यातनाएं दी गईं। वर्ष 1933 में उन्हें रामायण प्रवचन के आरोप में गिरफ्तार किया गया। वे रामायण की कथा को स्वतंत्रता आंदोलन से इस प्रकार संलग्न करते थे कि श्रोताओं पर उसका गहरा असर पड़ता था। 1934 में क्रांतिकुमार को मुलताई में पुनः गिरफ्तार किया गया। इस बार उन्हें 4 वर्षों के लिए जेल में डाल दिया गया। 1938 में रिहा होकर वे रायपुर आ गए। 1942 के आंदोलन के दौरान उन्हें एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया। जीवन के अंतिम काल में वे बिलासपुर में अरपा नदी के किनारे कुटिया बना कर एकांतवास करने लगे थे। वर्ष 1974 में इस तेजस्वी ज्योतिपूंज का अस्त हो गया।

 

डॉ. खूबचंद बघेल

डॉ. खूबचन्द बघेल का जन्म 19 जुलाई 1900 को रायपुर जिले के पथरी ग्राम में हुआ था। उनके पिता जुड़वान सिंह बघेल बड़े परिश्रमी कृषक थे। डॉ. खूबचन्द बघेल की माता केतकी बाई स्वयं स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय थीं और वे कई बार जेल भी गई। हाई स्कूल की शिक्षा समाप्त कर वे वर्ष 1920 में नागपुर के राबर्टसन मेडिकल स्कूल में भर्ती हो गए। वर्ष 1925 में उन्होंने वहां से एल.एम.पी. की परीक्षा पास की और शासकीय डॉक्टर के रूप में नौकरी करने लगे। वर्ष 1930 में जब महात्मा गांधी ने आंदोलन का आह्वान किया, तब देशभक्त डॉ. साहब ने सरकारी नौकरी छोड़ दी और आंदोलन में कूद पड़े। वर्ष 1932 में रायपुर में आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जेल से छूटने के बाद वह अछूतोद्धार के कार्यक्रम में लग गए। उन्होंने इस समस्या पर ऊंच-नीच नामक एक नाटक भी लिखा, जो लोकप्रिय साबित हुआ। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में अन्य नेताओं के साथ डॉ. खूबचंद बघेल भी गिरफ्तार कर लिए गए। बाद में आजादी तक डॉ. साहब गिरफ्तारी से बचते रहे और आंदोलन को गति प्रदान करते रहे थे। वर्ष 1947 में देश आजाद हो गया। डॉ. साहब प्रांतीय शासन में पार्लियामेंट सेक्रेटरी नियुक्त हो गए। हालांकि, शीघ्र ही उन्होंने इस पद से त्यागपत्र दे दिया और जनसेवा में लग गए। डॉ. खूबचंद बघेल प्रभावशाली लेखक और विचारक थे। 22 फरवरी 1969 को दिल्ली में उनका देहावसान हो गया।

 

श्यामलाल सोम

श्यामलाल सोम छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रह के जन्मदाता थे। सिहावा के जंगलों में बसे हजारों आदिवासियों के जागरण के वे अग्रदूत थे। महात्मा गांधी के आह्वान पर स्वाधीनता संग्राम में जीवन समर्पित कर उन्होंने आदिवासियों को सुदृढ़ नेतृत्व प्रदान किया था। उनका जन्म वर्ष 1905 में हुआ था। वर्ष 1921 में वह रायपुर के नार्मल स्कूल में श्यामलाल सोम शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। उसी वर्ष महात्मा गांधी ने नागपुर अधिवेशन में असहयोग आंदोलन का शंखनाद किया। गांधीजी ने छात्रों से अंग्रेजी शासन द्वारा चलाये जा रहे विद्यालयों की पढ़ाई छोड़ देने की अपील की। श्यामलाल सोम ने पढ़ाई छोड़ दी। पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने सिहावा क्षेत्र के जंगलों में घूम-घूमकर असहयोग का मंत्र और गांधीजी का संदेश पहुंचाया। जनवरी 1922 में सिहावा के जंगल क्षेत्र में श्यामलाल सोम के नेतृत्व में जंगल सत्याग्रह प्रारंभ किया गया। सोम के नेतृत्व में लगातार सत्याग्रह चलता रहा। सत्याग्रहियों की टोली जंगल के कानून को भंग कर वे अपनी गिरफ्तारी दे रही थी। जनवरी महीने के तीसरे सप्ताह में श्यामलाल सोम सहित 33 सत्याग्रही गिरफ्तार कर लिए गए। नागपुर के झंडा सत्याग्रह में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। श्यामलाल सोम वर्ष 1928 व 1930 के ऐतिहासिक अधिवेशनों के साक्षी रहे। वर्ष 1930 में धमतरी के पास रुद्री (नवागांव) में जंगल सत्याग्रह को भी सोमजी ने नेतृत्व प्रदान किया। उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वह लगातार आजादी के आंदोलनों में सक्रिय रहे। श्यामलाल सोम अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। रामायण के प्रवचन के लिए वे प्रसिद्ध थे। ज्योतिष शास्त्र का उन्हें गहरा अध्ययन था। कांग्रेस अधिवेशनों में सम्मिलित होने के बहाने उन्होंने सारे देश का भ्रमण किया था। घर से वे एक पैसा भी लेकर नहीं निकालते थे। रामायण के प्रवचन तथा ज्योतिष से उन्हें जो पैसा मिल जाता उसी से यात्रा करते थे। सिहावा क्षेत्र के वे सर्वाधिक लोकप्रिय नेता थे। 11 नवम्बर 1973 को इस तपस्वी और यशस्वी वनवासी नेता का निधन हो गया।

 

 सुखराम नागे

सुखराम नागे न केवल स्वाधीनता संग्राम के जुझारू नेता थे, बल्कि आजादी के बाद भी वे आदिवासियों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष करते रहे। सुखराम नागे के पिता का नाम धरमू था। सिहावा क्षेत्र के आदिवासी नेता श्यामलाल सोम के प्रभाव में आकर 23 वर्ष की आयु में नागेजी स्वाधीनता आंदोलन में कूद पड़े। अक्टूबर 1930 में रुद्री (नवांगाव) में पहली बार वे सत्याग्रह करते हुए गिरफ्तार किए गए। वर्ष 1932 के आंदोलन के दौरान भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 1942 में सुखराम नागे भूमिगत रहकर जंगल-जंगल दौरा कर आजादी की अलख जगाते रहे और अंत तक गिरफ्तार नहीं किए जा सके। वर्ष 1947 में आजादी के बाद सुखराम नागे को आशा थी कि अंग्रेजों के शासन में सिहावा के आदिवासी जिन अधिकारों और सुविधाओं से वंचित रखे गए हैं, उन्हें आजाद भारत में वे सब उपलब्ध हो जाएंगे। हालांकि, आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों से पहले की तरह वंचित रहा तो सुखराम नागे का मोह भंग हो गया। उन्होंने वर्ष 1950 में सिहावा में कृषि योग्य जमीन को आदिवासियों को दिलाने के लिए सत्याग्रह आंरभ कर दिया। सत्याग्रह इतना प्रभावशली था कि शासन को झुकना पड़ा। 1881 एकड़ भूमि भूमिहीन आदिवासियों में आवंटित की गई। सुखराम नागे भूमिहीन आदिवासियों के शोषण के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहीद हो गए। वे कोई नेता नहीं थे, अतः कोई प्रचार नहीं मिला। लेकिन वे निष्ठावान गांधीवादी, आदिवासी हितों के संरक्षक और समाजवादी तो थे ही।

 

डॉ. राधाबाई

डॉ. राधाबाई का जन्म वर्ष 1875 में नागपुर के इतवारा मुहल्ले में हुआ था। बाल अवस्था में ही उनका विवाह हुआ और 9 वर्ष की अल्पायु में ही वे विधवा भी हो गई। नन्हीं राधाबाई इस विशाल संसार में निपट अकेली थी मराठी उनकी मातृभाषा थी। उनकी सेवाओं, तपस्वी जीवन, राष्ट्रीय भावनाओं के कारण लोग आदर से उन्हें डॉक्टर राधाबाई कहकर सम्बोधित करते थे। रायपुर नगर में स्वाधीनता संग्राम में कूदने वाली वे प्रथम महिला थीं। उन्होंने नगर की महिलाओं का सुदृढ़ संगठन तैयार किया और उनका कुशल नेतृत्व भी किया। वर्ष 1930 के आंदोलन में राधाबाई को गिरफ्तार कर लिया गया था। डॉ. राधाबाई का महत्व इसी से स्पष्ट हो जाता है कि वर्ष 1932 में रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से जो युद्ध समिति गठित की गई थी, उसके डिक्टेटरों के क्रम में डॉ. राधाबाई का स्थान चौथा था। 13 जून 1932 को डॉ. राधाबाई को उनके जत्थे सहित गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 1942 के आंदोलन में भी डॉ. राधाबाई जुलूस का नेतृत्व करते हुए गिरफ्तार हुई और जेल गईं। डॉ. राधाबाई को गांधी जी के रचनात्मक कार्यों में अटूट श्रद्धा थी। वे नियमित चरखा कातती थीं। हरिजनोद्धार के कार्यक्रमों में उन्होंने सक्रिय भाग लिया। वह जीवन भर राष्ट्रीय आंदोलनों में सक्रिय रहीं। उनका सम्पूर्ण जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का अनुपम नमूना था। 2 जनवरी 1950 को उनके निधन से रायपुर नगर वात्सल्य और ममता से वंचित हो गया।

 

केतकी बाई

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के पुरोधा डॉ. खूबचंद बघेल की माता केतकी बाई ने भी अपनी वृद्धावस्था की परवाह किए बिना स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया और जेल यात्राएं भी की। वह लगातार आंदोलनों में भाग लेतीं रहीं। जब डॉ. राधाबाई ने रायपुर में छुआछूत के खिलाफ जनजागरण अभियान शुरू किया तब केतकी बाई भी इसमें हिस्सा लेने लगीं। समाज के दमित वर्ग को मुख्यधारा से जोडऩा आवश्यक था। केतकी बाई ने इस भावना को गहराई से समझा था। उन्होंने इस दिशा में अपनी पूरी शक्ति लगा दी। वर्ष 1932 के आंदोलन में महिलाओं के जत्थे के साथ केतकी बाई को भी गिरफ्तार किया गया। उनकी अधिक उम्र को देखते हुए उन्हें जेल के दरवाजे से ही वापस भेज दिया। केतकी बाई रोज धरने पर बैठती थीं और उनका लक्ष्य गिरफ्तार होकर जेल जाना था। आखिरकार अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद ही उनका अनशन टूटा। छत्तीसगढ़ का यह बघेल परिवार बहुतों के लिए प्रेरणा बना। डॉ. खूबचंद बघेल की पत्नी फूलकुंवर पर भी पति का पूरा प्रभाव था। देशभक्ति का जज्बा उनमें कूट-कूट कर भरा था। वर्ष 1942 के आंदोलन में तो वे डाक्टर साहब से पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजी जा चुकीं थीं।

 

रोहिणी बाई

रायपुर में चले स्वतंत्रतता संग्राम की सबसे छोटी सेनानी थीं रोहिणी बाई परगनिहा। जब उनकी पहली जेलयात्रा हुई थी तब उनकी उम्र महज 12 साल थी। रोहिणी डॉ. राधाबाई के दल की सक्रिय सदस्या थीं। वर्ष 1932 में कीकाभाई की दुकान में पिकेटिंग होना था। सबसे छोटी रोहिणी के हाथों में तिरंगा देकर उसे ही सत्याग्रही महिलाओं ने सबसे आगे रखा। रोहिणी हाथ में तिरंगा थामे सबसे आगे और बुलंद आवाज में नारा लगाते चल रही थी। वह कीकाभाई की दुकान के भीतर पहुंच गई और विदेशी बहिष्कार का नारा लगाने लगी। पुलिस ने उनको गिरफ्तार कर लिया। साथ ही जेल में यातनाएं भी दी गईं। कांग्रेस अधिवेशनों में रोहिणी बाई सेवादल की सेनानायक के रूप में उपस्थित हुआ करती थीं। वे अनुशासनप्रिय स्वयंसेविका थीं और सभास्थलों पर अनुशासन बनाए रखने की भूमिका निभाया करती थीं। थोड़े ही समय में रोहिणी शहर के तमाम वरिष्ठ सेनानियों की लाड़ली बन गईं। पं. रविशंकर शुक्ल, ठा. प्यारेलाल सिंह और महंतजी के साथ वे पदयात्राओं में साथ रहने लगीं। 1933 में महात्मा गांधी के द्वितीय रायपुर प्रवास के दौरान उनके दौरों में भी वे साथ रहीं। उन्हें वर्ष 1942 के आंदोलन के दौरान भी जेल भेजा गया। भारत के स्वतंत्र होने के बाद वह सार्वजनिक जीवन से खुद को अलग कर घर-गृहस्थी में रम गईं। उन्होंने दीर्घ जीवन प्राप्त किया था।

 

महिला स्वतंत्रता सेनानियों का समूह

रायपुर में ऐसे बहुत से सेनानी थे, जिनकी पत्नियों ने स्वतंत्रता संग्राम में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाया था। मनोहरलाल श्रीवास्तव की मां फूलकुंवर, पत्नी पोची बाई, शंकरराव गनोदवाले की पत्नी पार्वती बाई, भुजबल सिंह की पत्नी बेला बाई, माधवप्रसाद परगनिहा की पत्नी रोहिणी बाई परगनिहा, नंदकुमार दानी की पत्नी अंजनी बाई प्रमुख नाम हैं। रायपुर नगर में स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में जैतू साव मठ, पुरानी बस्ती, तात्यापारा और बूढ़ापारा मुख्य केन्द्र हुआ करते थे। दूधाधारी मठ में भी स्वतंत्रता सेनानी ठहरते थे या छुपा करते थे। जैतू साव मठ के महंत लक्ष्मीनारायण दास सेनानी थे। वर्ष 1942 में यह भूमिगत स्वतंत्रता सेनानियों का केंद्र था। पूजन, व्रत या कथा प्रवचन के बहाने वहां महिलाएं भी एकत्र होने लगी थीं। पं. रविशंकर शुक्ल की पत्नी भवानी देवी, पं. वामनराव लाखे की पत्नी इंदिरा के साथ उमा गायकवाड़, काशीबाई सक्रिय थीं। तात्यापारा में राधाबाई का घर था। वे तो प्रथम पंक्ति की सेनानी थीं। कमासीपारा में रुक्मणि, अंबिका पटेरिया, यशोदा बाई गंगेले, गोमतीबाई मारवाड़ी, सुशीलाबाई गुजराती, अन्नपूर्णा शुक्ला का दल था। कुल मिला कर शहर के मध्य हृदय स्थल में महिलाओं का खासा संगठन था।

