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Publish on: 12-04-2018

Madan Meena

Madan Meena is a visual artist and researcher. He has worked extensively with artists and craftspersons from Rajasthan. His doctoral dissertation from the University of Rajasthan was on the 'Art of the Meena Tribe'. He continues to work as a researcher with the women of the Meena tribe and has documented and exhibited their Mandana wall paintings across the country and abroad. He has published two books on the subject, 'Joy of Creativity' and 'Nurturing Walls'. As a practising visual artist, Madan has exhibited his own works extensively.

As a curator, he has designed an exhibition on brooms for Arna Jharna, the 'Desert Museum of Rajasthan’ of Rupayan Sansthan. For this he travelled throughout Rajasthan studying the broom-making communities, their socio-political and cultural issues. He was Associate Director for the film ‘Jharu Katha’ on the same subject.

His association with late Komal Kothari, one of India's leading folklorists and oral historians inspired him to start his independent research and documentation in eastern Rajasthan where he is based. He has been recording oral traditions among the rural communities for a long period. Madan received a grant from Cambridge University under the World Oral Literature Project (WOLP) to document Tejaji Ballad. Under the grant he has published a book ‘Tejaji Gatha’ and an audio DVD. His interest in languages has led him to start his work on the secret language of the nomadic and de-notified tribes residing in Rajasthan. For this he has received a fellowship from the Firebird Foundation for Anthropological Research, USA. As a state coordinator for Bhasha Research and Publication Centre, Baroda he edited the Hindi and English volumes of Rajasthani languages under the People’s Linguistic Survey of India project. He was also a state coordinator for ICSSR’s project of surveying the educational status of the nomadic and de-notified tribes of Rajasthan.

Madan has received a Senior Research Fellowship from CCRT-Department of Culture, Govt. of India to extend his work in folklore studies in Marwar (western Rajasthan). He is a Trustee of Bhasha Research and Publication Centre, Vadodara and Executive Member of Kota Heritage Society. As a visiting faculty he teaches traditional crafts at the Indian Institute of Crafts and Design, Jaipur. He currently works and lives in Kota, Rajasthan.

Banda-Rajasthan, October 2017, Audio File 2/7

 

आॅडियो फाईल नं॰ Bharathari-02

 

औम नाम सबसे बड़ा या सूं बड़ा नै कोईऽऽ
कोई भईयाऽऽ!
औम नाम की करलै सुमरणा भाई ओ शुध्द आत्मा होईऽऽ
होई भईयाऽऽ!

चलता दीखै नहीं चन्द्रमाऽऽ बढ़ती न दीखै बेलऽऽ
वाह् प्यारोंऽऽ!
अरै साधु दीखै नही सुमरण करता होवै च नै रै प्यारा हो कुदरत का खैलऽऽ
खैल भईयाऽऽ!
अरैऽऽ!

प्यारै भाईओऽऽ
कांई भईयाऽऽ!
गाँव का भी लाखा प्रजापत कै लारै गाँव नै छोड़र् जार्या चऽऽ 
जार्या च भाईऽऽ
मालम पड़ जाव च राजा पैपसिंह कू मैहल कैऽऽ
माईनैऽऽ
तो राजा पैपसिंह घोडा़ पै नौलखा पै बैठ जाऔ चऽऽ
बैठ जा च भईयाऽऽ
बैठ घोड़ा पै अर गांव कांन नै जार आगै फर जाऔ चऽऽ 
फर ज्या च भाईऽऽ
कांई गाँँव का नै कैह् र्यो चऽऽ
कांई कैह् र्यो च भईयाऽऽ

आज भाई बस्ती का ओ किंयां जार्या च गांव नै छोड़र् किंयां ई सूनोकर कर चाल्या शहर कंूऽऽ 
आज भाईऽऽ! 

आज म्हारा प्यारा ओ रै वांका बता दै नै सांसाऽऽ
ऐ!! भैदऽऽ अेर म्हारा प्यारा वो रै वांका बता दे नै मौसेऽऽ
ऐ!! भैदऽऽ अेर म्हारा प्यारा वो रै वांका बता दे नै मौसेऽऽ
ऐ!! भैदऽऽ अेर म्हारा प्यारा वोऽऽ!

