Chhattisgarh

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Ajeya Vajpayee and Anzaar Nabi
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Ajeya Vajpayee
The site of Tālā is located in the Ameri-Kanipa village in the Bilaspur district of Chhattisgarh. The site has two ruined temples- Devarani and Jethani, several dislodged sculptures, architectural elements and a site museum. Of whatever is left; the Devarani better preserved than the Jethani,…
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Ajeya Vajpayee and Anzaar Nabi
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Vishakha Khetrapal
The Ramnami Samaj of Chhattisgarh found a rather unique and peaceful way of opposing the caste system in India. Not allowed to enter temples, the community members tattooed their entire bodies, in some cases even eyelids, with the name of ‘Nirgun Ram’ as a way of peaceful defiance against the…
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Ajeya Vajpayee and Anzaar Nabi
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मुश्ताक खान
सामान्यतः यही माना जाता है कि लोक कलाओं में कलाकार कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लेते, वे अपने परिवार के साथ काम करते-करते स्वतः ही उसे आत्मसात कर लेते हैं। लोक कला एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी को सहज ही हस्तांतरित होती चलती है। वर्तमान पीढ़ी पारम्परिक कला को समकालीन स्वरुप में ढालकर उसका समकालीन औचित्य…
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मुश्ताक खान
सन १९८२ में भोपाल में भारत भवन की स्थापना के उपरांत तत्कालीन मध्यप्रदेश के जो लोक कलाकार प्रकाश में आए, इनमें सुंदरी बाई रजवार भी थीं। सरगुजा के रजवार समुदाय में अपनी झोपड़ियों की कच्ची मिट्टी से बनी दीवारों पर भित्तिचित्र बनाने की परंपरा तो थी परन्तु सन १९८३ में सोना बाई रजवार को मिली प्रसिद्धी ने…
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मुश्ताक खान
बस्तर का गोंचा पर्व मूलतः ओडिशा के गुण्डिचा पर्व का ही स्थानिय रूप है। जिस प्रकार ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ की रथयात्रा आयोजित की जाती है, इस अवसर पर उसी के अनुकरण में बस्तर क्षेत्र के जगदलपुर में भी रथयात्रा का आयोजन बहुत धूमधाम से होता है। आदिवासी बहुल बस्तर में जगन्नाथ उपासना का अपना इतिहास है।…
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रूद्र नारायण पाणिग्रही
बस्तर अंचल में रथयात्रा उत्सव का आरम्भ महाराजा पुरूषोत्तम देव की जगन्नाथपुरी यात्रा के पश्चात् हुआ। इस पर्व के नामकरण के बारे में मान्यता है कि ओड़िसा में सर्वप्रथम राजा इन्द्रद्युम्न ने रथयात्रा प्रारंभ की थी, उनकी पत्नी का नाम ‘गुण्डिचा’ था। ओड़िसा में गुण्डिचा कहा जाने वाला यह पर्व कालान्तर में…
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