 

शहीद मिन्दू कुम्हार

रुद्री जंगल सत्याग्रह के दौरान अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद मिन्दू कुम्हार का नाम इतिहास में अमर है। धमतरी के बेहद नजदीक रुद्री एक धार्मिक स्थल ही नहीं है, बल्कि स्वाधीनता आंदोलन का एक महान बलिदान तीर्थ भी है। वर्ष 1930 में महात्मा गांधी के आह्वान पर देश भर में सत्याग्रह छिड़ गया। जंगल सत्याग्रह में भाग लेने वालों के लिए धमतरी में एक सत्याग्रह प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की गई। जब 1300 सत्याग्रही प्रशिक्षित हो गए तब रुद्री ग्राम के नवागांव वन विभाग में जंगल कानून को तोड़ने के लिए 22 अगस्त को सत्याग्रहियों का पहला जत्था भेजा गया। इसके बाद क्रमशः प्रतिदिन कानून तोड़ने के लिए सत्याग्रहियों के दल का जाना एक नियम सा बन गया। आंदोलन चलता रहा और सत्याग्रही गिरफ्तार होते रहे। इसी क्रम में 9 सितंबर को बारह हजार लोगों का जुलूस नवागांव के पास पहुंचा। जुलूस के सामने लमकेनी गांव के मिन्दू कुम्हार, रतनू गोंड और अन्य सत्याग्रही चल रहे थे। इस जुलूस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर बर्बर कार्रवाई की। साथ ही गोली चलाने के आदेश भी दे दिए गए। गोली लगने से मिंदू कुम्हार गिर पड़े। रतनू गोंड को भी गोली लगी। दोनों घायल सत्याग्रहियों को गिरफ्तार कर रायपुर जेल लाया गया। रतनू के प्राण तो बच गए, लेकिन 11 सितंबर 1930 को मिंदू कुम्हार वीर गति को प्राप्त हो गए।

 

रामाधीन गोंड

बहुतों के लिए रामाधीन का नाम सर्वथा अपरिचित है। वर्ष 1938 में हरिपुरा अधिवेशन में महात्मा गांधी ने रियासती जनता से आजादी की लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया। इसी वर्ष, छुईखदान में जंगल सत्याग्रह प्रारंभ कर दिया गया। राजनांदगांव से 40 किमी दूर छुरिया के एक गांव बदराटोला को जंगल सत्याग्रह के लिए चुना गया। 21 जनवरी 1939 का दिन सत्याग्रह के लिए निर्धारित किया गया। सत्याग्रह दोपहर बाद चार बजे से शुरू होना था। हजारों की संख्या में सत्याग्रही विश्राम कर रहे थे। तभी ब्रिटिश पुलिस का दल वहां आ पहुंचा और सत्याग्रह के नेता बुधराम साहू को गिरफ्तार कर लिया। सत्याग्रहियों ने इसका विरोध किया तो गोली चलाने के आदेश दे दिए गए। एक गोली रामाधीन के सीने पर लगी। वह वहीं गिर पड़े और शहीद हो गए। रामाधीन उस वक्त महज 27 साल के थे। बदराटोला क्षेत्र के लोकगीतों में रामाधीन आज भी जीवित है।

 

परसराम सोनी

परसराम सोनी छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। वह वानर सेना के सक्रिय सदस्य थे और बचपन से ही खुद को स्वतंत्रता संग्राम में झोंक दिया था। सोनीजी सशस्त्र क्रांति के हिमायती थे। साथ ही ठा. प्यारेलाल सिंह, मौलाना रऊफ और भूतनाथ बननर्जी के भाषणों से वे बहुत प्रभावित थे। वर्ष 1939 में वह राजनांदगाव के क्रांतिकारी कवि कुंजबिहारी चौबे के संपर्क में आए। उनका संपर्क गिरिलाल से हुआ। गिरिलाल के संबंध चटगांव के क्रांतिकारियों से था। गिरिलाल और सोनीजी समान विचारधारा के थे। इसी क्रम में परसराम सोनी रिवॉल्वर व बम बनाने में सिद्धहस्त हो गए। धीरे-धीरे परसराम का दल बढऩे लगा। हालांकि, अपने ही एक साथी शिवनंदन के विश्वासघात की वजह से वह 15 जुलाई 1942 को वह गिरफ्तार कर लिए गए। शिवनंदन उन्हें अपनी साइकिल पर लेकर एक ऐसे रास्ते से गया, जहां पहले से ही पुलिस के अधिकारी मौजूद थे। तलाशी में परसराम के पास से रिवॉल्वर बरामद हो गया। गिरफ्तारी के बाद परसराम के घर की तलाशी हुई। कुछ पत्रों में उनके साथियों के नाम-पते मिले। उनकी धर-पकड़ शुरू हो गई। इसी क्रम में कुंजबिहारी, दशरथ लाल चौबे, सुधीर मुखर्जी, देवीकांत झा, होरीलाल, सुरेंद्रनाथ दास, क्रांतिकुमार भारतीय, कृष्णाराव थिटे, सीताराम मिस्त्री, समर सिंह और भूपेंद्रनाथ मुखर्जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया और सजा सुनाई गई। नागपुर हाईकोर्ट में मुकदमा चला और सजा के खिलाफ अपील दायर की गई। गिरफ्तार आंदोलनकारियों को बरी कर दिया गया। हालांकि, परसराम ने अपील करने से इन्कार कर दिया था। बाद में 26 जून 1946 को उन्हें रिहा किया गया। अगर यह सशस्त्र क्रांति सफल हुई होती तो रायपुर का इतिहास कुछ अलग होता।

 

 बिलखनारायण अग्रवाल

परसराम सोनी की गिरफ्तारी से भले ही रायपुर में सशस्त्र क्रांति न हो सकी, लेकिन क्रांति के बीज अनुकूल अवसर की प्रतीक्षा में थे। बनियापारा निवासी बिलखनारायण अग्रवाल ने वर्ष 1942 के आंदोलन के दौरान नरसिंहपुर के खादी भंडार की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। बिलखनारायण अग्रवाल को जबलपुर एक डायनामाइट हाथ लग गया। वे रायपुर पहुंचे और नागरदास, नारायणदास, ईश्वरीचरण शुक्ल तथा जयनारायण पांडेय के साथ मिलकर जेल की दीवार उड़ाने की योजना बनाई, ताकि बंदी साथियों को छुड़ाया जा सके। एक रात डायनामाइट को जेल की दीवार पर लगा कर विस्फोट किया गया, लेकिन अपेक्षा के मुताबिक क्षति नहीं पहुंचे। क्रांतिकारी अपने उद्देश्य में भले ही विफल रहे, लेकिन उनके इस कारनामे से ब्रिटिश प्रशासन भौचक्का रह गया। करीब साल भर बाद पुलिस ने इस मामले में जयनारायण पांडेय को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, उनके खिलाफ कोई प्रमाण नहीं होने की वजह से उन्हें रिहा कर दिया गया। इससे पहले ईश्वरीचरण शुक्ल और नारायणदास राठौर को लेटर बॉक्स जलाने व टेलीफोन के तार काटने के आरोप में जेल भेजा जा चुका था।

 

घनश्याम सिंह गुप्त

घनश्याम सिंह गुप्त अद्भुत प्रतिभा, मौलिक चिंतन तथा चतुरवाणी के स्वामी थे। उनका जन्म 22 दिसंबर 1885 को दुर्ग नगर के एक संपन्न परिवार में हुआ था। गुप्तजी की प्रारंभिक शिक्षा दुर्ग में तथा माध्यमिक शिक्षा रायपुर में हुई। जबलपुर से उन्होंने बीएससी की परीक्षा पास की। गुप्त जी ने वकालत की परीक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पास की। उन्होंने दुर्ग में वकालत शुरू की। वर्ष 1915 में जब एनीबेसेंट ने होमरूल लीग की स्थापना की तब दुर्ग में उसकी शाखा स्थापित करने में गुप्त जी की प्रमुख भूमिका थी। वर्ष 1920 में असहयोग आंदोलन के दौरान उन्होंने वकालत का त्याग कर दिया। वर्ष 1930 में प्रांतीय कांग्रेस कमेटी की युद्ध समिति ने बैतूल में जंगल सत्याग्रह आरंभ करने का निर्णय लिया। इस सत्याग्रह के प्रथम सेनानी के रूप में गुप्तजी का नाम प्रस्तावित किया गया। दुर्भाग्यवश अपरिहार्य कारणों से गुप्तजी समय पर पहुंच नहीं सके। 7 अगस्त 1930 को वह जबलपुर के टाउन हाल में ब्रिटिश हुकूमत के विरोध में भाषण दे रहे थे, तभी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 25 मई 1932 को महाकोशल, नागपुर तथा विदर्भ प्रदेशों की संयुक्त राजनीतिक परिषद नागपुर में आयोजित की गई। उस परिषद की अध्यक्षता के लिए गुप्तजी निर्वाचित हुए, किंतु निर्धारित तिथि के पूर्व ही वे गिरफ्तार कर लिए गए। वर्ष 1933 में जब गांधीजी हरिजनोद्धार के प्रचार-अभियान के दौरे पर निकले, तब गुप्तजी भी उनके साथ सक्रिय रहे। वर्ष 1938 में गुप्तजी सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। इस पद पर वह लगातार कई वर्षों तक निर्वाचित होते रहे। वर्ष 1939 तथा वर्ष 1944 में जब हैदराबाद और सिंध में आर्य समाजियों पर अमानुषिक अत्याचार किए गए, तब गुप्त ने उन प्रदेशों में आर्य समाज आंदोलन का कुशल नेतृत्व किया। यह गुप्तजी का ही प्रयास था कि वर्ष 1948 में सत्यार्थ प्रकाश पर से प्रतिबंध हटा लिया गया। गुप्तजी का 14 जून 1976 को देहावसान हो गया।

 

 पंडित भगवती प्रसाद मिश्र

छत्तीसगढ़ में वर्ष 1921 के असहयोग आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में पं. भगवती प्रसाद मिश्र का नाम प्रमुख है। पंडित मिश्र का जन्म वर्ष 1887 के मार्च महीने में दुर्ग जिले के बेमेतरा तहसील के अंधियारखोर नामक ग्राम में हुआ था। पंडित मिश्र पांच गांवों के मालगुजार थे, किंतु असहयोग आंदोलन में कूदने के बाद वह खादी की धोती भर पहनते थे। वर्ष 1921 में नवागढ़ के दौरे पर आए अंग्रेज कलेक्टर डोनाल्ड को विरोध-स्वरूप काला झंडा दिखाया, जिससे जिले में सनसनी गई। उन पर 50 रुपए का अर्थदंड लगाया गया। वर्ष 1922 में गिरफ्तार कर उन्हें रायपुर जेल में रखा गया। 7 फरवरी 1923 को पं. भगवती प्रसाद जी मिश्र जेल से मुक्त हुए। वर्ष 1930 में खरियार के जमींदार के अत्याचार की सूचना भगवती प्रसाद जी को मिली। वे खरियार गए और वहां असहयोग आंदोलन का प्रचार करने लगे। कुछ दिनों के बाद वह गिरफ्तार कर लिए गए। यह आंदोलन तानवट-नवापारा जंगल सत्याग्रह के नाम से प्रसिद्ध है। इस आंदोलन में पुलिस और जमींदार के कर्मचारियों ने आंदोलनकारियों पर मनमाना अत्याचार किया था। पं. मिश्र ने महज 15 दिनों के भीतर सत्याग्रह के लिए सैकड़ों लोगों का एक मजबूत संगठन खड़ा कर लिया। 17 जनवरी 1932 को महासमुंद तहसील में आंदोलन का प्रचार करते हुए उन्हें पुनः गिरफ्तार कर लिया गया। भगवती प्रसाद जी ने जेल में राजबंदियों पर किए जाने वाले अत्याचारों और दमन के खिलाफ भी आवाज उठाई। उन्होंने जेल में भी अनशन किया।

 

शंकरराव गनोदवाले

शंकरराव गनोदवाले महान स्वतंत्रता सेनानी बालगंगाधर तिलक व माधवरराव सप्रे से बेहद प्रभावित थे। उनका जन्म वर्ष 1887 में रायपुर जिले के गनोदवाले नामक गांव में हुआ था। शंकरराव ने वर्ष 1920 के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। इसके बाद से वह आजादी के आंदोलन से लगातार जुड़े रहे। वर्ष 1930 में आंदोलन के प्रचार के लिए जिला कांग्रेस कमेटी ने एक समिति बनाई, जिसमें शंकरराव गनोदवाले को भी स्थान दिया गया। तमोरा जंगल सत्याग्रह के दौरान शंकरराव ने कुशल नेतृत्व का परिचय दिया। तमोरा के नजदीक के गांवों में लगातार 15 दिनों तक दौरा चला और सभाओं का आयोजन हुआ। इसी साल 1 सितंबर को रायपुर बार काउंसिल ने यह तय किया कि महासमुंद तहसील में जंगल सत्याग्रह शुरू किया जाए। इसके संचालन का भार शंकरराव जी गनोदवाले को सौंपा गया। सितंबर के पूर्व शंकरराव जी रूद्री जंगल सत्याग्रह में सक्रिय थे, लेकिन वहां के मोर्चे से हटाकर उन्हें तमोरा का मोर्चा सम्हालने के लिए नियुक्त किया गया। तमोरा जंगल सत्याग्रह के कुशल नेतृत्व के कारण शंकरराव जी का नाम जिले के शीर्षस्थ नेताओं में गिना जाने लगा। वर्ष 1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन छिड़ गया। 29 मार्च 1932 को रायपुर में सत्याग्रह के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 1940 में ठाकुर साहब रायपुर नगर पालिका के अध्यक्ष निर्वाचित हुए तब उन्होंने शंकरराव जी को उपाध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया था। जब वे उपाध्यक्ष थे तब उन्हें कैंसर जैसे घातक रोग ने घेर लिया। दिसंबर 1942 को इस महान देशभक्त, साहस और धैर्य की प्रतिमा का देहावसान हो गया।