देख भाई बस्ती का वो वांका बैताई देनै सांसाऽऽऽऽ
ऐ!! भैदऽऽ अेर भाई बस्ती का वो रै म्हानै बता द्यो नै सांसाऽऽऽऽ
ओ होऽऽ! 
ऐ!! भैदऽऽ अेर भाई गाँवो का ओ नै म्हानै बता द्यो नै सांसाऽऽ
ऐ!! भैदऽऽ अेर भाई गाँवो का ओऽऽ!

तो गाँव का कांई कैह्र्या हैऽऽ 
कांई कैह्र्या है भईयाऽऽ!

अ रै रै राजाजी थै तो लाखा सूं बूझै नै रैऽऽ
ऐ!! राजाजी थै तो लाखा सूं बूझो नै रैऽऽ
प्यारो म्हारो भाईऽऽ
लैग्या मोज!
राजाजी थै तो लाखा सूं बूझो नै रैऽऽ
थांकी सौगंनऽऽ
राजाजी थै तो लाखा सूं बूझो नै रैऽऽ
राजाजी थै तो लाखा सूं बूझो नै रैऽऽ

बूझे नै रै दिळड़ा की बारईताऽऽ हां रैऽऽऽऽऽऽ
हम्मैऽऽ! 
राजाजी थै तो सांसी-सांसी बूझो नैऽऽ
अरे! राजाजी थै सांची-सांची सुणल्यो नैऽऽ
राजाजी थै तो सांची-सांची सुणल्यो नैऽऽ
सुणल्यो नै दिळड़ा की बारईताऽऽ हांऽऽऽऽऽऽ
 
अरै लाखो बाबो ढळ-ढळ रोवैऽऽ
ऐ!ऽऽ! लाखौ बाबो ढळ-ढळ रोवै रैऽऽ 
लाखौ बाबो ढळ-ढळ रोवै रैऽऽ 
ऐ!ऽऽ! लाखौ बाबो ढळ-ढळ रोवै रैऽऽ 

रो र्यो रै बन कैऽऽ माईनैऽऽ हाँ रैऽऽऽऽऽऽ

वाह् प्यारोंऽऽ
वाह म्हारा भाई ओऽऽ!

देख भाई राजा रैऽऽ मैं भी रैऽऽ ज्या र्यां चां नै गांव कंूऽऽ
ऐ!! छोड़ऽऽ अेर भाई राजा रै मैं भी ज्या र्यां चां नै गांव नैऽऽ
छोड़ऽऽ अेर भाई राजा रै मैं भी ज्या र्यां चां नै गांव नैऽऽ
छोड़ऽऽ अेर भाई राजाऽऽ!

गांव का कैह्र्या छै जी दिन बात कैह्र्या छैऽऽ कैह्र्या छै राजा तांई नैऽऽ अम्बर तांई नैऽऽ!
सुण ल्यो नै रै राजा ज्ञानी ऐ! बारईतांऽऽ हाँ रैऽऽऽऽऽऽ 
हम्मे भाईऽऽ! 
राजा ज्ञानी सुण ल्यो बारईतांऽऽ
ऐ!! राजाजी म्हारी सुण ल्यो नै दिल की बातऽऽ
राजाजी म्हारी सुण ल्यो नै दिल की बातऽऽ

एक दिन सो जावो नै लाखा का रै मैहल कै मांईऽऽ
मांई भाई!
अम्बै मांईनैऽऽ
अम्बै मांईनैऽऽ
अम्बै मांईनैऽऽ

कैह्र्या च बस्ती काऽ बारईताऽऽ हाँ रैऽऽऽऽऽऽ 
वाह् प्यारोऽऽ

आज भाई गांव का कैहर्या च बस्ती का राजा पैपसिंह कैऽऽ
कांई भईयाऽऽ 
एक र्यात!
हम्मे भाई!
लाखा प्रजापत कै द्वारै सो जावै तो मैं पाछा ही चल-चाला बस्ती काऽऽ
बस्ती का भाई!
और लाखा प्रजापत कू पाछू ही लै चाला ईका मैहल कैऽऽ 
मांईनै भईयाऽऽ

राजो कैह् र्यो च मैं कूण कै ऊपर राज करुंगोंऽऽ 
हम्मे भैया!
थां सूं तो मैं बस्ती को राजा चोखा लागां ही चाँऽऽ
लागां चा भाई!
और बस्ती बना भी कांई राजाऽऽ 
बाजैगां भाईऽऽ!

