Musical Instrument

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Kadiguang Panmei
He is 81 years old and is a practitioner of the nrah (cup violin), which he learnt to play and construct from his time in the khangchius (Ruangmei men’s dormitories). In this interview, Daimei recounts the days growing up in the khangchiu in his village of Thalluan where he learnt most of the songs…
in Interview
Kadiguang Panmei
Most traditional cultures and their folk music have a variety of accompanying musical instruments. The form, melody and function are indicative of that culture's technical and geographical ingenuity. The Ruangmei Naga people are one of several tribes of the Naga people that inhabit Northeast India…
in Article
Kadiguang Panmei
The Ruangmei Nagas, like other Naga tribes, are known for their rich cultural heritage. Their traditions are rooted in their origin as part of a conglomerate of tribes called the Zeliangruang, which comprise of the Zemei, the Liangmei, the Ruangmei and Inpui tribes. Zeliangruang Naga people are…
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Kadiguang Panmei
Ruangmeis are one of the Naga tribes of India and are predominantly based in Tamenglong and Noney districts of Manipur and parts of Assam and Nagaland. The name Ruangmei means people from the south and is an indication of the direction they migrated to from their ancestral home of Makuilongdi. …
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अश्विनी कुमार पंकज (Ashwini Kumar Pankaj)
‘बानाम’ दुनिया के सबसे पुराने वाद्ययंत्रों में से एक है जिसका प्रचलन पारंपरिक रूप से संताल[1] आदिवासी समाज आज भी करता है। आदिमकला के स्वरूप वाला यह वाद्ययंत्र आकार-प्रकार में ‘रावणहत्था’, ‘इकतारा’, ‘सारिंदा’ (सारंगी) या ‘वायलिन’ जैसा दिखता है। पर ग़ौर करनेकरने वाली बात है कि आकार-प्रकार में इन …
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अश्विनी कुमार पंकज (Ashwini Kumar Pankaj)
भारत के आदिवासी समुदाय अपनी तमाम सांस्कृतिक विशिष्टताओं के साथ अपनी सांगीतिक परम्पराओं व अनूठे वाद्ययंत्रों के लिए भी जाने जाते हैं। जिस तरह से ‘नगाड़ा’ मुंडाओं की और ‘माँदर’ खड़िया व उराँवों की सांगीतिक विरासत की पहचान है, उसी प्रकार ‘बानाम’ संतालों[1] का एक मुख्य वाद्ययंत्र है। संताल लोग इस…
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अश्विनी कुमार पंकज (Ashwini Kumar Pankaj)
दुनिया में वाद्ययंत्रों का इतिहास बहुत पुराना है, उतना ही पुराना जितना कि मानव और उसकी सभ्यता है। लेकिन यह कहना बहुत मुश्किल है कि मनुष्य ने सबसे पहले कौन सा वाद्ययंत्र बनाया और उसका प्रयोग किसके लिए किया। सृष्टिकर्ता के प्रति आभार ज्ञापन के लिए, अपनी भावनाओं के संप्रेषण के लिए या फिर व्यक्तिगत और…
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अश्विनी कुमार पंकज (Ashwini Kumar Pankaj)
संताल आदिवासियों का ष्बानामष् दुनिया का एक ऐसा वाद्ययंत्र है जिसके हज़ारों रूप हैं और जो अपनी कहानी के अलावा और भी हज़ारों कहानियां सुनाता है।  यानी यह एक ऐसा लोककथात्मक आदिवासी वाद्य है जिसकी कोई दूसरी कॉपी नहीं होती। इसलिए कि प्रत्येक बानाम अपनी बनावट और रूप.रंग में एक.दूसरे से बिल्कुल भिन्न होता…
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