 

बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल

ठाकुर छेदीलाल स्वाधीनता संग्राम के एक निर्भीक और जुझारू नेता थे। वह सिद्घहस्त लेखक, पत्रकार और संगीतज्ञ भी थे। उन्होंने वर्ष 1922 में जबलपुर से निकलने वाली साप्ताहिक राष्ट्रीय पत्रिका कर्मवीर का संपादन किया। उनका जन्म वर्ष 1887 में बिलासपुर जिले के अकलतरा के एक संपन्न परिवार में हुआ था। ठाकुर छेदीलाल की प्रारंभिक शिक्षा अकलतरा तथा माध्यमिक शिक्षा बिलासपुर में हुई। उच्च शिक्षा के लिए वह इंग्लैंड चले गए। लौटकर बिलासपुर में वकालत आरंभ कर दी। वर्ष 1915 में ठाकुर छेदीलाल ने सार्वजनिक क्षेत्र में पदार्पण किया और राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़ गए। इसी वर्ष वे महामना मदनमोहन मालवीय के संपर्क में आए। वे मालवीय जी की सेवा पत्रिका के संपादक भी थे। वर्ष 1921 में ठाकुर छेदीलाल ने महात्मा गांधी के आह्वान पर वकालत छोड़ दी और जिले में असहयोग आंदोलन का प्रचार किया। इसी वर्ष ठाकुर छेदीलाल कांग्रेस के सदस्य बने। जिन छात्रों ने सरकारी स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी थी उनकी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना की गई थी। सभी विद्यालयों के नियंत्रण तथा उनमें एकरूपता लाने के लिए प्रदेश स्तर पर एक राष्ट्रीय शिक्षा मंडल का गठन किया गया। ठाकुर छेदीलाल इसके सदस्य बने। 25 फरवरी 1932 को ठाकुर छेदीलाल जी को विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया। 25 मई 1932 को महाकोशल, विदर्भ तथा नागपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटियों की एक संयुक्त परिषद नागपुर में आयोजित की गई। यहां ठाकुर छेदीलाल अपना अध्यक्षीय भाषण पढ़ ही रहे थे कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। वर्ष 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया। इसी तरह वर्ष 1942 के आंदोलन में भी उन्हें लंबी अवधि के लिए जेल में रखा गया। 18 सितंबर 1956 को स्वाधीनता संग्राम के इस महान सेनानी का निधन हो गया।

 

अनंतराम बर्छिहा

अनंतराम बर्छिहा का जन्म 28 अगस्त 1890 को रायपुर जिले के चंदखुरी ग्राम में हुआ था। गांव में ही चौथी तक शिक्षा प्राप्त करके अनंतराम जी खेती सम्हालने में लग गए। खेती में परिश्रम करने पर भी जब आय नहीं बढ़ी, तो उन्होंने छोटी सी दुकान खोल ली। उनका व्यवसाय चल निकला और बाद में वह सेठ अनंतराम कहलाने लगे। धीरे-धीरे उनकी रुचि सामाजिक क्रियाकलापों की तरफ बढ़ी। वर्ष 1923 में वह नागपुर झंडा-सत्याग्रह में भाग लेने गए। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 1930 में महात्मा गांधी के आह्वान पर अनंतराम जी पुनः आंदोलन में कूद पड़े। 15 अक्टूबर 1930 को चंदखुरी में सत्याग्रह के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उनकी दुकान लूट ली। हालांकि, अनंतराम पर इसका असर नहीं हुआ। जेल से छूट कर आए कुछ ही महीने हुए थे कि उन्होंने वर्ष 1932 के आंदोलन में भाग लिया और एक बार फिर से गिरफ्तार कर लिए गए। वर्ष 1933 में उन्होंने हरिजनोद्धार और स्वच्छ भारत अभियान में तत्परता से भाग लिया। इसी तरह वर्ष 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान भी आंदोलन करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया। वर्ष 1942 के ऐतिहासिक आंदोलन के दौरान उन्हें 18 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया गया और लंबे समय के लिए जेल भेज दिया गया। उन्होंने जेल का ड्रेस पहनने से इंकार कर दिया और खादी की मांग की। वे अपनी सिद्धांतों पर अडिग रहे। जीवन के आखिरी दिनों में वह आर्थिक रूप से कमजोर हो गए थे। 22 अगस्त 1956 को इस संघर्षशील सेनानी का निधन हो गया।

 

विश्वनाथ यादव तामस्कर

छत्तीसगढ़ स्वाधीनता संग्राम के योद्धाओं की प्रथम पंक्ति में विश्वनाथ यादव तामस्कर का नाम अमिट है। उनका जन्म बेमेतरा तहसील के नवागढ़ में 2 जुलाई 1901 को हुआ था। उनके पिता का नाम यादव वामनराव तामस्कर था। उनकी प्राथमिक शिक्षा नवागढ़ में हुई। उच्च शिक्षा के लिए वह इलाहाबाद चले गए। गांधीजी के असहयोग आंदोलन के आह्वान पर छात्र विश्वनाथ तामस्कर ने पढ़ाई छोड़ दी। आंदोलन जब शिथिल पड़ा तब पिता के अनुरोध पर उन्होंने नागपुर के मारिस कॉलेज में प्रवेश लिया और वकालत की पढ़ाई की। इसके बाद वह दुर्ग में वकालत की प्रैक्टिस करने लगे। वर्ष 1930 के आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन्हें 1 साल की कैद और 2 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। जुर्माने की राशि वसूलने के लिए अंग्रेजी सरकार ने उनकी पूरी संपत्ति कुर्क कर नीलाम कर दी। तामस्करजी पर इस जुल्म का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वर्ष 1932 के आंदोलन में वे और अधिक सक्रिय हो गए। वर्ष 1933 में वे दुर्ग जिला परिषद के अध्यक्ष निर्वाचित हुए। इसी दौरान जब महात्मा गांधी ने सारे देश में हरिजनोद्धार अभियान को तामस्करजी जुट गए। उन्होंने गांव-गांव घूम कर छुआछूत ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाने का प्रचार किया। वर्ष 1936 में वे बेमेतरा क्षेत्र से विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। वर्ष 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान उन्हें गंडई में गिरफ्तार कर लिया गया। जब वह जेल से छूट कर आए तब वर्ष 1942 का आंदोलन शुरू हो गया था। 9 अगस्त को तामस्करजी तथा उनके छोटे भाई गंगाधर गिरफ्तार कर जेल में डाल दिए गए। वर्ष 1945 के जून माह में ही उन्हें जेल से मुक्ति मिली। 2 सितंबर 1969 को इस लोकप्रिय तथा संघर्षशील नेता का निधन हो गया।

 

पंडित रामानंद दुबे

पंडित रामानंद दुबे प्रखर स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका जन्म दुर्ग जिले में 5 जुलाई 1912 को खुरसुला नामक गांव में हुआ था। दुबेजी बचपन से ही अपने चाचा जगन्नाथ दुबे के साथ कांग्रेस की सभाओं में जाया करते थे। इसी क्रम में उन पर तपस्वी सुंदरलाल के ओजस्वी भाषण का स्थायी प्रभाव पड़ा। उनके घर पास स्थित आनंद समाज पुस्तकालय में पं. माधवराव सप्रे,  पं. रामदयाल तिवारी,  ठाकुर प्यारेलाल सिंह आदि वरिष्ठ साहित्यकार तथा नेता नियमित रूप से आते थे। इससे उनके राष्ट्रीय विचारों का पोषण होना शुरू हो गया। अप्रैल 1930 में रायपुर में प्रांतीय युवक परिषद के आयोजन के दौरान उन्होंने एक कविता का पाठ किया, जिसकी बड़ी प्रशंसा हुई। रामानंद दुबे ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी सक्रियता से भाग लिया। इसी वर्ष दुबे जी को संगठक के रूप में शंकरराव गनोदवाले के नेतृत्व में महासमुंद भेजा गया, लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 1932 में आंदोलन के दौरान जिले के प्रायः सभी नेता गिरफ्तार कर लिए गए थे। इसके बाद सत्याग्रह का संचालन डेढ़ माह तक रामानंद दुबे ने चलाया। उन्हें भी मई महीने के अंत में गिरफ्तार कर लिया गया। पंडित दुबे ने जेल से मुक्त होने के बाद वर्ष 1936 से वर्ष 1939 तक काशी विश्वविद्यालय में अध्ययन में बिताया। व्यक्तिगत सत्याग्रह के दौरान दुबेजी को गिरफ्तार कर लिया गया। वर्ष 1942 में भी उनकी गिरफ्तारी हुई। वह अब तक पांच बार जेल जा चुके थे। 25 अगस्त 1943 को वह रायपुर लौटे। उन्हें जेल से रिहा होने के बाद पुलिस में हाजिरी देने का आदेश था। उन्होंने इस आदेश का उल्लंघन कर दिया। उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। मार्च 1944 में उन्हें जेल से मुक्ति मिली। इसके बाद वह वर्धा के सेवाग्राम चले गए और गांधीजी के निकट रहे। आजादी के बाद वह छत्तीसगढ़ में ही रहे। 3 दिसंबर 1994 को उनका निधन हो गया।  

 

बलीराम आजाद

वर्ष 1932 के आंदोलन के दौरान रायपुर में वानर सेना का उदय हुआ था। इसका नेतृत्व बलीराम आजाद कर रहे थे। 20 से 25 की समूह में बच्चे प्रतिदिन जुलूस निकालते, और सभाओं का आयोजन करते थे। बलीराम आजाद का जन्म वर्ष 1918 में तारासिव नामक ग्राम में हुआ था। उसके पिता का नाम बंधुराम दुबे था। वर्ष 1932 के आंदोलन के समय उसकी आयु मात्र 14 वर्ष थी। बलीराम बच्चों की सभाओं का नेतृत्व करते थे। आंदोलन छिड़ते ही शहर में 144 धारा प्रभावशील हो गई थी। 7 फरवरी को पुलिस ने बलीराम को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें बच्चा समझकर उसी दिन शाम को छोड़ दिया गया। हालांकि, 16 फरवरी को वह एक बार फिर गिरफ्तार कर लिए गए। 13 मार्च 1932 को बलीराम ने वानर सेना के एक बड़े जुलूस का नेतृत्व किया। जुलूस सभा में बदल गया। पुलिस ने इस सभा में शामिल आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज किया। बलीराम के आंदोलन से आजिज ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें अंततः 26 मई 1932 को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। बलीराम आजाद स्वाधीनता की उस उत्कृष्ट भावना का प्रतीक हैं, जो आजादी की लड़ाई में बच्चे-बच्चे के मन में घर कर गई थी।

 

 

रायपुर जिले के स्वतंत्रता सेनानी जिन्हें छः माह से अधिक सज़ा हुई

श्री अन्नाजी पिसोड़े (जन्म 13 जून, 1922, रायपुर); पिता श्री भावजी कुक्को: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री आनंदराम (जन्म 20 सितम्बर, 1918); पिता श्री रामजी: स्वतंत्रता संग्राम में एक वर्ष 15 दिन का कारावास।

 

श्री अद्वैत गिर (जन्म ग्राम डोगरीपाली); पिता श्री बड़कूगीर: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री अर्जनलाल (जन्म सन् 1927, रायपुर); पिता श्री रामलाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 19 दिन का कारावास।

 

श्री अर्जुन सिंह उर्फ भरत (जन्म सन् 1896, पथरी, रायपुर); पिता श्री डोमार सिंह: सन् 1930 में जंगल सत्याग्रह, सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह से अधिक का कारावास।

 

श्री हरिमदन गिर (जन्म ग्राम खम्हारमुड़ा); पिता श्री मेंदगीर: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री अयोध्या प्रसाद (जन्म सन् 1899, ग्राम महासमुन्द); पिता श्री नन्दलाल प्रसाद: स्वतंत्रता आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री आनन्द दास (जन्म सन् 1912, बुन्देली, रायपुर); पिता श्री नैन दास: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री आनन्दराम (जन्म 20 जनवरी, 1918, रायपुर); पिता श्री रामजी ढेगड़ी: 1943 से स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय व छः माह का कारावास।

 

श्री आरती (जन्म ग्राम मामाभांचा); पिता श्री बिसाहू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री इतवारीराम (जन्म सन् 1926, भाटापारा, रायपुर); पिता श्री धरम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री इन्दल (जन्म ग्राम औड़ीयारा); पिता श्री दुखवा: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्रीमती इन्द्रोतीन बाई (जन्म ग्राम तमोरा); पत्नी श्री ललूराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री ईश्वरीचरण शुक्ल (जन्म सन् 1919, रायपुर); पिता पं. रविशंकर शुक्ल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में दो वर्ष का कारावास।

 

श्री उमराव (जन्म सन् 1915, गिरौद, रायपुर); पिता श्री गुडन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री उमेद सिंह चौहान (जन्म 1 अप्रैल, 1923, चन्दखुरी, रायपुर); पिता श्री मनराखन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री उमेन्द्र किशोर भट्टाचार्य (जन्म 22 फरवरी, 1914, रायपुर);  पिता श्री दुर्गाचरण: स्वतंत्रता संग्राम में सात वर्ष का कारावास।

 