तो भईया जा दिन 
हम्मै भाईऽऽ
अरै बड़ी छबी सूँ म्हारा प्यारा ओ जा दिन आजावै च बस्ती का बैठ जावै पाँचऽऽ
पटेल भाईऽऽ!
पटेल बैठ जावै च रै लाखा का मैहल कैऽऽ
माई भईया!
माई नै रै राजा पैपसिंह बैठ जावै च नै लाखा प्रजापत का मैहल कैऽऽ
माईनै भईयाऽऽ
माई म्हारा प्याराओ बैठ जावै रै होवै च आधी रात पैहर कोऽऽ
तड़को भाईऽऽ
बोलै च नै गधी को रैंगटो कैह्र्यो च रै लाखा प्रजापत कैऽऽ
माईनै भाईऽऽ!

देख भाई लाखा रैऽऽ सोवै जाईगै च रै ढळतीऽऽ
ऐ!! र्यातऽऽ अेर भाई लाखा रै सोवै जागै च रै डळतीऽऽ
ऐ!! र्यातऽऽ अेर भाई लाखा रै सोवै जागै च रै डळतीऽऽ
ऐ!! र्यातऽऽ अेर भाई लाखा रै सोवै जागै च रै डळतीऽऽ
ओ हो!
र्यातऽऽ अेर भाई लाखाऽऽ!

डट जौऽऽ डट जौ भाई लाखा रै बाई नै रै परणाई दै म्हारैऽऽ
ऐ!! यादऽऽ अेर भाई लाखा रै बाई न परणा दै न पानदैऽऽ
ऐ!! यादऽऽ अेर भाई लाखा रै बाई परणा दै न पानदैऽऽ
ऐ!! यादऽऽ अेर भाई लाखाऽऽ!

कैह् दै नै रैऽऽ कैह् दै नै रै राजा नै तूभी जारऽऽ
जार भाई!
जार मैहल कै खीजै माईनैऽऽ अम्मै माईनैऽऽ
अजी माईनैऽऽ

कैह् दै रै म्हारी रैऽऽ बारईताऽऽ हाँ रैऽऽऽऽऽऽ
राजा जी थैतो कैह्दै नै रै मैहल कै माईनैऽऽ
राजा जी मोसै कह दै नै मैहल कै माईनैऽऽ
कह दै नै मैहल कै माईनैऽऽ राजा जी मोसै कह दै नै मैहल कै माईनैऽऽ

कैह् दै नै रै राजा नै जारई दैऽऽ हाँ रैऽऽऽऽऽऽ
वाह्! प्यारोंऽऽ

ये बातांऽऽऽऽऽऽ
वाह् प्यारोंऽऽ!

बोलै गरु महाराज कीऽऽ 
जय होऽऽ!

वाह् प्याराओऽऽ!

अतनी बातां सुणलै च म्हारा बीरओ जा दिन कुण सुण लै च देखांनी!
राजा पैपसिंहऽऽ 
सिंह भाईऽऽ!
तो सुणताई भईयाओ ऊकी तो गट्टा की नाड़ी खुवा पै चंडगी कुणकी हिम्मत जै राजा नै कैह्दै भाई थारी तो बाई कुमार को गधी को...
रेंगटो भाईऽऽ!

तो राजा पैपसिंह कैह्बै लाग जावै च भाई अस्या च देखो सुण लै म्हारी बारता तू लाखा प्रजापतऽऽ
प्रजापत भाई!
थारी गधी का रैंगट्या कै म्हारी छोरी परणा द्यूंगो में पानदै म्हारी बाई नै परणा द्युंगो पण म्हारी भी सुण लैं तू दल्की...
बातां भाईऽऽ!
दिलड़ा की सुण लै बारतांऽऽ 
बारतां भईया!

