Indian Freedom Movement

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Ashish Singh and Shruti Chakraborty
Referred to as the Jal Satyagraha or Water Satyagraha, this incident in the village of Kandel was the result of a decree by the British government that imposed a very high irrigation tax on the people. (Photo Courtesy: Chhattisgarh Project/Sahapedia)   There were a number of incidents associated…
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Navina Lamba
There are numerous museums all around India which trace the nation's history and the lives of the people who helped achieve independence from the British. These museums, which preserve the legacy of our freedom fighters, are important sites which make the younger generation aware of the…
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M.D. Muthukumaraswamy
In this edition of ‘Lore and Life’, we look at the history of Holi, the various myths, traditions and rituals associated with the festival, and how the festival was used in the Indian independence movement (In pic: A 19th-century painting of a prince playing Holi in his harem from the National…
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यह पुस्तक पुस्तक श्रृंखला का तीसरा हिस्सा है जो मध्य प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके क्षेत्र का योगदान प्रस्तुत करती है।   This book is the third part of the book series that introduces the freedom fighters of Madhya Pradesh and the contribution of their region in the…
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M.D. Muthukumaraswamy
Hind Swaraj shows that Mahatma Gandhi's sense of Indian civilisational ethos draws from both the literary canon and oral folklore. Gandhi in this little booklet combines his cultural, political, and economic ideas succinctly.   Mahatma Gandhi's Hind Swaraj and its illuminating civilisational…
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आशीष सिंह
  उपलब्ध विवरण के आधार पर छत्तीसगढ रायपुर के स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी एवं सूची यहाँ प्रस्तुत की जा रही है।     नारायण सिंह वर्ष 1856 में छत्तीसगढ़ में भीषण अकाल पड़ा था। जमींदार नारायण सिंह की प्रजा के समक्ष भूखों मरने की स्थिति थी। उन्होंने अपने गोदाम से अनाज लोगों को बांट दिया, लेकिन वह मदद…
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आशीष सिंह
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आशीष सिंह
छत्तीसगढ़ में जंगल के संघर्ष का इतिहास पुराना है। छत्तीसगढ़ में जंगल सत्याग्रह की घटनाएं ब्रिटिश शासन के फरमान का नतीजा थीं। ब्रिटिश सरकार के भारतीय कारिन्दे उनके आदेशों का पालन करवाने के लिए अमानवीय रवैया अपना रहे थे। इससे इस संघर्ष को अधिक बल मिला।      नगरी-सिहावा जंगल सत्याग्रह: वर्ष 1920 नगरी-…
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आशीष सिंह
                                         छत्तीसगढ़ में जल संघर्ष का इतिहास  पुराना है। चूंकि स्वाधीनता आंदोलन व जल संघर्ष साथ-साथ ही चले, इसलिए हम इसे स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा मान लेते हैं। हालांकि, यह सच नहीं है। ये दोनों आंदोलन पृथक रहे हैं। यह सर्वविदित है कि कंडेल नहर सत्याग्रह की घटना…
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आशीष सिंह
देश के अन्य हिस्सों की भांति, वर्तमान छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में भी, अंग्रेजी शासन की नीतियों के विरुद्ध जन आक्रोश उभरने लगा था। सन १९२० में रायपुर जिले के धमतरी, कंडेल, नगरी, सिहावा, बादराटोला एवं नवापारा-तानवट आदि स्थानों पर प्रशासन के जल एवं जंगल सम्बन्धी जनविरोधी आदेशों के विरुद्ध आंदोलन हुए।…
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