राहुल कुमार सिंह

शोधकर्ता, लेखक एवं विचारक
उपसंचालक, संस्कृति एवं पुरातत्व, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ की सीमावर्ती पहाड़ियां उच्चता, प्राकृतिक संसाधनयुक्त रत्नगर्भा धरती सम्पन्नता, वन-कान्तार सघनता का परिचय देती हैं तो मैदानी भाग उदार विस्तार का परिचायक है। इस मैदानी हिस्से की जलराशि में सामुदायिक समन्वित संस्कृति के दर्शन होते हैं, जहां जल-संसाधन और प्रबंधन की समृद्ध परम्परा के प्रमाण, तालाबों के साथ विद्यमान है और इसलिए तालाब स्नान, पेयजल और अपासी (आबपाशी या सिंचाई) आवश्यकताओं की प्रत्यक्ष पूर्ति के साथ जन-जीवन और समुदाय के वृहत्तर सांस्कृतिक संदर्भयुक्त बिन्दु हैं।

 

This content has been created as part of a project commissioned by the Directorate of Culture and Archaeology, Government of Chhattisgarh, to document the cultural and natural heritage of the state of Chhattisgarh.