Kabir

Displaying 1 - 10 of 15
Priti Tripathi
कबीर के काव्य में जगह-जगह प्रकृति अपनी पूरी गरिमा व भव्यता के साथ मौजूद है। यहाँ तक कि वह कई बार उपदेशक की भूमिका में भी नज़र आती है, जो इस जटिल व विषमतामय जीवन की परिस्थितियों से उबरने में मनुष्य की सहायता करती है। ऐसे में यदि हम उनके काव्य में अभिव्यक्त इस पर्यावरणीय चेतना को समझ सकें और इसे जीवन…
in Article
Navjot Kour
Aijazuddin, F.S. Pahari Paintings and Sikh Portraits in the Lahore Museum. Karachi and Delhi: Oxford University Press, 1977. Archer, W G.  Kangra Paintings: The Faber Gallery of Oriental Art. Faber and Faber Limited, 1956. Archer, W G. Indian Paintings from the Punjab Hills. Vol I and II. Delhi:…
in Bibliography
Navjot Kour
  Introduction   The region of Jammu has a rich historical legacy of temples. With Vaishnavism and Shaivism considered as major religious traditions in the region, these temples play a major role in the social setup of the area, so much so that the city of Jammu is synonymous with the presence of…
in Overview
Navjot Kour
in Image Gallery
Saumya Mani Tripathi
  लोक संस्कृति ही किसी भी देश, समाज या व्यक्ति की आत्मा होती है.भारतीय समाज की बात करें तो यहाँ का लोकजीवन भी मौखिक एवं आडंबररहित साहित्यों की विरासत वाला है। यह वह लोक है जिसे किसी प्रकाशन की ज़रूरत नहीं पड़ी, जिसे सबकुछ संघर्ष से मिला, जो अपनी संस्कृति, सभ्यता को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को आगे बढ़ाता…
in Overview
Saumya Mani Tripathi
in Image Gallery
डॉ सुधा उपाध्याय
  ‘जाति जुलाहा नाम कबीरा बिन बिन फिरो उदासी।’   कबीरपंथियों की मान्यता है कि कबीर की उत्पत्ति काशी में लहरतारा तालाब में उत्पन्न कमल के मनोहर पुष्प के ऊपर बालक के रूप में हुई। ऐसा भी कहा जाता है कि कबीर जन्म से मुसलमान थे और युवावस्था में स्वामी रामानन्द के प्रभाव से उन्हें हिन्दूधर्म का ज्ञान हुआ…
in Article
Rajat Kumar
Documentary films are often a subject of controversy in India. The grant of a certificate from the Censor Board is not a guarantee that the film can be exhibited without fear of violence or intimidation. The challenges faced by any filmmaker in terms of the arbitrary decisions of the censor…
in Article
Raziuddin Aquil
(पल्लव - 2015, हिंदी साहित्य परिषद, हिंदी विभाग, किरोड़ीमल महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, में 13 मार्च 2015 को दिया गया व्याख्यान)   मुझे ख़ुशी है कि आज मुझे यहाँ बोलने का मौक़ा मिला है l आमतौर पर इतिहास और साहित्य के विद्वान एक दूसरे से बातें नहीं कर पाते हैं, हालांकि सबको मालूम है कि इतिहास और…
in Article