श्री कन्हैयालाल अवस्थी (जन्म रायपुर); पिता श्री गोपेश्वर: सन् 1942 के आंदोलन में एक वर्ष छः माह का कारावास।

 

श्री कन्हैयालाल (जन्म सन् 1910, ग्राम पिथौरा); पिता श्री परदेशी: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री कन्हैयालाल (जन्म रायपुर); पिता श्री रामप्रताप: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री कन्हैयालाल अवस्थी (जन्म रायपुर); पिता श्री बुटेश्वर: सन् 1942 के आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री कन्हैयालाल ताम्रकार (जन्म सन् 1890, राजिम, रायपुर); पिता श्री हीरालाल: सन् 1923 के झंडा सत्याग्रह में छः माह से अधिक का कारावास।

 

श्री कन्हैयालाल लूनिया (जन्म सन् 1908, रायपुर); पिता श्री रामलाल: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल नौ माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री कमलदास (जन्म ग्राम समरा); पिता श्री बैगन: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री कमलनारायण कुर्मी (जन्म सन् 1913, मढ़ी, रायपुर); पिता श्री जोधन: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल छः माह का कारावास।

 

श्री कमलनारायण शर्मा (जन्म 9 अक्टूबर, 1922, रायपुर); पिता श्री बेनीराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष 19 दिन का कारावास।

 

श्री कमल सिंह (जन्म सन् 1912, ग्राम गोरेगांव, धमतरी); पिता श्री चैनू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री करणसिंह (जन्म सन् 1911, बलोदाबाजार, रायपुर); पिता श्री भगवानसिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री कल्लू (जन्म  सन् 1901, सारागांव, रायपुर) पिता श्री रामसिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 23 दिन का कारावास।

 

श्री कल्याण सिंह (जन्म 8 मई, 1900, ग्राम ठेमसुरा, धमतरी); पिता श्री फिरतू: सन् 1923 के झंडा सत्याग्रह में एक वर्ष छः माह का कारावास।

 

श्री रखूहप्रसाद (जन्म सन् 1911, ग्राम करही (भानसोज)): पिता श्री कन्हाई: सन् 1942 के आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री कलीराम (जन्म खट्टी, रायपुर); पिता श्री अमरसिंह: स्वतंत्रता आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री कृष्णकुमार दानी (जन्म सन् 1912, रायपुर); पिता श्री लक्ष्मणप्रसाद: सन् 1942 के आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री कृपाराम (जन्म ग्राम रावन); पिता श्री भैरा: सन् 1942 के आंदोलन में आठ माह का कारावास।

 

श्री कृष्णाराम ओंकार (जन्म सन् 1916, रायपुर); पिता श्री पुन्दाजी: सन् 1930-31 के जंगल तथा नमक सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री कृष्णाराव थिटे (जन्म 1 फरवरी, 1923, महासमुन्द); पिता श्री सदाशिव: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री काकेश्वर चन्द बघेल (जन्म 4 दिसम्बर, 1922, रायपुर); पिता श्री बालूराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 10 दिन का कारावास।

 

श्री काशीराम शर्मा (जन्म सन् 1916, केसदा, तिल्दा, रायपुर ); पिता श्री रामलाल शर्मा: सन् 1932 व 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा 1942 के आंदोलन में 11 माह छः दिन का कारावास।

 

श्री कान्ति सिंह (जन्म 20 दिसम्बर, 1912, कसडोल, रायपुर ); पिता श्री चैनसिंह: सन् 1931- 32 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री कीरतराम कुर्मी (जन्म ग्राम बेमचा, महासमुंद); पिता श्री राम भरोसा: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नौ माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री कुंजलाल मिश्रा (जन्म 4 जून, 1922, बरोड़ा, रायपुर); पिता श्री रामभरोसा: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री कुंज बिहारीलाल श्रीवास्तव (जन्म सन् 1898, रायपुर); पिता श्री गनपतलाल: सन् 1942 के आंदोलन में तीन वर्ष नौ माह का कारावास।

 

श्री केजूराम भोई (जन्म सन् 1918, रायपुर); पिता श्री रामचरण: सन् 1942 के आंदोलन में छः माह 12 दिन का कारावास।

 

श्री केजूराम वर्मा; पिता श्री धनाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री केजूराम वर्मा (जन्म 7 जुलाई, 1914, ग्राम सारागांव, रायपुर); पिता श्री रिसाल: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में नौ माह 24 दिन का कारावास।

 

श्री केवलसिंह (जन्म रायपुर); पिता श्री शिवप्रसाद: सन् 1930-31 के नमक सत्याग्रह, जंगल सत्याग्रह, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह एवं ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल एक वर्ष, एक माह नौ दिन का कारावास।

 

श्री केयूर भूषण मिश्र (जन्म सन् 1927, रायपुर); पिता श्री मथुराप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री केशवराम चन्द्राकर (जन्म महासमुन्द); पिता श्री कपिलनाथ: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष छः माह का कारावास।

 

श्री कोदूराम यदु उर्फ मोहनलाल (जन्म 5 मार्च, 1925, रायपुर); पिता श्री भगोली: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 12 दिन का कारावास।

 

श्री कौशलेन्द्र दास वैष्णव (जन्म ग्राम माचाभाट ); पिता श्री हरीदास: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री खुमानसिंह (जन्म 21 सितम्बर, 1907, ग्राम बंगोली, रायपुर); पिता श्री थानूराम: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में एक वर्ष चार माह का कारावास।

 

श्री खुमान सिंह वर्मा (जन्म ग्राम गुमा); पिता श्री मंशाराम: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में तथा ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल 10 माह का कारावास।

 

श्री खेदप्रसाद उर्फ त्रिवेणीशंकर (जन्म 1 अक्टूबर, 1920, ग्राम कुरूसकेरा, रायपुर); पिता श्री दुर्गाप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री खेदूप्रसाद पोतकर (जन्म फरवरी, 1908, महासमुन्द, रायपुर); पिता श्री शिवचरण: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में 10 माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री गनपतराव शिवलीकर (जन्म 1 अप्रैल, 1920, महासमुन्द, रायपुर); पिता श्री त्रिम्बकराव: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गणेश उर्फ धनसिंह (जन्म ग्राम हरकर); पिता श्री गोकुल: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री गजाधर प्रसाद पाण्डे (जनम ग्राम बम्हनी); पिता श्री हीराप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष छः माह का कारावास।

 

श्री गयाप्रसाद (जन्म सन् 1925, भाटापारा); पिता श्री मुरलीधर: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री गरीबनाथ बैरागी (जन्म 3 अप्रैल, 1923, धमतरी); पिता श्री भंगीनाथ: सन् 1942 के आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री गिरधारी (जन्म ग्राम मोगरागहन, धमतरी); पिता श्री रामसिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गिरधारी लाल चैपड़ा (जन्म रायपुर); पिता श्री जमनालाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गिरवर लाल (जन्म सन् 1914, ग्राम कुर्रा, रायपुर); पिता श्री बाबूलाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री गिरधारी लाल तिवारी (जन्म सन् 1909, ग्राम पड़ारीडीह); पिता श्री गयाराम: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गिरधारीलाल तिवारी (जन्म सन् 1909, धमतरी); पिता श्री बाल किशन: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन, सन् 1942 के आंदोलन में कुल 10 माह 12 दिन का कारावास।

 

श्री गिरिजाशंकर मिश्रा (जन्म रायपुर); पिता श्री वंशगोपाल: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा सन् 1942 के आंदोलन में छः माह 11 दिन का कारावास।

 

श्री गुरुचरण सिंह (जन्म ग्राम कुर्रा, रायपुर); पिता श्री सेनासिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 13 दिन का कारावास।

 

श्री गुल हमीद (जन्म सन् 1913, ग्राम बेलसोंडा, रायपुर); पिता श्री अब्दुल्ला: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री गुलाब भगवनानी (जन्म सन् 1920, रायपुर); पिता श्री झमर: राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान छः माह का कारावास।

 

श्री गुलाबराय (जन्म ग्राम मरहरा); पिता श्री उदाजी: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री गुलाब सिंह (जन्म 1 जुलाई, 1923, ग्राम रावन, बलौदाबाजार); पिता श्री दीनदयाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गुहा (जन्म ग्राम मुड़ागांव, देवभोग); पिता श्री हजारी: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गोकुलदास पनका (जन्म भाटापारा); पिता श्री बहोरनदास: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री गोकुलप्रसाद वर्मा (जन्म सन् 1898, रायपुर); पिता श्री अनंदा: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री गोंडाराम गोंड (जन्म 25 फरवरी, 1912, ग्राम जैतपुरी, धमतरी); पिता श्री डोरा: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गोपालप्रसाद यदु (जन्म सन् 1916, रायपुर); पिता श्री भुवनेश्वर प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नौ माह 18 दिन का कारावास।

 

श्री गोपाल राव (जन्म रायपुर); पिता श्री मारूति राव: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गोपीनाथ चतुर्वेदी (जन्म सन् 1916, रायपुर); पिता श्री मुकुन्दनाथ: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह व ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल एक वर्ष चार माह का कारावास।

 

श्री गोवर्धन (जन्म ग्राम वेमचा, रायपुर); पिता श्री कन्हाई: स्वतंत्रता आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गोविन्दराम (जन्म ग्राम ढावा, धमतरी); पिता श्री जनार्दन: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री गोरेलाल (जन्म सन् 1906, ग्राम थोडड़ोंगरी); पिता श्री रामसिंह: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री गौरीशंकर (जन्म ग्राम साल्हेभाठा); पिता श्री बालक: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री गंगाधर (जन्म ग्राम भाटापारा); पिता श्री लोकनाथ: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में 11 माह का कारावास।

 

श्री गंगाधरराव पंडोले (जन्म अक्टूबर, 1906, धमतरी); पिता श्री श्रीधरराव: सन् 1930 के जंगल तथा नमक सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री गंगाराम तिवारी (जन्म ग्राम सैहा, रायपुर); पिता श्री दुर्गाप्रसाद: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गंगाराम मरार (जन्म ग्राम नरदहा, रायपुर); पिता श्री बुधराम: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री गंगू (जन्म ग्राम ठेलकी); पिता श्री विश्राम: सन् 1931-32 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में आठ माह का कारावास।

 

श्री घसियाराम गौड़ (जन्म 3 जून, 1901, ग्राम जैतपुरी, धमतरी); पिता श्री भादू: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में भागीदारी तथा छः माह का कारावास।

 

श्री चर्तुदास (जन्म बलौदा बाजार); पिता श्री बिसरू: स्वतंत्रता आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री चमरू गोंड (जन्म सन् 1908, ग्राम सरहाटोला, रायपुर); पिता श्री हरि: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री चमनराम (जन्म ग्राम अरंड); पिता श्री मधुसुदन: स्वतंत्रता संग्राम में छः माह का कारावास।

 

श्री चरण प्रकाश बघेल (जन्म सन् 1920, ग्राम पथरी, रायपुर); पिता श्री नकुल प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष चार माह का कारावास।

 

श्री चापसी भाई शाह (जन्म सन् 1909, धमतरी); पिता श्री हंसराज: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री चित्रकूट प्रसाद (जन्म सन् 1914, ग्राम पिपरछेड़ी, रायपुर); पिता श्री जयराम प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री चेतराम गोंड (जन्म रायपुर); पिता श्री भगवानप्रसाद: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

डॉ. चेतानाथ तिवारी (जन्म 6 फरवरी, 1904, रायपुर); पिता श्री मदन मोहन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 11 दिन का कारावास।

 

श्री चैतू (जन्म ग्राम भाटापारा); पिता श्री सुखचैन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री चौथमल (जन्म ग्राम खट्टी); पिता श्री चन्द्रभान: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री चोवाराम (जन्म 1 मार्च, 1923, ग्राम बरतोरी, रायपुर); पिता श्री टेकसिंह: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री चन्द्रभान सिंह (जन्म 4 अप्रैल, 1914, ग्राम बोईरझिरी, रायपुर); पिता श्री दशरथ सिंह: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री चन्द्रपाल (जन्म सन् 1910, ग्राम अरंड); पिता श्री मधुसूदन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री चन्दूलाल पांडया (जन्म रायपुर); पिता श्री जाधवजी: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 23 दिन का कारावास।

 

श्री चम्पालाल (जन्म सन् 1917, रायपुर); पिता श्री जीतमल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह आठ दिन का कारावास।

 

श्री छोटेलाल (जन्म सन् 1915, ग्राम खट्टी); पिता श्री चन्द्रभान: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री छबिराम (जन्म 1 जून, 1918, ग्राम रवान); पिता श्री दीनदयाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री छबिलाल (जन्म ग्राम मोगरीपाली, रायपुर); पिता श्री भागीरथी: राष्ट्रीय आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री जगदेव दास (जन्म सन् 1915, रायपुर); पिता श्री नारायण दास: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास। 

 

श्री जगन्नाथ नायडू (जन्म 7 नवम्बर, 1919, रायपुर); पिता श्री रामगुलाम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री जगन्नाथ प्रसाद बघेल (जन्म 25 सितम्बर, 1909, रायपुर); पिता श्री पद्ममनाथ: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल पाँच माह 19 दिन नागपुर तथा रायपुर में कारावास।

 

श्री जगन्नाथ प्रसाद शर्मा (जन्म सन् 1924, रायपुर); पिता श्री मंशाराम: स्वतंत्रता आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री जगमोहन तिवारी (जन्म 4 मई, 1926, ग्राम छंटेरा, रायपुर); पिता श्री रामकिशन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री जमुनादास चोपड़ा (जन्म रायपुर); पिता श्री तेजमल: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष 12 दिन का कारावास।

 

श्री जयदेव सहपथी (जन्म 29 मार्च, 1971, ग्राम तोषगांव, रायपुर); पिता श्री गजाधर: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री जयलाल साहू (जन्म ग्राम डोंगरीपाली); पिता श्री कन्हैया: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री जयसिंह (जन्म सन् 1911, ग्राम छतौद, रायपुर); पिता श्री रेवाराम: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल सात माह का कारावास।