म्हारी नंगरी कै च्यारू मैर ताबां-पितड़ को कोट खच जाणी च्यानजै लाखा प्रजापत ई शहर कै!
माईनै भाईऽऽ!
माईनै रै लाखा प्रजापत सुणलै दिलड़ा की म्हारी बारता कैह् दीज्यो थारा गधी का रैंगट्या सूं मैहल कैऽऽ
माईनै भाईऽऽ
अतनी बातां कैहर्यो च ज्या दिन राजा पैपसिंह मैहल कै माई लाखा प्रजापत कैऽऽ
माईनै भाईऽऽ

अरै राजा पैंपसिंह मैहल मै चल जावै च ज्या दिन भईया घबराग्यों च मन कै!
माईनै भाईऽऽ!
घबराग्यो दिलड़ा कै माई अर कैहर्यो च म्हारा प्याराओं होज्या दिल कीऽऽ
बातां भाईऽऽ!  
गधी को रैंगटो कैह् र्यो च रै लाखा प्रजापत कैऽऽ
माईनै भाईऽऽ!
सुणलै नै बाबा लाखा प्रजापत तू काळी मट्टी भर लैऽऽ पिळी मट्टी भर लै नै गुणां कैऽऽ
माईनै भईयाऽऽ!
मनै फैर दै नंगरी कै च्यारू मेर में कोट खैंच द्यूं तांबा-पितड़ को आधी शहर कैऽऽ
माई भईयाऽऽ!
अरै!

माईनै म्हारा प्याराओ ताबां-पितळ को या कोट खिच दियो च रै! म्हारा प्याराओऽऽ!
हम्मै भाई!
तांबा-पितळ को कोट खिचग्यो मैहल कै ज्या दिन शहर कैऽऽ
कांई भईयाऽऽ!
आज म्हारा प्याराओ लीला ह्यैगी च शंकर भोळाऽऽ 
नाथ की भाईऽऽ!
 
अरै कोट कै दोई दरवाजा राख्या म्हारा प्याराओ ज्या दिन ऊ शहर कै! 
माईनै भईयाऽऽ!

उग आया च सूरज रैऽऽ बाणऽऽ 
बिरथ भाई मरदोऽऽऽऽ!
ऐ!! उगिआयाऽऽ उगिआया रै सूरजऽऽ 
ऐ!! बाणऽऽ अेर भाई मरदो रैऽऽ
उगिआयाऽऽ उगिआया रै सूरजऽऽ 
ऐ!! बाणऽऽ अेर भाई मरदोऽऽ

उगिआया रै उगिआया च सूरजऽऽ! 
ऐ!! बाणऽऽ अेर भाई मरदो रै उगिआया उगिआया रै सूरजऽऽ! 
ऐ!! बाणऽऽ अेर म्हारा प्याराओ रै उगिआया उगिआया रै सूरजऽऽ! 
ऐ!! बाणऽऽ अेर म्हारा प्यारावोऽऽ!

राजा नै रै मालम तो पड़ग्यो च रैऽऽ!
ऐ!! राजा नै मालम भी पड़ग्यो च रैऽऽ
ऐ!! राजा नै मालम भी पड़ग्यो च रैऽऽ
ऐ!! राजा नै मालम भी पड़ग्यो च रैऽऽ

घबराईग्यो मैहल कैऽऽ माईनैऽऽ हाँ रैऽऽऽऽ
वाह प्यारोंऽऽ!

राजो अब राणी नै कैह्र्यो च रैऽऽ
ऐ!! राजो अब राणी नै कैह्र्यो च रैऽऽ
ऐ!! राजो अब राणी नै कैह्र्यो च रैऽऽ
ऐ!! राजो अब राणी नै कैह्र्यो च रैऽऽ

कैह्र्यो च दिलड़ा कीऽऽ बारईता! हाँँ रैऽऽऽऽ
अम्बैऽऽ राजो अब कैह्र्यो च रै दिलड़ा की बातां रैऽऽ
राजो अब कैह्र्यो च रै दिलड़ा की बातां रैऽऽ

कैह्र्यो रैऽऽ मैहल कैऽ माईनैऽऽ हाँ रैऽऽऽऽ!
हम्मे भाईऽऽ!

बोलै गुरु महाराज कीऽऽ
जय हो!