North East India

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Mithu Biswas
This text interview highlights the journeys of three avant-garde non-proscenium theatre forms in Assam as depicted by one representative practitioner from each group—Badungduppa Kalakendra of Rampur, Goalpara; Replica Theatre Village of Jorhat; and Silchar-based Chorus. These groups have cultivated…
in Interview
Mithu Biswas
Beyond the mainstream genres of theatre in Assam, experimental non-proscenium forms have taken centre stage in the last decade of the twentieth century. Indigenous folk theatre forms like ankiya naat, bhaona, mobile theatre, and proscenium theatre constituted the history of theatre in Assam till…
in Module
Mithu Biswas
The recorded history of theatre in Assam goes back to the sixteenth century. The first written drama in this land, a unique form of theatrical performance known as bhaona (Fig. 1), was created by Srimanta Shankaradeva (1449–1568), who wrote Chinha-Yatra as the first ankiya naat (one-act play).  Fig…
in Overview
मनीष कुमार जैसल (Manish Kumar Jaisal)
    बिहार से ताल्लुक रखने वाले डॉ. भारती वर्तमान समय में मध्य भारत के अलावा पूर्वोत्तर की कला संस्कृति, समाज और सिनेमा पर गहरी रुचि और गहन अध्ययन-अध्यापन के लिए जाने जाते हैं। पिछले 30 वर्षों से इस क्षेत्र से जुड़े डॉ भारती बीते तीन साल ईस्ट जोनल कल्चरल सेंटर, कोलकाता, के डायरेक्टर रहे और अभी हाल…
in Interview
मनीष कुमार जैसल (Manish Kumar Jaisal)
मणिपुर अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, संस्कृति, परम्पराओं, वेषभूषा व खान-पान के अलावा अपनी सिने संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। भारत के पूर्वोत्तर में स्थित राज्य मणिपुर में सिनेमा को आए 98 वर्ष के क़रीब हो चुके हैं। मेईति भाषा मणिपुर की आधिकारिक भाषा है,यह मणिपुर से सटे राज्य असम,त्रिपुरा और…
in Article
मनीष कुमार जैसल (Manish Kumar Jaisal)
असमिया फिल्म ‘मिशन चाइना’ की असम के बाहर व्यावसायिक सफ़लता और साथ ही एक अन्य असमिया फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ का भारत की ऑस्कर एंट्री के लिये चुना जाना इंगित करता है कि तरफ़ असमिया फ़िल्में असम से बाहर के दर्शकों की तरफ़ बढ़ रही हैं तो वहीं पुरस्कारों की होड़ में भी ये पीछे नहीं हैं। असम के फ़िल्मी…
in Article
मनीष कुमार जैसल (Manish Kumar Jaisal)
असमिया सिनेमा के प्रथम फ़िल्मकार ज्योतिप्रसाद अग्रवाल से लेकर जाहनु बरुआ और रीमा दास तक की फ़िल्मों का कलात्मक पक्ष अति महत्वपूर्ण रहा है। व्यवसाय के नज़रिए से असमिया फ़िल्में भले ही फ़्लॉप रही हो लेकिन कलात्मकता और प्रयोगों की कमी नहीं दिखती। असम सरकार द्वारा फ़िल्मों के संरक्षण तथा विकास पर…
in Module
Akhyai Jyoti Mahanta
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