 

श्री जसकरण डागा (जन्म 28 नवम्बर, 1897, रायपुर); पिता श्री गंभीरमल: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष चार माह का कारावास।

 

श्री जलाराम (जन्म सन् 1879, ग्राम भुमका); पिता श्री पहारसिंह: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री जटाशंकर शर्मा (जन्म ग्राम महासमुन्द); पिता श्री बलभद्र: स्वतंत्रता आन्दोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री जहूर सिंह (जन्म सन् 1900, ग्राम अरंड, रायपुर); पिता श्री पराउसिंह: स्वतंत्रता आन्दोलन में छः माह से अधिक का कारावास।

 

श्री जिवराखन (जन्म सन् 1914, ग्राम बंगोली, रायपुर); पिता श्री हरीराम उर्फ हीराराम: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह व ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री जीतराम (जन्म, ग्राम मेंढ़, रायपुर); पिता श्री सुखरु: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में एक वर्ष पाँच माह का कारावास।

 

श्री जीवन गिरी (जन्म सन् 1904, ग्राम लभराकलां); पिता श्री पुरण गिरी: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री जीवनलाल बोथरा (जन्म 30 अक्टूबर, 1908, ग्राम नयापारा, राजिम); पिता श्री अलसीदास: सन् 1940 से सन् 1942 तक राष्ट्रीय आन्दोलनों में कुल छः माह का कारावास।

 

श्री जुगल किशोर (जन्म 17 जून, 1924, ग्राम कचना, धमतरी); पिता श्री सुन्दरलाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री जुमड़ीमल (जन्म सन् 1912, रायपुर); पिता श्री दालूमल: स्वतंत्रता आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री जेठूराम (जन्म 14 जून, 1919, ग्राम चरमुडिय़ा, धमतरी, रायपुर); पिता श्री घनाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री जोहन (जन्म सन् 1922, ग्राम लहरौद, रायपुर); पिता श्री सुनहर: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में छः माह का कारावास। 

 

श्री जोड़ावनदास बैरागी (जन्म सन् 1904, ग्राम सहनीखार, धमतरी); पिता श्री मुकुन्ददास: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल एक वर्ष छः माह का कारावास।

 

श्री जोधाराम (जन्म 5 दिसम्बर, 1902, ग्राम उमरगांव, धमतरी); पिता श्री नाथराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री झाडूराम गोंड (जन्म 1 मार्च, 1918, ग्राम बगौद, धमतरी); पिता श्री गुलाब: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री झालूराम चन्द्रवंशी (जन्म सन् 1920, ग्राम जरवे, रायपुर); पिता श्री डोमार सिंह: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में नौ माह का नागपुर में कारावास।

 

श्री टेपूमल (जन्म धमतरी); पिता श्री धन्नूमल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में 10 माह का कारावास।

 

श्री ठाकुर खुशाल सिंह (जन्म सन् 1915, रायपुर); पिता श्री सोभाराम सिंह: स्वतंत्रता आन्दोलन में दो वर्ष का कारावास।

 

श्री ठाकुर रामकृष्ण सिंह (जन्म 2 अप्रैल, 1920, रायपुर); पिता श्री ठाकुर प्यारेलाल सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष छः माह का कारावास।

 

श्री ठाकुर सच्चिदानंद सिंह (जन्म 20 अक्टूबर, 1922, रायपुर); पिता श्री ठाकुर प्यारेलाल सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में 11 माह छः दिन का कारावास।

 

श्री डेरहाप्रसाद पांडे (जन्म ग्राम बागबाहरा, रायपुर); पिता श्री ब्रम्हाप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में आठ माह का कारावास।

 

श्री ताराचन्द साहू (जन्म सन् 1903, ग्राम खिसोसा, धमतरी); पिता श्री रामदयाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री तुलसीराम (जन्म सन् 1907 ग्राम सांकरा, रायपुर); पिता श्री सुकालू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री तुलसीराम पिल्ले (जन्म ग्राम महासमुन्द); पिता श्री शिवचरण: स्वतंत्रता आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री तेजनाथ योगी (जन्म 1 जनवरी, 1909 ग्राम महासमुन्द); पिता श्री द्वारकानाथ: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री तेजनाथ (जन्म 18 जनवरी, 1901, ग्राम बरडीह, रायपुर); पिता श्री रामभरोसा: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री तेजसिंह निर्भय सिंह (जन्म सन् 1919, ग्राम डूमरतराई, रायपुर); पिता श्री हरिकृष्ण सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री तोकसिंह कुर्मी (जन्म सन् 1898, ग्राम कुर्रा, रायपुर); पिता श्री चन्दूलाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री तोताराम पाटिल (जन्म 13 मार्च, 1919 ग्राम महासमुन्द, रायपुर); पिता श्री मीठाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री थनवार उर्फ बीरबल (जन्म ग्राम सांकरा, धमतरी); पिता दुर्जन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री थानू (जन्म सन् 1922, ग्राम खिसौरा, धमतरी); पिता श्री बाबा: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री थानूराम (जन्म सन् 1885, ग्राम बंगोली); पिता श्री सुखदेव: सन् 1932-33 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल एक वर्ष, एक माह का कारावास।

 

श्री द्वारकाप्रसाद (जन्म ग्राम मोहकम); पिता श्री सखाराम: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह व ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री द्वारिका प्रसाद (जन्म ग्राम परसाड़ी, रायपुर); पिता श्री सुखरामप्रसाद: स्वतंत्रता आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री द्वारिका प्रसाद शर्मा (जन्म 1 जुलाई, 1925, ग्राम टोना तार, भाटापारा); पिता लक्ष्मीनाथ शर्मा: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री द्वारकाप्रसाद; पिता श्री सुखराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री दशरथ (जन्म सन् 1925, रायपुर); पिता श्री छतरसिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 19 दिन का कारावास।

 

श्री दशरथ लाल चौबे (जन्म सन् 1920, रायपुर); पिता श्री छबिराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में भागीदारी तथा सात माह का कारावास।

 

श्री दयालु दास (जन्म 20 मई, 1924 ग्राम बंगोली, रायपुर); पिता श्री सन्दरदास: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह व ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में भागीदारी तथा छः माह का कारावास।

 

श्रीमती दयाबाई (जन्म सन् 1904, ग्राम बंगोली, रायपुर); पति श्री शिवलाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री दाऊजी (जन्म सन् 1897, ग्राम सेमरा); पिता श्री फोटूकू: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री दिलीप सिंह (जन्म सन् 1911, रायपुर); पिता श्री विश्वनाथ सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री दिलीप सिंह (जन्म रिसदा, रायपुर); पिता श्री बिसरू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में भागीदारी तथा एक वर्ष का कारावास।

 

श्री दुकालूराम उर्फ बिल्लीभगत (जन्म ग्राम फरफौद, रायपुर) स्वतंत्रता आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री दुर्गाप्रसाद सिरमौर (जन्म 1 सितम्बर, 1916, ग्राम पथरी, रायपुर); पिता श्री थानूदास: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह व ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल नौ माह का कारावास।

 

श्री देवचरणलाल वर्मा (जन्म 20 नवम्बर, 1920, रायपुर); पिता श्री पूरनलाल: सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री देवराम भाई (जन्म रायपुर); पिता श्री हीरजी: स्वतंत्रता आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री देवीदयाल तिवारी (जन्म सन् 1900, ग्राम पठारीडीह, रायपुर); पिता श्री मणिराम: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री देशबन्धु कश्यप (जन्म 3 मई, 1900, धमतरी); पिता श्री ठाकुरसिंह: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष तीन माह का कारावास।

 

श्री बनऊ (जन्म ग्राम देवसुन्दरा, रायपुर); पिता श्री गोकुल: स्वतंत्रता आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री धौराजी (निवासी दतान); पिता श्री लोकनाथ: सन् 1931-32 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री धुकेल (जन्म सन् 1906, ग्राम कोकड़ी, धमतरी); पिता श्री पंचम: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री धुरवा (जन्म सन् 1900, ग्राम बिरगुड़ी); पिता श्री बाकरी: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री नत्थूलाल सोनी (जन्म  सन् 1906, रायपुर); पिता श्री पूरनसाव: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष चार माह का कारावास।

 

श्री नरेन्द्रकुमार उर्फ रूक्मणिलाल दुबे (जन्म सन् 1920, रायपुर); पिता श्री जयलाल प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 28 दिन का कारावास।

 

श्री नन्दकिशोर पाण्डे (जन्म 1 मई, 1944, रायपुर); पिता श्री रामलाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 28 दिन का कारावास।

 

श्री नन्दकुमार दानी (जन्म 4 दिसम्बर, 1904 रायपुर); पिता श्री लक्ष्मणप्रसाद: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल एक वर्ष एक माह का कारावास।

 

श्री नन्हेलाल उपाध्याय (जन्म सन् 1905, ग्राम आरंग, रायपुर); पिता श्री ब्रजलाल: सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री नारायण (जन्म ग्राम राजिम, रायपुर); पिता श्री लक्ष्मण: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में भागीदारी तथा छः माह का कारावास।

 

श्री नारायण दास (जन्म सन् 1917, ग्राम नेवरा, रायपुर); पिता श्री बद्रीनारायण: स्वतंत्रता आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री नारायणदास राठौर (जन्म सन् 1917, रायपुर); पिता श्री गंगाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन, सन् 1944 के नेता रिहाई आन्दोलन के कारण दो वर्ष का कारावास।

 

श्री नारायण प्रसाद अग्रवाल (जन्म सन् 1914, रायपुर); पिता श्री लक्ष्मी प्रसाद: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री नारायण राव (जन्म रायपुर); पिता श्री ईश्वरराव: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष 21 दिन का कारावास।

 

श्री नारायणराव अंबिलकर (जन्म 5 जून, 1914, रायपुर); पिता श्री पंछी राम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री नारायण लाल चन्द्राकर (जन्म 23 अप्रैल, 1924 ग्राम महासमुन्द, रायपुर); पिता श्री परसुराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में भागीदारी तथा आठ माह का कारावास।

 

श्री निजाम दास (जन्म सन् 1910, ग्राम सारागांव, रायपुर); पिता श्री छगनदास: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री निर्भय (जन्म सन् 1916, ग्राम बंगोली, रायपुर); पिता श्री नन्दलाल: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री निरंजनसिंह (जन्म सन् 1926, ग्राम मढ़ी, रायपुर); पिता श्री धनाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री निरंजनसिंह हलदा (जन्म 1 जनवरी, 1906, ग्राम नगरी, धमतरी); पिता श्री शोभाराम: सन् 1923 के झण्डा सत्याग्रह, सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री नीलकंठ (जन्म सन् 1904, ग्राम रायखेड़ा, रायपुर); पिता श्री दुलरवा: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री नीराम (जन्म ग्राम बिरगुड़ी, धमतरी, रायपुर); पिता श्री बिसाह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री नैनदास सतनामी (जन्म ग्राम सलोनी); पिता श्री राजाम: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री प्यारेलाल (जन्म सन् 1924, ग्राम बंगोली, रायपुर); पिता श्री नन्दलाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री प्यारेलाल (जन्म ग्राम डमरू); पिता श्री रामकिशन: स्वतंत्रता आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री प्यारेलाल त्रिपाठी (जन्म 3 मार्च, 1882, ग्राम पलारी); पिता श्री भुवनेश्वर प्रसाद: असहयोग आंदोलन, सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन व

‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष 15 दिन का कारावास।

 

श्री पकला (जन्म सन् 1896, ग्राम भड़ावड़, धमतरी); पिता श्री भीखा: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री पकलू उर्फ मोहन (जन्म ग्राम उमरदा); पिता श्री फागू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री पतिराम कंवर (जन्म ग्राम डमरू); पिता श्री मनसुख: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री पन्नालाल उर्फ धन्नालाल (जन्म सन् 1924, रायपुर): ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 13 दिन का कारावास।

 

श्री पुन्नूलाल रावत (जन्म सन् 1920, रायपुर); पिता श्री चमरू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह नौ दिन का कारावास।

 

श्री पुन्डलिक जोशी (जन्म 7 मई, 1918, बलोदाबाजार); पिता श्री सदाशिव: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री परदेशी गोंड़ (जन्म सन् 1901, भाटापारा, रायपुर); पिता श्री कुलंजन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन तथ सन् 1944 के नेता रिहाई सत्याग्रह में कुल एक वर्ष छः माह का कारावास।

 

श्री परदेशी (जन्म ग्राम अमेठी); पिता श्री सन्तोष: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री परमानंद (जन्म ग्राम हर्रा, रायपुर); पिता श्री कपिलनाथ: स्वतंत्रता आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री परसादी (जन्म ग्राम हरकेशर, धमतरी, रायपुर); पिता श्री मोहर: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री पवन कुमार (जन्म रायपुर); पिता श्री प्यारेलाल: स्वतंत्रता आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री प्रभूराम साव (जन्म 1 जून, 1904, रायपुर); पिता श्री उमेदीराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 21 दिन का कारावास।

 

श्री प्रभूलाल (जन्म ग्राम अभनपुर); पिता श्री हीरालाल: स्वतंत्रता आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री प्राणदास सतनामी (जन्म ग्राम कोदकेरा); पिता श्री भगेल: 1930 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में कुल नौ माह का कारावास।

 

श्री प्राणनाथ तिवारी (जन्म 6 जुलाई, 1920 रायपुर); पिता श्री मन्नूलाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह आठ दिन का कारावास।

 

श्री प्रेमनारायण (जन्म 4 फरवरी, 1920, रायपुर); पिता श्री ब्रजरतन लाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 19 दिन का कारावास।

 

श्री पीलाराम (जन्म ग्राम पनामेढ़, रायपुर); पिता श्री मानसिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री पुलऊ राम (जन्म सन् 1900, ग्राम बंगोली, रायपुर); पिता श्री नन्दराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष एक माह 15 दिवस का कारावास।

 

