Vasudeva

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मुश्ताक खान
समय के साथ सामाजिक परिवर्तन अपरिहार्य है। अतीत की कितनी प्रथाएं, रीती रिवाज और मान्यताएं समय के साथ अपना अस्तित्व खो चुकीं अथवा समय के अनुरूप अपना कलेवर बदल कर किसी प्रकार अपने को बनाए रख सकीं कहना कठिन है। अनेक व्यवसाय और समुदाय समयानुकूल न रहने के कारण या तो विलुप्त हो गये या किसी तरह अपने को…
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