श्री पुराणिक साहू (जन्म 7 मार्च, 1899, ग्राम नवागांव, धमतरी, रायपुर); पिता श्री बहोरन: सन् 1936 के जंगल सत्याग्रह में तीन माह का कारावास।

 

श्री पुरुषोत्तम दास जोशी (जन्म सन् 1903, रायपुर); पिता श्री रामकृष्ण: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री पुसऊ (जन्म सन् 1909, ग्राम सारागांव, रायपुर); पिता श्री परसराम: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास एवं 100 रु. अर्थदंड।

 

श्री पूरणलाल कुर्मी (जन्म रायपुर); पिता श्री नेमा: सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह से अधिक का कारावास।

 

श्री पूरम चन्द (जन्म सन् 1900 रायपुर); पिता श्री रेलाराम: सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री पंडित (जन्म सन् 1905 ग्राम सांकरा); पिता श्री धनऊ: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री पंचम (जन्म सन् 1916, ग्राम भाटापारा); पिता श्री बिसरू ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री पंचम सिंह गोंड़ (जन्म 9 दिसम्बर, 1899, ग्राम उमरगांव); पिता श्री बैसाखू: सन् 1924 के झण्डा सत्याग्रह, सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह तथा सन् 1932 33 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में भागीदारी

 

श्री पंचमसिंह हलवा (जन्म सन् 1896, ग्राम नगरी); पिता श्री अमोली: सन् 1923 के झण्डा सत्याग्रह तथा सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में भागीदारी तथा कारावास में रहे।

 

श्री पुरुषोत्तम प्रसाद सोनी (जन्म सन् 1933, धमतरी); पिता श्री मथुराप्रसाद: सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री बी. एन. बैनर्जी (जन्म सन् 1894, रायपुर); पिता श्री जे.एल.बैनर्जी: सन् 1930-31 के नमक/जंगल सत्याग्रह में भागीदारी तथा एक वर्ष का कारावास।

 

श्री पांढूरंग उमाठे (जन्म 10 अगस्त, 1918, रायपुर); पिता श्री गजानन्दराव: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री फत्तेलाल आजाद (जन्म सन् 1924, महासमुंद); पिता श्री लल्लू ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री फत्ते बहादुर (जन्म सन् 1898, ग्राम निपानिया); पिता श्री सूरजपाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री फिरतू गोंड (जन्म सन् 1894, ग्राम नवागांव, धमतरी); पिता श्री धीरहार: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री फिरतू वर्मा (जन्म सन् 1924, ग्राम कुरूद सिलयारी, रायपुर); पिता श्री मनबोधी: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री फिरतूराम वर्मा (जन्म 19 जनवरी, 1921, रायपुर); पिता श्री अनन्दा सिंह: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल सात माह का कारावास।

 

श्री फिरतूराम यादव (जन्म 1 अप्रैल, 1906, ग्राम बेलरगांव, धमतरी); पिता श्री रतन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री फिरमुतु (जन्म धमतरी); पिता श्री खडिय़ार: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री फूलचन्द (जन्म महासमुन्द); पिता श्री सुकदेव: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री फूलसिंह (जन्म ग्राम पोटिया); पिता श्री महाराजी: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री फेरूराम उर्फ कांतिकुमार (जन्म 20 सितम्बर, 1922, ग्राम मडेली, धमतरी); पिता सुनहरराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बजरंगदास (जन्म रायपुर); पिता श्री बिहारीदास: सन् 1930, 1932 और ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 21 दिन का कारावास।

 

श्री बन्सी (जन्म ग्राम कनैकेरा, महासमुन्द); पिता श्री कपूरचन्द: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री विनोदकुमार कश्यप (जन्म सन् 1927, महासमुन्द); पिता श्री पूनाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बबेका उर्फ थुनऊ (जन्म सन् 1902, ग्राम नगरी); पिता श्री चिड़कू: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में कारावास में रहे।

 

श्री बल्देव (जन्म ग्राम सराईपाली); पिता श्री ब्रजभूषणप्रसाद: राष्ट्रीय आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बल्लभदास गुप्ता (जन्म 29 अप्रैल, 1918, रायपुर); पिता श्री नारायणदास: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री बलभद्र प्रसाद शुक्ल (जन्म 2 अक्टूबर, 1904, भाटापारा); पिता श्रीराम अवतार: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष नौ माह तीन दिन का कारावास।

 

श्री बलराम (जन्म धमतरी); पिता श्री गुलाब।

 

श्री बलरामदास (जन्म सन् 1901, ग्राम बोरियाखुर्द, रायपुर); पिता श्री जमनादास: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री बलीराम (जन्म 26 अगस्त, 1904, ग्राम रावनसिंधी); पिता श्री भोंदू: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री बलीराम (जन्म सन् 1913, ग्राम मढ़ी, रायपुर); पिता श्री रतन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष 12 दिन का कारावास।

 

श्री बहुरनलाल शुक्ला (जन्म 1 जुलाई, 1918, रायपुर); पिता श्री कामदेव: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री बहुर सिंह (जन्म सन् 1915, ग्राम लभलाकला); पिता श्री लक्ष्मण: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री ब्रजभूषण लाल (जन्म बलौदाबाजार); पिता श्री रामदास: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल छः माह का कारावास।

 

श्री ब्रजलाल पाण्डे (जन्म सन् 1923, रायपुर); पिता श्री रामेश्वरप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बाबूलाल बामरे (जन्म 16 अप्रैल, 1925, रायपुर); पिता श्री दालूजी: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बिलखूदास (जन्म ग्राम टिकुलिया); पिता श्री बल्देवदास: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री बिसंभर मरार (जन्म 1 अप्रैल, 1894, ग्राम नगरी, रायपुर); पिता श्री दारू: असहयोग आन्दोलन, सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार में कुल नौ माह का कारावास।

 

श्री बिसरू राव (जन्म ग्राम कुर्रा, रायपुर); पिता श्री निर्भय: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल 10 माह का कारावास।

 

श्री बिसाली (जन्म ग्राम दतान); पिता श्री परसु: सन् 1931-32 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री बिसाहू (जन्म ग्राम मेढ़); पिता श्री कौन्दा: सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बिसाहू सिंह (जन्म सन् 1905, ग्राम भखारा); पिता श्री प्रहलाद सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बिहारी (जन्म ग्राम कोकड़ी, रायपुर); पिता श्री दुलीचन्द: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह में 11 माह 16 दिन का कारावास।

 

श्री बिहारीलाल साहू (जन्म रायपुर); पिता श्री टीकाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री बूढ़ान शाह (जन्म सन् 1910, ग्राम अरंड); पिता श्री परऊसिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बुढ़ गोड़ (जन्म धमतरी); पिता श्री बोधी: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह तथा सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में कुल 11 माह छः दिन का कारावास।

 

श्री बुधराम गोड़ (जन्म सन् 1909, ग्राम उमरगांव); पिता श्री दशरथ: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बुधवा साव (जन्म महासमुन्द); पिता श्री समारू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास। 

 

श्री बेनीराम दुबे (जन्म 1 जनवरी, 1908, रायपुर); पिता श्री राजाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री बैजनाथ (जन्म 5 अगस्त, 1920, रायपुर); पिता श्री छेदीलाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 10 दिन का कारावास।

 

श्री बैजनाथ गोंड (जन्म 1 जुलाई, 1916, ग्राम जैतपुरी, धमतरी); पिता श्री भस्सू: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बोधन (जन्म रायपुर); पिता श्री बल्देव: राष्ट्रीय आंदोलन में आठ माह का कारावास।

 

श्री बौदाटेलर (जन्म सन् 1909, महासमुन्द); पिता श्री रामचरण: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में 11 माह का कारावास।

 

श्री बोहरिक (जन्म सन् 1910, ग्राम सारागांव, रायपुर); पिता श्री ठाकुरराम: सन् 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में छः माह 23 दिन का कारावास।

 

श्री भगतराम (निवासी महासमुन्द); पिता श्री रामप्रसाद: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री भगवतीचरण शुक्ल (जन्म मार्च, 1914, रायपुर); पिता पं. रविशंकर शुक्ल: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष नौ दिन का कारावास।

 

श्री भगवानी (ग्राम नवागांव, रायपुर); पिता श्री देवचन्द: राष्ट्रीय आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री भगवानी (ग्राम गिरौद, रायपुर); पिता श्री पुर्रू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्रीमती भवन्तीन बाई (जन्म सन् 1900, ग्राम बंगोली, रायपुर); पति श्री सुन्दरदास: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री भगेलाल (जन्म ग्राम अमेठी, रायपुर); पिता श्री नत्थूलाल: राष्ट्रीय आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री भागचन्द (जन्म 14 मार्च, 1912, ग्राम बंगोली, रायपुर); पिता श्री बरसन्

 ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 11 दिन का कारावास।

 

श्री भागीरथी रावत (जन्म महासमुन्द); पिता श्री शिवप्रसाद: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री भारत (जन्म सन् 1908, ग्राम सारागांव, रायपुर); पिता श्री रामचन्द्र: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन व ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 22 दिन का कारावास।

 

श्री भूकूलाल (जन्म 13 जून, 1921, ग्राम खिसौरा, धमतरी); पिता श्री गणेश: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री भीखूलाल उर्फ भुवन (जन्म 2 अगस्त, 1922, धमतरी); पिता श्री हंसराज: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री भीमा (जन्म 9 नवम्बर, 1901, ग्राम घटूला, धमतरी); पिता श्री पंडरू: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री भूखऊ (जन्म सन् 1912, महासमुन्द); पिता श्री वोडरा: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में आठ माह का कारावास।

 

श्री भुजबल सिंह कश्यप (जन्म 13 सितम्बर, 1907, ग्राम तरेसर, रायपुर); पिता श्री मुकुटराम: सन् 1931 से राष्ट्रीय आंदोलनों में सक्रिय, कुल एक वर्ष पाँच माह का कारावास।

 

श्री भुवनलाल (जन्म 1923, महासमुन्द); पिता श्री चैन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री भुवनसिंह (जन्म ग्राम रायखेड़ा, रायपुर); पिता श्री रघुवर: राष्ट्रीय आंदोलन में एक वर्ष का कारावास। 

 

श्री भेलवा (जन्म ग्राम कोरलमा); पिता श्री सखाराम: सन् 1932 के झण्डा सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री भैयालाल बरई (जन्म धमतरी); पिता श्री शिवलाल: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री मनकूराम कोष्ठा (जन्म ग्राम सांकरा, धमतरी); पिता श्री बोधी: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्रीमती मनटोरा बाई  (जन्म ग्राम बंगोली, रायपुर) ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह आठ दिन का कारावास।

 

श्री मनराखनलाल वर्मा (जन्म 1 जून, 1917, रायपुर); पिता श्री रामेश्वर प्रसाद: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्रीमती मनमत बाई (जन्म ग्राम खुटेरी, महासमुन्द); पिता श्री पवलू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री मनबोध (जन्म ग्राम गिरोद, रायपुर); पिता श्री सदाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री मनोहरलाल श्रीवास्तव (जन्म 16 सितम्बर, 1908, रायपुर); पिता श्री रघुवरदयाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री महादेव प्रसाद पाण्डे (जन्म सन् 1925, रायपुर); पिता श्री रघुनन्दन लाल: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री महंत सुखचैनदास (जन्म रायपुर); पिता श्री छतरसिंह: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल एक वर्ष तीन माह का कारावास।

 

श्री मनराखन सुनार (जन्म 8 जून, 1927, महासमुन्द); पिता श्री लल्लू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष तीन माह का कारावास।

 

श्री महाराजी (जन्म ग्राम करहीबजार); पिता श्रीधरसी: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री मनोहरदास वैष्णव (जन्म सन् 1901, बलौदाबाजार); पिता श्री गोपालदास: सन् 1941 व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री मदन ठेठवार (जन्म सन् 1904, ग्राम पलारी); पिता श्री मोहन: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन  में कुल एक वर्ष से अधिक का कारावास।

 

श्री महेशदत्त शुक्ला (जन्म सन् 1916, रायपुर); पिता श्री शिवनाथ प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री महंत हरि दास (जन्म सन् 1909, रायपुर); पिता श्री रामरतन दास: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में 11 माह 25 दिन का कारावास।

 

श्री माखनसिंह सुहार (जन्म 16 मार्च, 1917, ग्राम साकरा, धमतरी); पिता श्री गंगाधर: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का रायपुर में कारावास।

 

श्री माधव राव (जन्म रायपुर); पिता श्री सीताराम: सन् 1930-31 के नमक तथा जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री माधवराव प्रसाद परघनिया (जन्म रायपुर); पिता श्री बालकिशन: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन व ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह 19 दिन का कारावास।

 

श्री माधव राव (जन्म ग्राम खिसोरा, धमतरी); पिता श्री देवसाय: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री माधवलाल (जन्म ग्राम चन्देली); पिता श्री चन्तसिंह: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री मान गिर (जन्म सन् 1898, ग्राम मामाभांचा); पिता श्री मिलापगिर: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री माणिकलाल चतुर्वेदी (जन्म 3 मार्च, 1901, रायपुर); पिता श्री राधाचरण: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह 10 दिन का कारावास।

 

श्री मिलाप पटेल (जन्म 1904, ग्राम बरतोरी, रायपुर); पिता श्री शोभाराम: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह व ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री मूलचन्द बागड़ी (जन्म 16 अगस्त, 1891, रायपुर); पिता श्री सुखदेव: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह, 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन, 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में कुल तीन माह 11 दिन का कारावास।

 

श्री मुन्नालाल कायस्थ (जन्म धमतरी); पिता श्री हीरालाल: राष्ट्रीय आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री मेघनाथ (जन्म ग्राम पाट सुन्दरी, रायपुर); पिता श्री बैजनाथ: राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में नौ माह का कारावास। 

 

श्री मोतीलाल त्रिपाठी (जन्म 24 जुलाई, 1923, रायपुर); पिता श्री प्यारेलाल त्रिपाठी: सन् 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल एक वर्ष चार माह 18 दिन का कारावास।

 

श्री मोती सिंह (जन्म ग्राम राजिम); पिता श्री रघुवर सिंह: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन तथा ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुल एक वर्ष दो माह का कारावास।

 

श्री मोहनलाल बरई (जन्म 13 जुलाई, 1916, धमतरी); पिता श्री लालाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में आठ माह का कारावास।

 

श्री मंगल (जन्म धमतरी); पिता श्री पिसरू: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री मंगलसिंह (जन्म ग्राम नेवरा, रायपुर); पिता श्री गजाधर: राष्ट्रीय आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री मंगलू (जन्म ग्राम बागाडार, धमतरी); पिता श्री अर्जुन: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह सात दिन का कारावास। 

 

श्री मंगूलाल राठौर (जन्म 11 जनवरी, 1908, रायपुर); पिता श्री गुलाबचन्द: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन, ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री मंगलूराम मरार (जन्म निवासी महासमुन्द); पिता श्री शोभाराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री मंगूराम (जन्म 22 जुलाई, 1906, ग्राम नारूला, रायपुर); पिता श्री शिवप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में सात माह तीन दिन का कारावास।

 

श्री रघुनाथ भाले (जन्म 15 जुलाई, 1915, रायपुर); पिता श्री सीताराम: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नौ माह 24 दिन का कारावास।

 

श्री रघुनायक प्रसाद केसरवानी (जन्म 14 अक्टूबर, 1909, ग्राम पठारीडीह); पिता श्री बैजनाथप्रसाद: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में एक वर्ष एक माह का कारावास।

 

श्री रघुवीर सिंह (जन्म ग्राम तमोरा); पिता श्री बचवा: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री रजनी (जन्म भाटापारा); पिता श्री किशन: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री रतनलाल साहू (जन्म 27 दिसम्बर, 1902, ग्राम डेमसरा, धमतरी); पिता श्री चुनकू: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री रतन यादव (जन्म 25 जुलाई, 1916, ग्राम लमकेनी, धमतरी); पिता श्री बीरबल: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में सक्रियता तथा रायपुर व नरसिंहपुर में चार माह का कारावास। नयागांव लमकेनी गोलीकांड में गोली लगी।

 

श्री रतीराम (जन्म सन् 1922, रायपुर); पिता श्री लखपति: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में छः माह 10 दिन का कारावास।

 

श्री रणवीर सिंह शास्त्री (जन्म सन् 1919, रायपुर); पिता श्री बालकेश्वर सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री रामधर दीवान (जन्म सन् 1914, ग्राम चांपाझर, रायपुर); पिता श्री गणेशधर: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री रमणीकलाल (जन्म 10 अक्टूबर, 1912, रायपुर); पिता श्री पोपटलाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 14 दिन का कारावास।

 

श्री रमानाथ (जन्म 26 जनवरी, 1926, ग्राम नेवरा, रायपुर); पिता श्री अनुपनाथ: राष्ट्रीय आन्दोलन में छः माह का कारावास। 

 

श्री राजन उर्फ रामजी अहीर (जन्म भाटापारा); पिता श्री निपाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री राजाराम (जन्म ग्राम खट्टी, रायपुर); पिता श्री कपिल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री राजेन्द्र कुमार चौबे (जन्म 21 जुलाई, 1903, रायपुर); पिता श्री गणपतलाल: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में कुल एक वर्ष आठ माह तथा 27 दिन का कारावास।

 

श्री राजेन्द्र लाल पाठक (जन्म 3 फरवरी, 1927, रायपुर); पिता श्री मोहनलाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में आठ माह का कारावास।

 

श्री रामकृष्ण (जन्म ग्राम नवापारा); पिता श्री कुंजबिहारी: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में भागीदारी तथा एक वर्ष दो माह का कारावास।

 

श्री रामकृष्ण मिश्र (जन्म जून 1911, रायपुर); पिता श्री गजानंद: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामकृष्ण साव (जन्म 8 सितंबर, 1925, रायपुर); पिता श्री श्रवणलाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 24 दिन का कारावास।

 

श्री रामकृष्ण शेष (जन्म 21 अगस्त, 1910, भाटापारा); पिता श्री शंकरराव: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में एक वर्ष तीन माह का कारावास।

 

श्री रामकुमार दानी (जन्म 31 मई, 1904, रायपुर); पिता श्री रामनारायण: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में 11 माह 21 दिन का कारावास।

 

श्री रामखिलावन शुक्ल (जन्म सन् 1925, भाटापारा); पिता श्री छबिराम: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामचरण (जन्म ग्राम रावन, जिला रायपुर); पिता श्री अन्जोरी: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में 11 माह 26 दिन का कारावास।

 

श्री रामचरण (जन्म सन् 1901, भाटापारा); पिता श्री तिजऊ: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री रामचरण गोड़ (जन्म ग्राम कोकड़ी); पिता श्री बोधी: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री रामचरण ठेठवार (जन्म सन् 1903, ग्राम सीतापार); पिता श्री बहोरन: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 27 दिन का कारावास।

 

श्री रामचरण पाठक (निवासी लोहारदेही); पिता श्री गौरीशंकर: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री रामचरण शर्मा (जन्म महासमुन्द); पिता श्री तुलसीराम: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री रामचरण सतनामी (जन्म महासमुन्द); पिता श्री दसरू: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह, ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामजी (जन्म निवासी दतान); पिता श्रीनारायण: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री रामदयाल (जन्म ग्राम रावन); पिता श्री सोनचन्द: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामदुलारे पाण्डे (जन्म ग्राम नवागांव); पिता श्री भागीरथी: सन् 1932 के विदेशी वस्तु के बहिष्कार आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामनाथ (जन्म ग्राम अमेरा, रायपुर); पिता श्री सीताराम: सन् 1931-32 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में नौ माह का कारावास। 

 

श्री रामनाथ दुबे (जन्म 1 जुलाई, 1922, रायपुर); पिता श्री कपिलनाथ: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 20 दिन का कारावास।

 

श्री रामनाथ पुराणिक (जन्म रायपुर); पिता श्री गंगाधर: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामनारायण (जन्म 13 सितम्बर, 1923, महासमुन्द); पिता श्री लालाराम: सन् 1942 के ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में भागीदारी तथा छः माह का कारावास।

 

श्री रामनारायण हर्षुल (जन्म 23 सितम्बर, 1906, रायपुर); पिता श्री रामगोपाल मिश्र: सन् 1930 से स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय। विभिन्न आंदोलनों में कुल एक वर्ष पाँच माह तथा 10 दिवस का कारावास।

 

श्री राममनोहराचार्य (जन्म सन् 1910, रायपुर); पिता श्री गुरुप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 21 दिन का कारावास।

 

श्री रामपाल सिंह (जन्म सन् 1920, रायपुर); पिता  श्री जंगबहादुर सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 12 दिन का कारावास।

 

श्री रामभद्र दवे (जन्म 1 मई, 1913, ग्राम बागबाहरा); पिता श्री शिवप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में आठ माह का कारावास।

 

श्री रामभरोसा (जन्म सन् 1870, ग्राम सारागांव, रायपुर); पिता श्री धनीराम: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 23 दिन का कारावास।

 

श्री रामभरोसे सोनी (जन्म 15 अप्रैल, 1915, धमतरी); पिता श्री लीलमणि: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में कुल छः माह का कारावास एवं जुर्माना। 

 

श्री रामरतन दुबे (जन्म सन् 1913, रायपुर); पिता श्री कपिलनाथ: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में दो वर्ष छः दिन का कारावास।

 

श्री रामसहाय तिवारी (जन्म 16 जुलाई, 1921, रायपुर); पिता श्री शिवराज: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्रीमती रामवती वर्मा (जन्म 15 जुलाई, 1911, ग्राम बंगोली, रायपुर); पति श्री नन्दलाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री राम खिलावन (जन्म ग्राम राजिम); पिता श्री रामचरण: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामगोपाल (जन्म रायपुर); पिता श्री काशीप्रसाद: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में कुल सात माह 11 दिन का कारावास।

 

श्री रामजी गोंड (जन्म 13 जून, 1919, ग्राम जैतपुरी, धमतरी); पिता श्री महगू: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में कुल छः माह से अधिक का कारावास एवं शारीरिक यातनाएं।

 

श्री रामलाल (जन्म सन् 1924, महासमुन्द); पिता श्री कल्लू: राष्ट्रीय आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामलाल उर्फ रमनचंद कुर्मी (जन्म सन् 1910, ग्राम गनियारी, रायपुर); पिता श्री मनिहार: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामलाल अग्रवाल (जन्म सन् 1894, निवासी अमरौद, धमतरी); पिता श्री पन्नालाल: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भागीदारी तथा कुल मिलाकर एक वर्ष, चार माह व 15 दिन का कारावास।

 

श्री रामलाल वर्मा (जन्म सन् 1902, ग्राम पलारी, रायपुर); पिता श्री बंशी कुर्मी: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामस्वरूप दास वैष्णव (जन्म सन् 1911, महासमुन्द); पिता श्री गुरू नारायणदास: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री राम सहाय (जन्म ग्राम मुडतराई); पिता श्री पूरनलाल: स्वतंत्रता आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामसिंह (निवासी भखाडीह); पिता श्री मनबोध: सन् 1931-32 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामसिंह (जन्म ग्राम पिथौरा); पिता श्री साधूलाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामसिंह मनू (जन्म 4 अगस्त, 1918, ग्राम गिरोद, रायपुर); पिता श्री शिवप्राद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री रामसिंह लोहार (जन्म सन् 1901, ग्राम हरदीभाठा, धमतरी); पिता श्री जोगी: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामाधार चन्द्र बख्शी (जन्म 1 नवम्बर, 1926, ग्राम कुरुद सिलयारी, रायपुर); पिता श्री जयचन्द: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री रामाधार तिवारी (जन्म 16 अगस्त, 1926, रायपुर); पिता श्री मन्नूलाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री रामाधीन (जन्म सन् 1901, भाटापारा); पिता श्री सन्तोष: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री रामधीन साहू (जन्म 19 जुलाई, 1922, धमतरी); पिता श्री बहोरन: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामाराव (जन्म 18 अगस्त, 1917, रायपुर); पिता श्री कृष्णराव: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में छः माह का वर्धा में कारावास।

 

श्री रामाराव पवार (जन्म धमतरी); पिता श्री लालसाव: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रामलाल वर्मा (जन्म सन् 1922, ग्राम कुरुद सिलयारी, रायपुर); पिता श्री चरण: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में आठ माह का कारावास।

 

श्रीमती रुक्मणि बाई (जन्म सन् 1910, महासमुन्द); पति श्री जटाशंकर: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रेवाराम (जन्म ग्राम रावन); पिता श्री शिवप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री रेनू गोंड (जन्म 1904, धमतरी); पिता श्री सुधू: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में लगभग छः माह रायपुर में कारावास।

 

श्री लखनलाल गुप्ता (जन्म 13 मई, 1911, ग्राम आरंग, रायपुर); पिता श्री श्यामलाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री लतेल गोंड़ (जन्म ग्राम डेमसरा); पिता श्री पंकू: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री लक्ष्मण पिल्ले (जन्म महासमुन्द); पिता श्री शिवचरण: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री लक्ष्मणसिंह वर्मा (जन्म सन् 1920, ग्राम बटगन); पिता श्री रामजगस: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह 23 दिन का कारावास।

 

श्री लल्लू राम (जन्म ग्राम समोदा); पिता श्री नारायण: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में छः माह से अधिक का कारावास।

 

श्री लक्ष्मीप्रसाद तिवारी (जन्म सन् 1878, ग्राम अचानकपुर); पिता श्री भोला प्रसाद: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में कुल छः माह से अधिक का कारावास।

 

श्री लक्ष्मीनाथ सोनी (जन्म 23 नवम्बर, 1918, धमतरी); पिता श्री नीलमन: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में भाग लेने पर बेतों की सजा, ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में तीन माह नज़रबन्द तथा छः माह का कारावास।

 

श्री लक्ष्मीलाल जैन (जन्म सन् 1910, ग्राम गड़बेड़ा, रायपुर); पिता श्री ज्ञानमल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में आठ माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री लाल दास (जन्म 31 जनवरी, 1922, ग्राम पोंड़, रायपुर); पिता श्री गोविंद दास: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह तथा सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में कुल छः माह का कारावास।

 

श्री लीलाधर दामोहे (जन्म सन् 1915, रायपुर); पिता श्री मुरलीधर: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह नौ दिन का कारावास।

 

श्रीमती लीला बाई (ग्राम सहसतोड़ा): पति श्री विश्राम: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री लीधा खत्री (जन्म सन् 1920, ग्राम खट्टी); पिता श्री मान्जी: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह तथा सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री वहया उर्फ सन्ई (जन्म धमतरी); पिता श्री मदन: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री विदेशी (जन्म धमतरी); पिता श्री विश्वनाथ: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री विष्णु (जन्म सन् 1924, महासमुन्द); पिता श्री जरहू: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री विष्णु प्रसाद अग्रवाल (जन्म 24 दिसम्बर, 1914, रायपुर); पिता श्री अयोध्या प्रसाद: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह तथा नमक सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री विष्णुप्रसाद दुबे (जन्म 1 मई, 1925, महासमुन्द); पिता श्री बिसाहू प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्रीमती विश्वासा (जन्म सन् 1900, ग्राम बंगोली, रायपुर); पिता श्री गौजे गिरधारी: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह आठ दिन का कारावास।

 

श्री बिसौहा (ग्राम मेंढरी, धमतरी); पिता श्री धनसाय: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री बिसौहा (ग्राम पाहन्दा, रायपुर); पिता श्री धनसहाय: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री विश्राम (ग्राम कुर्रा, रायपुर); पिता श्री गोपाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री विधामदास (जन्म सन् 1910, रायपुर); पिता श्री महेशदास: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री वेंकटेश कोहाड़े (जन्म सन् 1921, रायपुर); पिता श्री राघवजी: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री वीरसिंह (जन्म 5 अगस्त, 1906, रायपुर); पिता श्री मुकुन्द सिंह: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री श्यामशंकर मिश्रा (ग्राम देवभोग); पिता श्री रामप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री डॉ. शरण प्रसाद बघेल (जन्म 27 अक्टूबर, 1922, ग्राम पथरी, रायपुर); पिता श्री नकुल प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में 10 माह का कारावास।

 

श्री शत्रुघ्न दत्त पाठक (जन्म 24 अप्रैल, 1910); पिता श्री गणेशदत्त: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह, नमक सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री शालिगराम चंद्रवंशी (जन्म 16 सितम्बर, 1920, ग्राम जरवे, रायपुर); पिता श्री डोमार सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री शालिकराम शुक्ला (रायपुर); पिता श्री बैजनाथ: सन् 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह व ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह 11 दिन का कारावास।

 

श्री शिवकुमार तिवारी (जन्म 5 जुलाई, 1927, धमतरी); पिता श्री शिवबोधन: सन् 1940-41 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में कुल मिलाकर सात माह रायपुर में कारावास।

 

श्री शिवगोविंद सोनी (जन्म 16 अगस्त, 1924, धमतरी); पिता श्री तिरथराम: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह रायपुर में कारावास।

 

श्री शिवचरण (ग्राम बिसगुड़ी, धमतरी); पिता श्री प्रसादी: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री शिवप्रसाद (ग्राम भेंडरी, रायपुर); पिता श्री सखलाल: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री शिव प्रसाद शर्मा (जन्म सन् 1912 ग्राम बटरेल, धमतरी); पिता श्री बिसाहू प्रसाद: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में चार माह 15 दिन का रायपुर में कारावास एवं 15 बेंत की सज़ा।

 

श्री शिवरतन पुरी (ग्राम खट्टी); पिता श्री त्रिलोचन: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह तथा सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में कुल छः माह का कारावास।

 

श्री शिवदास डागा (रायपुर); पिता श्री विशेषर दास: सन् 1930 के नमक सत्याग्रह, सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन, सन् 1940 41 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में कुल पाँच माह 17 दिन का कारावास।

 

श्री शिवनाथ (जन्म सन् 1903, ग्राम नगरी); पिता श्री भादू: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री शिवनारायण (महासमुन्द); पिता श्री लक्ष्मीचंद: राष्ट्रीय आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री शिवपाल सिंह (जन्म 15 फरवरी, 1915 ग्राम तरपोंगी, रायपुर); पिता श्री भुनेश्वर सिंह: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में कुल सात माह 18 दिन का कारावास।

 

श्री शिवलाल (जन्म सन् 1863, ग्राम सारागांव, रायपुर); पिता श्री गहन: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री शिव सिंह (जन्म 15 फरवरी, 1916, धमतरी); पिता श्री निर्भय सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री शीतलप्रसाद मिश्रा (जन्म सन् 1922, रायपुर); पिता श्री चंद्रिका प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में 10 माह 18 दिन का कारावास।

 

श्री शुक्लाल गोंड (जन्म सन् 1910 ग्राम सांकरा, धमतरी); पिता श्री गुलाब: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री शेरसिंह (जन्म सन् 1922, धमतरी); पिता श्री सुमेर सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह रायपुर में कारावास।

 

श्री शोभादास (ग्राम सांकरा, धमतरी); पिता श्री बल्लभदास: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री शोभाराम गोंड (जन्म सन् 1909, ग्राम बोरियाझार); पिता श्री रामजी: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री शोभाराम साहू (जन्म 1 जुलाई, 1895, ग्राम नगरी, धमतरी); पिता श्री सोमनाथ: सन् 1921 के असहयोग आंदोलन, सन् 1923 के झण्डा सत्याग्रह में कुल नौ माह का कारावास तथा 75 रु. अर्थदंड।

 

श्री शंकर राव (धमतरी); पिता श्री नत्थूराव: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह में सात माह का कारावास।

 

श्री शंकरराव (ग्राम गनोद, रायपुर); पिता श्री वेंकटराव: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री शंकर राव (जन्म 9 जून, 1924, महासमुन्द); पिता श्री त्रियम्बकराव: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री शंकर लाल वर्मा (जन्म सन् 1910, ग्राम रावन, रायपुर); पिता श्री दरयाव वर्मा: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री शंकर राव सप्रे (जन्म सन् 1910, रायपुर); पिता श्री माधवराव सप्रे: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सगून (जन्म सन् 1901, ग्राम गायनाभर्री, धमतरी); पिता श्री सखाराम: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सत्यनारायण दास नागा (रायपुर); पिता श्री राम सेवादास: विभिन्न राष्ट्रीय आंदोलनों में कुल 10 माह, 17 दिन का कारावास।

 

श्री सत्य स्वरूप (जन्म सन् 1908, ग्राम भवापारा); पिता श्रीनाथ: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में दो वर्ष का कारावास।

 

श्री सरजू कुर्मी (जन्म सन् 1925, महासमुन्द); पिता श्री गिरवर: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सरयूप्रसाद (ग्राम छेरकापुर, रायपुर); पिता श्री दुखवा प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री सरहूराम वर्मा (जन्म 8 मई, 1921 ग्राम बटगन, रायपुर); पिता श्री कमल सिंह: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री सहज खान (ग्राम सिमगा); पिता श्री सेथईखान: राष्ट्रीय आंदोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री सहसराम (जन्म सन् 1905, ग्राम सेम्हराडीह, रायपुर); पिता श्री सुखालाल: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सखाराम (रायपुर); पिता श्री समयलाल: राष्ट्रीय आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सखाराम गोड़ (जन्म 5 जुलाई, 1900, ग्राम हेमसरा, धमतरी); पिता श्री इतवारी: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में एक वर्ष तीन माह रायपुर में कारावास।

 

श्री सखाराम गोंड (धमतरी); पिता श्री मेहरा: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री साधुराम (जन्म सन् 1903, ग्राम सांकरा, धमतरी); पिता श्री शिवशंकर: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सालिगराम पाण्डे (जन्म 1 जुलाई, 1920, ग्राम नगरगांव, रायपुर) पिता श्री दीनानाथ: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में 10 माह का कारावास।

 

श्री सावजी (जन्म 1 मई, 1927, महासमुन्द); पिता श्री गोवर्धन: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में एक वर्ष का कारावास।

 

श्री साहिबराम (ग्राम खपराडीह, रायपुर); पिता श्री भंगी: सन् 1931-32 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में आठ माह का कारावास।

 

श्री सावलदास (ग्राम लमराकला); पिता श्री पलटुदास: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री सिमही गोंड़ (ग्राम नगरी, धमतरी); पिता श्री अधारी: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सिरिया (ग्राम सेमराडीह, रायपुर); पिता श्री टेनी: राष्ट्रीय आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री ससऊ गोंड (ग्राम उमरगांव); पिता श्री मंगतर: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सुकेला (ग्राम पोरिया); पिता श्री रामचरण: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सुखराम (जन्म सन् 1903, ग्राम इच्छापुर); पिता श्री छर्मू: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह तथा सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में भागीदारी।

 

श्री सुखराम बर्छिया (जन्म सन् 1905, ग्राम चंदखुरी, रायपुर); पिता श्री हिन्दाराम: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह, सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में कुल 11 माह का कारावास।

 

श्री सुन्दर सिंह (जन्म सन् 1918, रायपुर); पिता श्री गेंड़ासिंह: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 13 दिन का कारावास।

 

श्री सुकेत (ग्राम मामाभांचा); पिता श्री पीताम्बर: राष्ट्रीय आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्रीमती सुमति बाई (ग्राम खुटेरी, महासमुन्द); पिता श्री राजाराम: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सुकालू (जन्म 15 जून, 1920, ग्राम कुर्रा, रायपुर); पिता श्री घसिया: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में कुल सात माह का  कारावास।

 

श्री सुकालू (जन्म सन् 1897, ग्राम सिहावा, धमतरी); पिता श्री हरी: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सखेश्वर प्रसाद मिश्रा (जन्म 1907, भाटापारा); पिता श्री गयादीन: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री सेरेन्द्र दास (रायपुर); पिता श्री गणेशचन्द्र दास: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में 10 माह 16 दिन का कारावास।

 

श्री सूर्यकान्त खुबचन्द दानी (जन्म 3 सितम्बर, 1922, रायपुर); पिता श्री चोइत राम खूबचन्दानी: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री सूर्यप्रसाद मिश्रा (जन्म सन् 1926, भाटापारा); पिता श्री सर्वेश्वर प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में वर्ष सात माह का कारावास।

 

श्री सूरजप्रसाद सक्सेना (जन्म  सन् 1924, रायपुर); पिता श्री नर्मदा प्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में एक वर्ष छः माह का कारावास।

 

श्री सेठ अनप्तराम (ग्राम चंदखुरी, रायपुर); पिता श्री इच्छाराम: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन, सन् 1940 41 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में भाग लिया।

 

श्री सोनीलाल केशरवानी (जन्म सन् 1904, निवासी नवागांव); पिता श्री छोटेलाल: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में तीन माह का कारावास।

 

सोहनलाल जैन (जन्म 10 मई, 1926, ग्राम नांदगांव, महासमुन्द); पिता श्री कुबेरचन्द जैन: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री हजारीलाल (जन्म 15 फरवरी, 1910, धमतरी); पिता श्री गजाधरप्रसाद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री हजारीलाल वर्मा (जन्म 25 अक्टूबर, 1910, रायपुर); पिता श्री सखाराम: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह नौ दिन का कारावास।

 

श्री हलधर दीवान (जन्म 2 मई, 1920, धमतरी); पिता श्री गोविन्दधर: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह रायपुर में कारावास।

 

श्री हनुमान सिंह (ग्राम सुनसनिया); पिता श्री शिवलाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री हरखराम चन्द्रवंशी (जन्म 6 दिसम्बर, 1925, ग्राम कुरुद सिलयारी, रायपुर); पिता श्री ताराचंद: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास। 

 

श्री हरनारायण पाण्डे (जन्म 11 फरवरी, 1915, ग्राम बिटकुली, रायपुर); पिता श्री भागवतप्रसाद: सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री हरलाल अग्रवाल (जन्म 1 जुलाई, 1914, रायपुर); पिता श्री विशनलाल: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में एक वर्ष दो माह का कारावास।

 

श्री हृदयराम कश्यप (जन्म 19 अप्रैल, 1919, रायपुर); पिता श्री गणपतराम: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 29 दिन का कारावास।

 

श्री हृदयराम वर्मा (जन्म सन् 1906, ग्राम बरतोरी, रायपुर); पिता श्री रमई: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह का कारावास।

 

श्री हरिप्रेम बघेल (जन्म 10 जुलाई, 1924, रायपुर); पिता श्री प्रेमतीर्थ: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में सात माह पाँच दिवस का कारावास।

 

श्री हरिसिंह दरबार (रायपुर); पिता श्री बागजीभाई: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन, सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में भागीदारी।

 

श्री हरिप्रसाद (भाटापारा); पिता श्री काशीराम: राष्ट्रीय आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री हरिसिंह (ग्राम कोलदा): ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री हरिराम साहू (ग्राम पोटियाडीह): सन् 1932 के विदेशी वस्तु बहिष्कार आंदोलन में तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में नौ माह का कारावास।

 

श्री हरिसिंह (ग्राम सावर, रायपुर); पिता श्री भूला: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री हलधर दीवान (ग्राम कुकरा, रायपुर); पिता श्री लीलाधर: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह 15 दिन का कारावास।

 

श्री हारू कलार (ग्राम बिरगुड़ी, धमतरी); पिता श्री खेदू: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री हिंगराज गिर (ग्राम बम्हारमड़ा, रायपुर); पिता श्री हरदेव: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास। 

 

श्री हीरजी भाई साहू (जन्म 24 मार्च, 1907, धमतरी); पिता श्री हंसराज: सन् 1930 के जंगल सत्याग्रह तथा सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भागीदारी तथा तीन माह रायपुर तथा नागपुर में कारावास। 

 

श्री हीराधन दीवान (जन्म 1 जुलाई, 1920, धमतरी); पिता श्री जड़ावनधर: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में दो माह नज़रबंद एवं छः माह का कारावास।

 

श्री हीरालाल कन्हैया (जन्म सन् 1917, ग्राम चटौद, रायपुर); पिता श्री आशाराम: सन् 1932 के सविनय अवज्ञा आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री हीरासिंह (धमतरी); पिता अर्जुन सिंह: सन् 1930-31 के जंगल सत्याग्रह में छः माह का कारावास।

 

श्री हीरासिंह गोंड़ (जन्म सन् 1913, ग्राम नगरी, धमतरी); पिता श्री अमृत: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री हीरसिंह (जन्म 14 नवम्बर, 1917, ग्राम चरोदा, रायपुर); पिता श्री बोधराम: सन् 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह तथा ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में छः माह का कारावास।

 

श्री श्रीराम शुक्ल (जन्म सन् 1923, रायपुर); पिता श्री गौरीशंकर: ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन में आठ माह का कारावास।

 

 

स्रोत

 

मध्य प्रदेश शासन. रायपुर जिला गज़ेटियर. १९७३ 

 

मध्य प्रदेश शासन, भाषा संचालनालय, संस्कृति विभाग. मध्य प्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम सैनिक, भाग 3. भोपाल.

 

अग्रवाल, प्रताप. ब्रिटिश जेल घ्वस्त . जगदलपुर 

 

ठाकुर, हरि. छत्तीसगढ़ गौरव गाथा, संपादक  विष्णु सिंह ठाकुर, देवीप्रसाद वर्मा, एवं आषीश सिंह 

 

रायपुर जिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संगठन. 'रायपुर जिला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सूची'. 1990.

 

सिंह, आशीष. रायपुर नगर का इतिहास .

 

साक्षात्कार 

शिवबालकराम गंगले, आशीष सिंह द्वारा. 

 

 

This content has been created as part of a project commissioned by the Directorate of Culture and Archaeology, Government of Chhattisgarh, to document the cultural and natural heritage of the state of Chhattisgarh.